जयाय जयभद्राय — Word-by-Word Meaning
जयाय जयभद्राय
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
जयाय
jayaya
विजयस्वरूप को; विजय को ही नमस्कार
जय
jaya
विजय, जय, पराजय पर अधिकार
भद्राय
bhadraya
कल्याणस्वरूप को; मङ्गल एवं सौभाग्य के दाता को
जयभद्राय
jayabhadraya
जिनकी विजय कल्याणकारी है उन्हें; विजय एवं कल्याण के दाता को
हरि
hari
हरित, स्वर्ण-हरित (सूर्य के अश्वों का रंग)
अश्व
ashva
अश्व, घोड़ा
हर्यश्वाय
haryashvaya
हरित (हरे-स्वर्ण) अश्वों वाले को, जो सूर्य के सप्त-अश्व रथ को चलाते हैं
नमो नमः
namo namah
बार-बार नमस्कार; पुनः-पुनः श्रद्धापूर्ण प्रणाम
सहस्र
sahasra
सहस्र; अगणित, असंख्य
अंशु
amshu
अंशु — किरण, प्रकाश-रश्मि
सहस्रांशो
sahasramsho
हे सहस्र किरणों वाले (सहस्र-अंशु); सहस्र रश्मियों के सूर्य
आदित्याय
adityaya
आदित्य को, अदिति-पुत्र, सूर्यदेव को
Complete Translation
जयस्वरूप को, जिनकी जय कल्याणकारी है उन्हें, हरित अश्वों वाले को बार-बार नमस्कार है। हे सहस्र किरणों वाले, आपको बार-बार नमस्कार; आदित्य को बार-बार नमस्कार है।
Origin & History
Source: Aditya Hridayam, verse 17 (Valmiki Ramayana, Yuddha Kanda, Sarga 105)
Author: Sage Agastya (as recorded by Maharishi Valmiki)
Period: Ancient (Ramayana; text compiled c. 500 BCE–100 CE)
आदित्यहृदयम् के भीतर, सूर्य के अनेक ब्रह्माण्डीय रूपों का नामकरण करने के पश्चात्, ऋषि अगस्त्य प्रबल नमस्कारों की एक श्रृंखला में लीन हो जाते हैं। यह श्लोक उनमें सर्वाधिक गूँजने वाला है, जो सूर्य को विजय के साक्षात् स्वरूप रूप में पुनः-पुनः प्रणाम करता है — एक उपयुक्त आवाहन, क्योंकि इसे श्रीराम को उनकी रावण पर विजय की पूर्वसन्ध्या पर सिखाया गया था।
Frequently Asked Questions
'जयाय जयभद्राय' में क्या विशेष है?▼
यह आदित्यहृदयम् का सत्रहवाँ श्लोक है, एक नमस्कार-श्लोक जो सूर्य को विजयस्वरूप (जय), विजय में कल्याणकारी (जयभद्र), हरित अश्वों के स्वामी (हर्यश्व) तथा सहस्र किरण वाले (सहस्रांशु) के रूप में स्तुत करता है। इसका पुनरावृत्त 'नमो नमः' इसे विशेष रूप से मधुर एवं सरलता से जपने योग्य बनाता है।
सूर्य को 'हर्यश्व' क्यों कहा जाता है?▼
हर्यश्व का अर्थ है 'हरित/स्वर्ण-हरित अश्वों वाला'। सूर्य को सात अश्वों (अथवा एक सप्त-मुखी अश्व) द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर विराजमान बताया जाता है, और हर्यश्व इस स्तोत्र में उनके शास्त्रीय नामों में से एक है।
क्या यह श्लोक स्वतन्त्र रूप से जपा जा सकता है?▼
हाँ। एक स्वयंपूर्ण नमस्कार के रूप में इसे प्रायः अकेले भी जपा जाता है, विशेष रूप से सूर्य नमस्कार के समय अथवा सूर्य को अर्घ्य देते समय, साथ ही सम्पूर्ण आदित्यहृदयम् पाठ के भीतर भी।
'सहस्रांशु' का क्या अर्थ है?▼
सहस्रांशु (सहस्र + अंशु) का अर्थ है 'सहस्र किरणों वाला', सूर्य का एक प्रसिद्ध नाम जो उनके अनन्त प्रकाश की ओर संकेत करता है, जो समस्त लोकों का पोषण एवं धारण करता है।
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