श्री काली माता की आरती
अन्य नाम / खोज: mangal ki seva sun meri deva · kali mata ki aarti · maa kali aarti · mahakali aarti · kali maa ki aarti
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✦ अर्थ
'मंगल की सेवा सुन मेरी देवा' से आरम्भ होने वाली यह प्रिय काली माता की आरती उत्तर भारत के काली मंदिरों में गाई जाती है। इसमें माता को पान, नारियल और ध्वजा की विनम्र भेंट अर्पित की जाती है और उन्हें खड्ग, खप्पर एवं त्रिशूल धारिणी, शत्रुनाशिनी तथा भक्तरक्षिका रूप में स्तुत किया जाता है। भक्त इसे माँ काली की शीघ्र रक्षा, समृद्धि और बिगड़े कार्यों के सुधार हेतु गाते हैं।
उत्पत्ति और कथा
Traditional North Indian devotional aarti (Aarti Sangrah) · Traditional / Anonymous · Medieval to modern
देवी काली, चण्ड, मुण्ड और रक्तबीज के साथ युद्ध के समय देवी दुर्गा के भ्रूकुटि (माथे) से प्रकट हुईं, जैसा देवी माहात्म्य में वर्णित है। शक्ति के उग्र, सर्वग्रासी रूप के रूप में उन्होंने दैत्य सेनाओं का नाश किया और लोकों की रक्षा की। यह लोकप्रिय हिन्दी आरती बंगाल और उत्तर भारत में काली उपासना की जीवन्त मंदिर परम्परा से उपजी, जहाँ भक्त उन्हें पान, नारियल और लाल पुष्प अर्पित करते हुए उनकी रक्षक, वरदायिनी शक्ति का गान करते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि सच्चे संकट में जो भक्त माँ काली को पुकारता है, उसके पास वे तुरन्त आन खड़ी होती हैं — 'भीड़ पड़ी में आन खड़े' — और उसके शत्रुओं और संकटों का उतनी ही शीघ्रता से नाश करती हैं जितनी शीघ्रता से उन्होंने कभी रक्तबीज की दैत्य सेनाओं का संहार किया था।
सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा । हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेंट धरे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Mangala ki seva suna meri deva Haatha joda tere dvaara khade Paana supaari dhvaja naariyala Le jvaala teri bhenta dhare Mangala ki seva suna meri deva
अर्थ:हे मेरी देवी, मेरी मंगलमयी सेवा सुनो; हाथ जोड़कर मैं तेरे द्वार पर खड़ा हूँ। पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल लेकर, हे ज्वाला माता, मैं तेरे चरणों में भेंट चढ़ाता हूँ।
सुन जगदम्बे न कर विलम्बे सन्तन के भण्डार भरे ॥ सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली जय काली कल्याण करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Suna Jagadambe na kara vilambe Santana ke bhandaara bhare Santana pratipaali sada khushahaali Jaya Kaali kalyaana kare Mangala ki seva suna meri deva
अर्थ:हे जगदम्बे, सुनो और विलम्ब न करो; तुम भक्तों के भण्डार भर देती हो। तुम सन्तों का पालन करती हो और सदा खुशहाली देती हो — जय काली, जो सबका कल्याण करती हैं।
बुद्धि विधाता तू जग माता मेरे बिगड़े काम सँवार ॥ पुरुष-प्रकृति तू ही तारणहारी मेरी नैय्या पार करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Buddhi vidhaata tu jaga maata Mere bigade kaama sanvaara Purusha-prakriti tu hi taaranahaari Meri naiyya paara kare Mangala ki seva suna meri deva
अर्थ:तुम बुद्धि की विधाता और जगत की माता हो; मेरे बिगड़े काम सँवार दो। तुम ही पुरुष और प्रकृति, तारणहारी हो — मेरी नैय्या पार लगा दो।
कुण्डल कानों में चमक रहे हैं रसना पर है वास तेरा ॥ खड्ग खप्पर त्रिशूल विराजत शत्रु-दल का नाश करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Kundala kaanon mein chamaka rahe hain Rasana para hai vaasa tera Khadga khappara trishoola viraajata Shatru-dala ka naasha kare Mangala ki seva suna meri deva
अर्थ:तेरे कानों में कुण्डल चमक रहे हैं और तेरा वास वाणी (रसना) पर है; खड्ग, खप्पर और त्रिशूल तुझ पर सुशोभित हैं, जिनसे तू शत्रुओं के दल का नाश करती है।
श्री प्रताप जो तेरा गावे भीड़ पड़ी में आन खड़े ॥ सेवक जान सदा सुख दीजै जय जय काली मातु अरे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Shri prataapa jo tera gaave Bheeda padi mein aana khade Sevaka jaana sada sukha deejai Jaya jaya Kaali maatu are Mangala ki seva suna meri deva
अर्थ:हे माता, जो तेरी महिमा गाता है, संकट में तुम उसके पास आन खड़ी होती हो। मुझे अपना सेवक जानकर सदा सुख देना — जय जय काली माता!
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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श्री काली माता की आरती पाठ के लाभ
शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों के विरुद्ध माँ काली की शीघ्र रक्षा का आवाहन करती है
बिगड़े कार्यों को सँवारने और जीवन से बाधाएँ दूर करने वाली मानी जाती है
साहस, निर्भयता और कठिनाइयों पर विजय प्रदान करती है
भक्त के जीवन को समृद्धि (भण्डार भरे) और कल्याण से भर देती है
भक्ति और दिव्य माता के प्रति समर्पण को गहन बनाती है
मंगलवार, नवरात्रि और काली चौदस / दीवाली की रात्रि को परम्परागत रूप से गाई जाती है
संकट के समय माता की कृपा लाती है, जब वे भक्त के पास 'आन खड़ी' होती हैं
श्री काली माता की आरती जप विधि
माँ काली की मूर्ति या चित्र के समक्ष यह आरती घी या कर्पूर के प्रज्वलित दीप, पान, नारियल और लाल ध्वजा के साथ अर्पित करें। दीप को दक्षिणावर्त घुमाते और घण्टी बजाते हुए भक्ति से गाएँ। लाल पुष्प और अड़हुल अर्पित करें, जो काली को विशेष प्रिय हैं। आरती की ज्योति का आशीर्वाद लेकर, प्रणाम कर, रक्षा और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हुए समापन करें।