Mantra.Tips

दुर्गा गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

दुर्गा गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि नाद (प्रणव)
विद्महे
Vidmahe
हम जानें — कात्यायनी (ऋषि कात्यायन की उग्र पुत्री) को
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करें — नित्य कुमारी (कन्याकुमारी) का
तन्नः … प्रचोदयात्
Tannah … Prachodayat
वे दुर्गा हमारी बुद्धि को प्रेरित एवं प्रकाशित करें

Complete Translation

ॐ। हम Goddess Durga को जानें, उनका ध्यान करें; वे Goddess Durga हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

Origin & History

Source: The Gayatri mantra of Goddess Durga

Author: Traditional (Vedic)

सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देवता को उसका अपना गायत्री मंत्र प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना, जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने का आह्वान करती है। दुर्गा गायत्री मंत्र देवी दुर्गा का आह्वान करता है, जो रक्षा, शक्ति, साहस और विजय की दात्री हैं, उसी चिरंतन शैली "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में — "हम जानें, हम ध्यान करें, देवी हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।" संध्याकालों में जपा जाने वाला यह एक संपूर्ण और सरल नित्य साधना है।

Frequently Asked Questions

दुर्गा गायत्री मंत्र क्या है?
यह देवी दुर्गा का गायत्री मंत्र है: "ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै च धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छंद में रचित यह "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की शैली में देवी दुर्गा से बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने की प्रार्थना करता है।
दुर्गा गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?
यह रक्षा, शक्ति, साहस और विजय हेतु तथा मन की स्पष्टता व बुद्धि को जाग्रत करने के लिए जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के कारण इसे विशेष रूप से पवित्र करने वाला और स्थिरता देने वाला माना जाता है, जो नित्य जीवन में देवी दुर्गा का आशीर्वाद लाता है।
इसका जप कब और कितनी बार करना चाहिए?
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्श रूप से प्रातःकाल और अन्य संध्याकालों में, पूर्व दिशा की ओर मुख करके। नवरात्रि इसका विशेष दिन है। इसे नित्य गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
"विद्महे धीमहि प्रचोदयात्" का अर्थ क्या है?
प्रत्येक गायत्री इस शैली का अनुसरण करती है: "विद्महे" — हम जानें; "धीमहि" — हम ध्यान करें; "प्रचोदयात्" — वह देवी हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें। अतः यह मंत्र देवी से हमारे भीतर ज्ञान जाग्रत करने की प्रार्थना है।
क्या दुर्गा गायत्री मंत्र का जप कोई भी कर सकता है?
हाँ — देवी-गायत्री मंत्रों का जप कोई भी भक्ति सहित कर सकता है। इन्हें स्नान के बाद प्रातःकाल, शुद्ध मन से, आदर्श रूप से नवरात्रि में जपा जाता है, और ये एक सरल, संपूर्ण नित्य साधना हैं।

Ready to start chanting?

See Benefits & How to Chant →