श्री काली माता की आरती PDF
श्री काली माता की आरती की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा । हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेंट धरे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Mangala ki seva suna meri deva Haatha joda tere dvaara khade Paana supaari dhvaja naariyala Le jvaala teri bhenta dhare Mangala ki seva suna meri deva
हे मेरी देवी, मेरी मंगलमयी सेवा सुनो; हाथ जोड़कर मैं तेरे द्वार पर खड़ा हूँ। पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल लेकर, हे ज्वाला माता, मैं तेरे चरणों में भेंट चढ़ाता हूँ।
सुन जगदम्बे न कर विलम्बे सन्तन के भण्डार भरे ॥ सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली जय काली कल्याण करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Suna Jagadambe na kara vilambe Santana ke bhandaara bhare Santana pratipaali sada khushahaali Jaya Kaali kalyaana kare Mangala ki seva suna meri deva
हे जगदम्बे, सुनो और विलम्ब न करो; तुम भक्तों के भण्डार भर देती हो। तुम सन्तों का पालन करती हो और सदा खुशहाली देती हो — जय काली, जो सबका कल्याण करती हैं।
बुद्धि विधाता तू जग माता मेरे बिगड़े काम सँवार ॥ पुरुष-प्रकृति तू ही तारणहारी मेरी नैय्या पार करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Buddhi vidhaata tu jaga maata Mere bigade kaama sanvaara Purusha-prakriti tu hi taaranahaari Meri naiyya paara kare Mangala ki seva suna meri deva
तुम बुद्धि की विधाता और जगत की माता हो; मेरे बिगड़े काम सँवार दो। तुम ही पुरुष और प्रकृति, तारणहारी हो — मेरी नैय्या पार लगा दो।
कुण्डल कानों में चमक रहे हैं रसना पर है वास तेरा ॥ खड्ग खप्पर त्रिशूल विराजत शत्रु-दल का नाश करे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Kundala kaanon mein chamaka rahe hain Rasana para hai vaasa tera Khadga khappara trishoola viraajata Shatru-dala ka naasha kare Mangala ki seva suna meri deva
तेरे कानों में कुण्डल चमक रहे हैं और तेरा वास वाणी (रसना) पर है; खड्ग, खप्पर और त्रिशूल तुझ पर सुशोभित हैं, जिनसे तू शत्रुओं के दल का नाश करती है।
श्री प्रताप जो तेरा गावे भीड़ पड़ी में आन खड़े ॥ सेवक जान सदा सुख दीजै जय जय काली मातु अरे ॥ मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ॥
Shri prataapa jo tera gaave Bheeda padi mein aana khade Sevaka jaana sada sukha deejai Jaya jaya Kaali maatu are Mangala ki seva suna meri deva
हे माता, जो तेरी महिमा गाता है, संकट में तुम उसके पास आन खड़ी होती हो। मुझे अपना सेवक जानकर सदा सुख देना — जय जय काली माता!