श्री काली माता की आरती Meaning — Line by Line
श्री काली माता की आरती
Every verse and every word explained in English & Hindi
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Mangala ki seva suna meri deva
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा । हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेंट धरे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Mangala ki seva suna meri deva Haatha joda tere dvaara khade Paana supaari dhvaja naariyala Le jvaala teri bhenta dhare Mangala ki seva suna meri deva
Meaningहे मेरी देवी, मेरी मंगलमयी सेवा सुनो; हाथ जोड़कर मैं तेरे द्वार पर खड़ा हूँ। पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल लेकर, हे ज्वाला माता, मैं तेरे चरणों में भेंट चढ़ाता हूँ।
Suna Jagadambe na kara vilambe
सुन जगदम्बे न कर विलम्बे सन्तन के भण्डार भरे ॥ सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली जय काली कल्याण करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Suna Jagadambe na kara vilambe Santana ke bhandaara bhare Santana pratipaali sada khushahaali Jaya Kaali kalyaana kare Mangala ki seva suna meri deva
Meaningहे जगदम्बे, सुनो और विलम्ब न करो; तुम भक्तों के भण्डार भर देती हो। तुम सन्तों का पालन करती हो और सदा खुशहाली देती हो — जय काली, जो सबका कल्याण करती हैं।
Buddhi vidhaata tu jaga maata
बुद्धि विधाता तू जग माता मेरे बिगड़े काम सँवार ॥ पुरुष-प्रकृति तू ही तारणहारी मेरी नैय्या पार करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Buddhi vidhaata tu jaga maata Mere bigade kaama sanvaara Purusha-prakriti tu hi taaranahaari Meri naiyya paara kare Mangala ki seva suna meri deva
Meaningतुम बुद्धि की विधाता और जगत की माता हो; मेरे बिगड़े काम सँवार दो। तुम ही पुरुष और प्रकृति, तारणहारी हो — मेरी नैय्या पार लगा दो।
Kundala kaanon mein chamaka rahe hain
कुण्डल कानों में चमक रहे हैं रसना पर है वास तेरा ॥ खड्ग खप्पर त्रिशूल विराजत शत्रु-दल का नाश करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Kundala kaanon mein chamaka rahe hain Rasana para hai vaasa tera Khadga khappara trishoola viraajata Shatru-dala ka naasha kare Mangala ki seva suna meri deva
Meaningतेरे कानों में कुण्डल चमक रहे हैं और तेरा वास वाणी (रसना) पर है; खड्ग, खप्पर और त्रिशूल तुझ पर सुशोभित हैं, जिनसे तू शत्रुओं के दल का नाश करती है।
Shri prataapa jo tera gaave
श्री प्रताप जो तेरा गावे भीड़ पड़ी में आन खड़े ॥ सेवक जान सदा सुख दीजै जय जय काली मातु अरे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Shri prataapa jo tera gaave Bheeda padi mein aana khade Sevaka jaana sada sukha deejai Jaya jaya Kaali maatu are Mangala ki seva suna meri deva
Meaningहे माता, जो तेरी महिमा गाता है, संकट में तुम उसके पास आन खड़ी होती हो। मुझे अपना सेवक जानकर सदा सुख देना — जय जय काली माता!
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Traditional North Indian devotional aarti (Aarti Sangrah)
Author: Traditional / Anonymous
Period: Medieval to modern
देवी काली, चण्ड, मुण्ड और रक्तबीज के साथ युद्ध के समय देवी दुर्गा के भ्रूकुटि (माथे) से प्रकट हुईं, जैसा देवी माहात्म्य में वर्णित है। शक्ति के उग्र, सर्वग्रासी रूप के रूप में उन्होंने दैत्य सेनाओं का नाश किया और लोकों की रक्षा की। यह लोकप्रिय हिन्दी आरती बंगाल और उत्तर भारत में काली उपासना की जीवन्त मंदिर परम्परा से उपजी, जहाँ भक्त उन्हें पान, नारियल और लाल पुष्प अर्पित करते हुए उनकी रक्षक, वरदायिनी शक्ति का गान करते हैं।
Frequently Asked Questions
देवी काली कौन हैं?▼
'मंगल की सेवा सुन मेरी देवा' का अर्थ क्या है?▼
यह काली आरती कब गाना सर्वोत्तम है?▼
माँ काली को कौन-सी भेंट प्रसन्न करती है?▼
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