इति दत्त्वा तयोर्देवी Meaning — Line by Line
इति दत्त्वा तयोर्देवी
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
Every verse of इति दत्त्वा तयोर्देवी with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.
mārkaṇḍeya uvāca
मार्कण्डेय उवाच इति दत्त्वा तयोर्देवी यथाभिलषितं वरम् । बभूवान्तर्हिता सद्यो भक्त्या ताभ्यामभिष्टुता ॥
mārkaṇḍeya uvāca iti dattvā tayordevī yathābhilaṣitaṃ varam babhūvāntarhitā sadyo bhaktyā tābhyāmabhiṣṭutā
Meaningमार्कण्डेय बोले — इस प्रकार उन दोनों को यथेच्छ वर देकर देवी, उन दोनों द्वारा भक्तिपूर्वक स्तुति की जाकर तत्काल अन्तर्धान हो गईं।
evaṃ devyā varaṃ labdhvā surathaḥ kṣatriyarṣabhaḥ
एवं देव्या वरं लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः । सूर्याज्जन्म समासाद्य सावर्णिर्भविता मनुः ॥
evaṃ devyā varaṃ labdhvā surathaḥ kṣatriyarṣabhaḥ sūryājjanma samāsādya sāvarṇirbhavitā manuḥ
Meaningइस प्रकार देवी से वर पाकर क्षत्रियश्रेष्ठ सुरथ, सूर्य से जन्म पाकर सावर्णि (आठवें) मनु होंगे।
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Durga Saptashati Chapter 13
Author: Maharshi Markandeya (traditionally ascribed)
Period: Puranic period (c. 5th–6th century CE for the Devi Mahatmya)
देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती या चण्डी), जो मार्कण्डेय पुराण का अंश है, इस वचन से आरम्भ होता है कि ऋषि मार्कण्डेय बताएँगे कि सूर्यपुत्र सावर्णि महामाया की शक्ति से आठवें मनु कैसे बने। सम्पूर्ण ग्रन्थ — देवी की विजयों के तीन महान चक्र, जो ऋषि मेधा द्वारा राजा सुरथ और वैश्य समाधि को सुनाए गए — इसी फ्रेम के भीतर प्रकट होता है। इन अन्तिम श्लोकों में देवी, दोनों को उनके वर देकर, भक्तिपूर्वक स्तुति की जाकर तत्काल अन्तर्धान हो जाती हैं; और मार्कण्डेय घोषणा करते हैं कि उनसे वरदान पाकर सुरथ सूर्य से सावर्णि मनु रूप में पुनर्जन्म लेंगे। इस प्रकार वह पवित्र कथा वैसे ही समाप्त होती है जैसे वह आरम्भ हुई थी।
Frequently Asked Questions
यह अंश क्या है?▼
सप्तशती सावर्णि मनु के साथ क्यों समाप्त होती है?▼
ये श्लोक कब पढ़े जाते हैं?▼
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