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जयन्ती मङ्गला काली स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 9× जप·🕐 नित्य प्रातः या सायं, मंगलवार और शुक्रवार को, तथा नवरात्रि के समय·📜 Devi Mahatmya (Durga Saptashati) tradition — the Durga Nava Nama, with the Durga Gayatri and verses from the Narayani Stuti and Aparajita (Tantrokta Devi) Suktam

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अर्थ

जयन्ती मङ्गला काली स्तोत्रम् प्रसिद्ध 'दुर्गा नवनाम' — देवी के नौ पवित्र नामों (जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री) — पर आधारित है, जो देवी महात्म्य परम्परा से हैं। दुर्गा गायत्री बीज-प्रार्थना तथा प्रसिद्ध 'या देवी' एवं 'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये' श्लोकों के साथ यह रक्षा और कृपा हेतु एक संक्षिप्त किन्तु शक्तिशाली नित्य प्रार्थना है। इन नामों का पाठ भय का नाश कर माता का सम्पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करने वाला माना जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Devi Mahatmya (Durga Saptashati) tradition — the Durga Nava Nama, with the Durga Gayatri and verses from the Narayani Stuti and Aparajita (Tantrokta Devi) Suktam · Traditional (Markandeya Purana tradition) · Classical

'जयन्ती मङ्गला काली...' ये नौ नाम शाक्त परम्परा में देवी के सर्वाधिक प्रिय आवाहनों में से हैं, जो उनके विजयी, मङ्गलमय, उग्र एवं पालनकारी रूपों को एक ही श्लोक में समेट लेते हैं। भक्त इन नामों को दुर्गा गायत्री तथा देवी महात्म्य के महान् ध्रुवपदों के साथ जोड़कर एक सम्पूर्ण, संक्षिप्त नित्य प्रार्थना बनाते हैं — संकटकाल में माता की रक्षा के आवाहन हेतु पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपी गई एक परिपाटी।

शास्त्रों में वर्णित

पारम्परिक रूप से कहा जाता है कि अकस्मात् संकट के क्षणों में भी देवी के इन नौ नामों का स्मरण उनकी तत्काल रक्षा को आमन्त्रित करता है, माता प्रार्थना के मर्म में नामित 'रक्षिणी' (रक्षयित्री) के रूप में अपने भक्त की रक्षा करती हैं।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

Jayanti Mangala Kali Bhadrakali Kapalini। Durga Kshama Shiva Dhatri Svaha Svadha Namostu Te॥

अर्थ:जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी; दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा — आपको नमस्कार है! (ये देवी के नौ पवित्र नाम हैं।)

श्लोक 2

दुर्गे दुर्गे रक्षणि स्वाहा।

Om Durge Durge Rakshani Svaha।

अर्थ:ॐ! हे दुर्गे, हे दुर्गे, हे रक्षिणी — स्वाहा!

श्लोक 3

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

Ya Devi Sarva-Bhuteshu Matri-Rupena Samsthita। Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namas-Tasyai Namo Namah॥

अर्थ:जो देवी समस्त प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं, उन्हें नमस्कार है, उन्हें नमस्कार है, उन्हें बारम्बार नमस्कार है।

श्लोक 4

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

Sarva-Mangala-Mangalye Shive Sarvartha-Sadhike। Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostu Te॥

अर्थ:हे समस्त मङ्गलों की मङ्गलस्वरूपा, हे शिवे, समस्त प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, हे शरण देने वाली त्र्यम्बके गौरि, हे नारायणि — आपको नमस्कार है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

