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हुङ्कारेणैव तं भस्म (धूम्रलोचन का भस्म होना) — Word-by-Word Meaning

हुङ्कारेणैव तं भस्म (धूम्रलोचन का भस्म होना)

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

देव्युवाच
devyuvāca
देवी (भगवती) बोलीं
दैत्येश्वरेण प्रहितः
daityeśvareṇa prahitaḥ
दैत्येश्वर (शुम्भ) द्वारा भेजा गया
बलवान्
balavān
बलवान्, शक्तिशाली
बलसंवृतः
bala-saṃvṛtaḥ
सेना से घिरा हुआ
बलात् नयसि माम् एवम्
balāt nayasi mām evam
यदि तुम इस प्रकार मुझे बलपूर्वक ले जाओगे
ततः किं ते करोमि अहम्
tataḥ kiṃ te karomi aham
तो मैं तुम्हारा क्या कर सकती हूँ (कैसे रोक सकती हूँ)?
ऋषिरुवाच
ṛṣiruvāca
ऋषि बोले
इति उक्तः
iti uktaḥ
इस प्रकार कहे जाने पर
सः अभ्यधावत् ताम्
saḥ abhyadhāvat tām
वह उन पर झपटा
असुरः धूम्रलोचनः
asuraḥ dhūmralocanaḥ
असुर धूम्रलोचन ('धूम्र-नयन')
हुङ्कारेण एव
huṅkāreṇa eva
केवल एक 'हुँ' ध्वनि (हुँकार) से उसे भस्म कर दिया
तं भस्म सा चकार
taṃ bhasma sā cakāra
अम्बिका (माता) ने, तब
अम्बिका तदा
ambikā tadā
Ambika (the Mother), then

Complete Translation

देवी बोलीं — 'तुम दैत्येश्वर द्वारा भेजे गए हो, बलवान् हो और सेना से घिरे हो; यदि तुम इस प्रकार मुझे बलपूर्वक ले जाओगे — तो मैं तुम्हारा क्या कर सकती हूँ?' ऋषि बोले — इस प्रकार कहे जाने पर असुर धूम्रलोचन उन पर झपटा; और तब अम्बिका ने हुँकार मात्र से उसे भस्म कर दिया।

Origin & History

Source: Durga Saptashati Chapter 6

Author: Sage Markandeya (Markandeya Purana)

Period: c. 400–600 CE (Markandeya Purana)

दैत्यराज शुम्भ के प्रथम दूत के देवी को मनाने में असफल होने के पश्चात्, शुम्भ ने दैत्य धूम्रलोचन को साठ हजार असुरों के साथ उन्हें बलपूर्वक लाने भेजा। हिमालय पर विराजमान देवी ने शान्तभाव से उससे कहा कि वह उसे प्रयास करने से रोक नहीं सकतीं। जब धूम्रलोचन झपटा, तब अम्बिका ने उसे केवल एक हुँकार से भस्म कर दिया, और उनके सिंह ने उसकी सेना को नष्ट कर दिया।

Frequently Asked Questions

धूम्रलोचन कौन था?
धूम्रलोचन, जिसका अर्थ है 'धूम्र-नयन', दैत्यों में एक प्रमुख था। दैत्यराज शुम्भ ने उसे साठ हजार असुरों के साथ देवी को बलपूर्वक पकड़ने और बालों से घसीट लाने भेजा। देवी ने उसे केवल एक हुँकार से भस्म कर दिया।
'हुँकार' का क्या महत्त्व है?
हुँकार शक्तिशाली बीज-ध्वनि 'हुँ' है। देवी द्वारा इस एक उच्चारण मात्र से एक बलशाली दैत्य का नाश यह दर्शाता है कि उनकी शक्ति सहज है और उनकी इच्छा से आवेशित पवित्र ध्वनि स्वयं ही महानतम बुराई को भस्म कर सकती है।
यह दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय से है?
ये दुर्गा सप्तशती के षष्ठ अध्याय (धूम्रलोचन-वध) के 8वें और 9वें श्लोक हैं, जो देवी महासरस्वती द्वारा अधिष्ठित उत्तम चरित के अन्तर्गत आता है।

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