इन्द्र सूक्तम् (यो जात एव) Meaning — Line by Line
इन्द्र सूक्तम् (यो जात एव)
Every verse and every word explained in English & Hindi
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Om Yo jāta eva prathamo manasvān
ॐ यो जात एव प्रथमो मनस्वान् देवो देवान्क्रतुना पर्यभूषत्। यस्य शुष्माद्रोदसी अभ्यसेतां नृम्णस्य मह्ना स जनास इन्द्रः॥
Om Yo jāta eva prathamo manasvān Devo devān kratunā paryabhūṣat Yasya śuṣmād rodasī abhyasetāṁ Nṛmṇasya mahnā sa janāsa indraḥ
Meaningजो जन्म लेते ही सर्वप्रथम और बुद्धिमान होकर अपने सामर्थ्य से देवताओं से भी श्रेष्ठ हुआ; जिसके बल और पराक्रम की महिमा से द्यावा-पृथिवी (आकाश और पृथ्वी) काँप उठते हैं — हे लोगो! वही इन्द्र है।
Yo pṛthivīṁ vyathamānām adṛṁhad
यो पृथिवीं व्यथमानामदृंहद् यः पर्वतान्प्रकुपिताँ अरम्णात्। यो अन्तरिक्षं विममे वरीयो यो द्यामस्तभ्नात्स जनास इन्द्रः॥
Yo pṛthivīṁ vyathamānām adṛṁhad Yaḥ parvatān prakupitāṁ aramṇāt Yo antarikṣaṁ vimame varīyo Yo dyām astabhnāt sa janāsa indraḥ
Meaningजिसने काँपती हुई पृथिवी को स्थिर किया, जिसने प्रकुपित (हिलते) पर्वतों को शान्त किया, जिसने विशाल अन्तरिक्ष को मापा और द्युलподатोक को थाम रखा — हे लोगो! वही इन्द्र है।
Yo hatvāhim ariṇāt sapta sindhūn
यो हत्वाहिमरिणात्सप्त सिन्धून् यो गा उदाजदपधा वलस्य। यो अश्मनोरन्तरग्निं जजान संवृक्समत्सु स जनास इन्द्रः॥
Yo hatvāhim ariṇāt sapta sindhūn Yo gā udājad apadhā valasya Yo aśmanor antar agniṁ jajāna Saṁvṛk samatsu sa janāsa indraḥ
Meaningजिसने अहि (वृत्र) का वध करके सात नदियों को मुक्त किया, जिसने वल की गुफा खोलकर छिपी हुई गौओं को बाहर निकाला, जिसने दो पत्थरों के बीच अग्नि को उत्पन्न किया और संग्रामों में विजयी रहा — हे लोगो! वही इन्द्र है।
Yenemā viśvā cyavanā kṛtāni
येनेमा विश्वा च्यवना कृतानि यो दासं वर्णमधरं गुहाकः। श्वघ्नीव यो जिगीवाँल्लक्षमाद- दर्यः पुष्टानि स जनास इन्द्रः॥
Yenemā viśvā cyavanā kṛtāni Yo dāsaṁ varṇam adharaṁ guhākaḥ Śvaghnīva yo jigīvāṁ lakṣam ādad Aryaḥ puṣṭāni sa janāsa indraḥ
Meaningजिसके द्वारा ये सब चर-जगत् रचे गए, जिसने शत्रुओं को परास्त कर गुप्त कर दिया; जो विजयी जुआरी के समान शत्रु का सारा धन हर लेता है — हे लोगो! वही इन्द्र है।
Yaṁ smā pṛcchanti kuha seti ghoram
यं स्मा पृच्छन्ति कुह सेति घोरम् उतेमाहुर्नैषो अस्तीत्येनम्। सो अर्यः पुष्टीर्विज इवा मिनाति श्रद्धास्मै धत्त स जनास इन्द्रः॥
Yaṁ smā pṛcchanti kuha seti ghoram utem āhur naiṣo astīty enam So aryaḥ puṣṭīr vija ivā mināti Śraddhāsmai dhatta sa janāsa indraḥ
Meaningजिस भयंकर के विषय में लोग पूछते हैं 'वह कहाँ है?', और कुछ तो यहाँ तक कहते हैं 'वह है ही नहीं'; जो जुआरी के दाँव के समान शत्रु की समृद्धि को हर लेता है — उस पर श्रद्धा रखो — हे लोगो! वही इन्द्र है।
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Rigveda 2.12
Author: Rishi Gritsamada Shaunahotra (Bhargava Shaunaka)
Period: Vedic period (c. 1500–1200 BCE)
इन्द्र के प्रति यह प्रसिद्ध सूक्त ऋग्वेद के द्वितीय मण्डल का है, जो ऋषि गृत्समद के कुल का ग्रन्थ है। इसकी ऋचाओं में इन्द्र को देवों में अग्रणी, सूखे के दैत्य वृत्र का वधकर्ता, सात नदियों का मोचक तथा वह कॉस्मिक नायक कहकर सराहा गया है जिसने पृथिवी को स्थिर किया और आकाश को थामा। 'स जनास इन्द्रः' ध्रुवपद इसे सम्पूर्ण वेद के सर्वाधिक स्मरणीय और बारम्बार उद्धृत सूक्तों में से एक बनाता है।
Frequently Asked Questions
इन्द्र सूक्तम् क्या है?▼
'स जनास इन्द्रः' का क्या अर्थ है?▼
इन्द्र द्वारा वृत्र-वध की कथा क्या है?▼
सूक्त यह क्यों कहता है कि कुछ लोग इन्द्र के अस्तित्व पर संदेह करते हैं?▼
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