Mantra.Tips

हेतुः समस्तजगताम् PDF

हेतुः समस्तजगताम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

हेतुः समस्तजगतां त्रिगुणापि दोषै- र्न ज्ञायसे हरिहरादिभिरप्यपारा । सर्वाश्रयाखिलमिदं जगदंशभूत- मव्याकृता हि परमा प्रकृतिस्त्वमाद्या ॥

hetuḥ samastajagatāṃ triguṇāpi doṣai- rna jñāyase hariharādibhirapyapārā sarvāśrayākhilamidaṃ jagadaṃśabhūta- mavyākṛtā hi paramā prakṛtistvamādyā

आप समस्त जगत् की कारण और तीनों गुणों से युक्त होने पर भी दोषों से युक्त नहीं जानी जातीं; आप हरि, हर आदि के लिए भी अपार हैं। आप सबकी आश्रय हैं; यह समस्त जगत् आपका अंशमात्र है, क्योंकि आप ही परम, अव्यक्त, आद्या प्रकृति हैं।