जयन्ती🔊Jayantiजयन्ती — सदा विजयी देवी
मङ्गला🔊Mangalaमङ्गला — मङ्गलस्वरूपा, कल्याण की दात्री
काली🔊Kaliकाली — कृष्णवर्णा देवी, काल एवं संहार की शक्ति
भद्रकाली🔊Bhadrakaliभद्रकाली — मङ्गलकारिणी (कल्याणमयी) काली
कपालिनी🔊Kapaliniकपालिनी — कपाल (मुण्डमाला) धारण करने वाली
दुर्गा🔊Durgaदुर्गा — दुर्गम, विघ्नों का नाश करने वाली
क्षमा🔊Kshamaक्षमा — क्षमा एवं सहनशीलता की मूर्ति
शिवा🔊Shivaशिवा — शिव की कल्याणमयी पत्नी, मङ्गलमयी
धात्री🔊Dhatriधात्री — सबकी धारक एवं पालक
स्वाहा🔊Svahaस्वाहा — देवताओं को आहुति देने का पवित्र मन्त्रोच्चार
स्वधा🔊Svadhaस्वधा — पितरों को आहुति देने का पवित्र मन्त्रोच्चार
नमोऽस्तु ते🔊Namostu Teनमोऽस्तु ते — आपको नमस्कार हो
दुर्गे दुर्गे रक्षणि🔊Durge Durge Rakshaniदुर्गे दुर्गे रक्षणि — हे दुर्गा, हे दुर्गा, हे रक्षिणी (दुर्गा गायत्री बीज-प्रार्थना)
मातृरूपेण संस्थिता🔊Matri-Rupena Samsthitaमातृरूपेण संस्थिता — जो समस्त प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं
नमस्तस्यै🔊Namas-Tasyaiनमस्तस्यै — उन्हें नमस्कार है
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये🔊Sarva-Mangala-Mangalyeसर्वमङ्गलमाङ्गल्ये — हे समस्त मङ्गलों की मङ्गलस्वरूपा
सर्वार्थसाधिके🔊Sarvartha-Sadhikeसर्वार्थसाधिके — समस्त प्रयोजनों (लौकिक एवं आध्यात्मिक) को सिद्ध करने वाली
शरण्ये🔊Sharanyeशरण्ये — शरण चाहने वालों की शरणस्थली
त्र्यम्बके🔊Tryambakeत्र्यम्बके — त्रिनेत्रा देवी
नारायणि🔊Narayaniनारायणि — नारायणी, परम शक्ति, नारायण की शक्तिस्वरूपा

जयन्ती मङ्गला काली स्तोत्रम् पाठ के लाभ

देवी का उनके नौ परम पवित्र नामों (दुर्गा नवनाम) द्वारा आवाहन करता है

भय, संकट, रोग एवं नकारात्मक प्रभावों से रक्षा हेतु पढ़ा जाता है

छोटा और सरलता से कण्ठस्थ होने वाला, नित्य शाक्त प्रार्थना अथवा चण्डी पाठ से पूर्व आदर्श

दुर्गा गायत्री बीज-मन्त्र ('ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षणि स्वाहा') माता का कवच आवाहित करता है

मङ्गल (शुभता) तथा समस्त सद्-प्रयोजनों की सिद्धि प्रदान करता है

दिव्य माता को सबकी शरणस्थली (शरण्ये) मानकर समर्पण को गहरा करता है

आन्तरिक एवं बाह्य बाधाओं पर विजय (जय) हेतु पारम्परिक रूप से जपा जाता है

जयन्ती मङ्गला काली स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या9बार
उत्तम समयनित्य प्रातः या सायं, मंगलवार और शुक्रवार को, तथा नवरात्रि के समय

देवी के चित्र के सम्मुख पूर्व की ओर मुख करके बैठें, दीप जलाएँ, और भक्तिपूर्वक श्लोकों का पाठ करें, प्रत्येक नौ नाम पर ध्यान केन्द्रित करते हुए। इसे एक स्वतन्त्र प्रार्थना के रूप में अथवा सप्तश्लोकी दुर्गा और अर्गला स्तोत्र से पूर्व या पश्चात् एक दीर्घ दुर्गा पूजा के अंग रूप में जपा जा सकता है। नौ नामों को नौ या अधिक बार दोहराना विशेष रूप से शुभ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा (क्षेमा), शिवा और धात्री। ये 'दुर्गा नवनाम' हैं — नौ नाम जिनसे देवी का आवाहन किया जाता है, इसके पश्चात् स्वाहा और स्वधा आहुतियाँ आती हैं।
नौ-नामों का श्लोक देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) परम्परा से है और नित्य देवी पूजा में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है। यह सामान्यतः दुर्गा गायत्री ('ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षणि स्वाहा') तथा प्रसिद्ध 'या देवी' एवं 'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये' श्लोकों के साथ संयुक्त किया जाता है।
नौ नामों का जप पारम्परिक रूप से माता की सम्पूर्ण रक्षा एवं कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है, जो भय और बाधाओं को दूर कर शुभता प्रदान करता है, क्योंकि प्रत्येक नाम उनकी शक्ति के एक विशिष्ट रूप का आवाहन करता है।
इसे नित्य पढ़ा जा सकता है, किन्तु मंगलवार और शुक्रवार को तथा सम्पूर्ण नवरात्रि में यह विशेष रूप से शुभ है। यह इतना छोटा है कि प्रति प्रातः एक रक्षक प्रार्थना के रूप में जपा जा सकता है।

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