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जयन्ती मङ्गला काली स्तोत्रम् Meaning — Line by Line

जयन्ती मङ्गला काली स्तोत्रम्

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of जयन्ती मङ्गला काली स्तोत्रम् with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Jayanti Mangala Kali Bhadrakali Kapalini।

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

Jayanti Mangala Kali Bhadrakali Kapalini। Durga Kshama Shiva Dhatri Svaha Svadha Namostu Te॥

Meaningजयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी; दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा — आपको नमस्कार है! (ये देवी के नौ पवित्र नाम हैं।)

Verse 2#

Om Durge Durge Rakshani Svaha।

दुर्गे दुर्गे रक्षणि स्वाहा।

Om Durge Durge Rakshani Svaha।

Meaningॐ! हे दुर्गे, हे दुर्गे, हे रक्षिणी — स्वाहा!

Verse 3#

Ya Devi Sarva-Bhuteshu Matri-Rupena Samsthita।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

Ya Devi Sarva-Bhuteshu Matri-Rupena Samsthita। Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah॥

Meaningजो देवी समस्त प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं, उन्हें नमस्कार है, उन्हें नमस्कार है, उन्हें बारम्बार नमस्कार है।

Verse 4#

Sarva-Mangala-Mangalye Shive Sarvartha-Sadhike।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

Sarva-Mangala-Mangalye Shive Sarvartha-Sadhike। Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostu Te॥

Meaningहे समस्त मङ्गलों की मङ्गलस्वरूपा, हे शिवे, समस्त प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, हे शरण देने वाली त्र्यम्बके गौरि, हे नारायणि — आपको नमस्कार है।

Word-by-Word Breakdown

जयन्ती
Jayanti
जयन्ती — सदा विजयी देवी
मङ्गला
Mangala
मङ्गला — मङ्गलस्वरूपा, कल्याण की दात्री
काली
Kali
काली — कृष्णवर्णा देवी, काल एवं संहार की शक्ति
भद्रकाली
Bhadrakali
भद्रकाली — मङ्गलकारिणी (कल्याणमयी) काली
कपालिनी
Kapalini
कपालिनी — कपाल (मुण्डमाला) धारण करने वाली
दुर्गा
Durga
दुर्गा — दुर्गम, विघ्नों का नाश करने वाली
क्षमा
Kshama
क्षमा — क्षमा एवं सहनशीलता की मूर्ति
शिवा
Shiva
शिवा — शिव की कल्याणमयी पत्नी, मङ्गलमयी
धात्री
Dhatri
धात्री — सबकी धारक एवं पालक
स्वाहा
Svaha
स्वाहा — देवताओं को आहुति देने का पवित्र मन्त्रोच्चार
स्वधा
Svadha
स्वधा — पितरों को आहुति देने का पवित्र मन्त्रोच्चार
नमोऽस्तु ते
Namostu Te
नमोऽस्तु ते — आपको नमस्कार हो
दुर्गे दुर्गे रक्षणि
Durge Durge Rakshani
दुर्गे दुर्गे रक्षणि — हे दुर्गा, हे दुर्गा, हे रक्षिणी (दुर्गा गायत्री बीज-प्रार्थना)
मातृरूपेण संस्थिता
Matri-Rupena Samsthita
मातृरूपेण संस्थिता — जो समस्त प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं
नमस्तस्यै
Namas-Tasyai
नमस्तस्यै — उन्हें नमस्कार है
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये
Sarva-Mangala-Mangalye
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये — हे समस्त मङ्गलों की मङ्गलस्वरूपा
सर्वार्थसाधिके
Sarvartha-Sadhike
सर्वार्थसाधिके — समस्त प्रयोजनों (लौकिक एवं आध्यात्मिक) को सिद्ध करने वाली
शरण्ये
Sharanye
शरण्ये — शरण चाहने वालों की शरणस्थली
त्र्यम्बके
Tryambake
त्र्यम्बके — त्रिनेत्रा देवी
नारायणि
Narayani
नारायणि — नारायणी, परम शक्ति, नारायण की शक्तिस्वरूपा

Origin & History

Source: Devi Mahatmya (Durga Saptashati) tradition — the Durga Nava Nama, with the Durga Gayatri and verses from the Narayani Stuti and Aparajita (Tantrokta Devi) Suktam

Author: Traditional (Markandeya Purana tradition)

Period: Classical

'जयन्ती मङ्गला काली...' ये नौ नाम शाक्त परम्परा में देवी के सर्वाधिक प्रिय आवाहनों में से हैं, जो उनके विजयी, मङ्गलमय, उग्र एवं पालनकारी रूपों को एक ही श्लोक में समेट लेते हैं। भक्त इन नामों को दुर्गा गायत्री तथा देवी महात्म्य के महान् ध्रुवपदों के साथ जोड़कर एक सम्पूर्ण, संक्षिप्त नित्य प्रार्थना बनाते हैं — संकटकाल में माता की रक्षा के आवाहन हेतु पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपी गई एक परिपाटी।

Frequently Asked Questions

जयन्ती मङ्गला काली श्लोक में नौ नाम कौन से हैं?
जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा (क्षेमा), शिवा और धात्री। ये 'दुर्गा नवनाम' हैं — नौ नाम जिनसे देवी का आवाहन किया जाता है, इसके पश्चात् स्वाहा और स्वधा आहुतियाँ आती हैं।
यह स्तोत्र कहाँ से आता है?
नौ-नामों का श्लोक देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) परम्परा से है और नित्य देवी पूजा में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है। यह सामान्यतः दुर्गा गायत्री ('ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षणि स्वाहा') तथा प्रसिद्ध 'या देवी' एवं 'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये' श्लोकों के साथ संयुक्त किया जाता है।
ये नौ नाम क्यों जपे जाते हैं?
नौ नामों का जप पारम्परिक रूप से माता की सम्पूर्ण रक्षा एवं कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है, जो भय और बाधाओं को दूर कर शुभता प्रदान करता है, क्योंकि प्रत्येक नाम उनकी शक्ति के एक विशिष्ट रूप का आवाहन करता है।
इसे पढ़ने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?
इसे नित्य पढ़ा जा सकता है, किन्तु मंगलवार और शुक्रवार को तथा सम्पूर्ण नवरात्रि में यह विशेष रूप से शुभ है। यह इतना छोटा है कि प्रति प्रातः एक रक्षक प्रार्थना के रूप में जपा जा सकता है।

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