दुर्गा गायत्री मंत्र
अन्य नाम / खोज: om katyayanyai cha vidmahe kanya kumaryai cha dhimahi
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✦ अर्थ
दुर्गा गायत्री मंत्र देवी दुर्गा का गायत्री मंत्र है, जो पवित्र गायत्री छंद में रचित है। इसमें कात्यायनी का ध्यान कर देवी से बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करने की प्रार्थना की जाती है। रक्षा, शक्ति, साहस और विजय की प्राप्ति हेतु इसका जप किया जाता है।
उत्पत्ति और कथा
The Gayatri mantra of Goddess Durga · Traditional (Vedic)
सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देवता को उसका अपना गायत्री मंत्र प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना, जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने का आह्वान करती है। दुर्गा गायत्री मंत्र देवी दुर्गा का आह्वान करता है, जो रक्षा, शक्ति, साहस और विजय की दात्री हैं, उसी चिरंतन शैली "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में — "हम जानें, हम ध्यान करें, देवी हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।" संध्याकालों में जपा जाने वाला यह एक संपूर्ण और सरल नित्य साधना है।
मंत्र
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ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै च धीमहि । तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात् ॥
Om Katyayanyai cha Vidmahe Kanya-kumaryai cha Dhimahi. Tanno Durgih Prachodayat.
अर्थ:ॐ। हम Goddess Durga को जानें, उनका ध्यान करें; वे Goddess Durga हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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दुर्गा गायत्री मंत्र पाठ के लाभ
देवी दुर्गा का गायत्री मंत्र — पवित्र गायत्री छंद, जो वैदिक छंदों में सर्वाधिक शक्तिशाली है, के माध्यम से देवी दुर्गा की कृपा का आह्वान करता है।
रक्षा, शक्ति, साहस और विजय हेतु तथा बुद्धि को जाग्रत व प्रकाशित करने (प्रत्येक गायत्री का मूल) के लिए जपा जाता है।
देवी दुर्गा का एक संपूर्ण, नित्य वैदिक मंत्र, जो ध्यान, जप और पूजा के आरंभ हेतु उपयुक्त है।
नवरात्रि, मंगलवार और शुक्रवार को, तीनों संध्याकालों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में पूर्व दिशा की ओर मुख करके सर्वाधिक प्रभावी।
शांत और एकाग्र मन से माला पर 108 बार जपा जाता है; कहा जाता है कि यह स्पष्टता, शांति और देवी दुर्गा का स्थिर आशीर्वाद प्रदान करता है।
प्रायः महान गायत्री मंत्र ("ॐ भूर्भुवः स्वः…") के साथ नित्य साधना के अंग के रूप में जपा जाता है।
दुर्गा गायत्री मंत्र जप विधि
स्नान के बाद प्रातःकाल पूर्व दिशा की ओर मुख करके शांत मन से बैठें और "ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै च धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्" का माला पर 108 बार जप करें। सभी गायत्री मंत्रों की भाँति इसे आदर्श रूप से संध्याकालों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में जपा जाता है। देवी दुर्गा को हृदय में धारण करें और मंत्र को मन को स्थिर करने दें। इसे सार्वभौम गायत्री मंत्र के साथ नित्य संपूर्ण साधना के रूप में जपा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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