श्री काली चालीसा
अन्य नाम / खोज: jayakali kalimalaharana mahima agama apara · kali chalisa lyrics
अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें
✦ अर्थ
श्री काली चालीसा माँ काली — देवी की उग्र, रक्षक शक्ति — की चालीस पदों वाली स्तुति है। यह उनके अष्टभुजी स्वरूप, उनके सहचरों और उनके पराक्रमों (महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ का वध तथा शिव पर पाँव रखने का प्रसंग) का वर्णन करती है। भय, शत्रु, नकारात्मकता और अहंकार के नाश के लिए इसका पाठ किया जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional chalisa · Traditional · Devotional era
काली मातृदेवी का उग्र, श्याम स्वरूप हैं, जो उन दानवों के वध हेतु दुर्गा के क्रोध से प्रकट हुईं जिन्हें देवता भी न मार सके। चालीसा उनके मुण्डमाला धारी अष्टभुजी स्वरूप, महिषासुर तथा शुम्भ-निशुम्भ के वध, और उस क्षण को स्मरण कराती है जब युद्ध-उन्माद में अजेय होकर उन्होंने शिव पर पाँव रख दिया और जीभ काट ली — यही वह स्वरूप है जिससे वे आज तक जानी जाती हैं, एक साथ समस्त बुराई की नाशिनी और भक्तों को अभय देने वाली।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि दानवों के वध में काली का युद्ध-उन्माद तब तक शान्त न हुआ जब तक स्वयं शिव उनके मार्ग में न लेट गए; अपने ही स्वामी का स्पर्श उनके पाँव तले उनके क्रोध को थाम गया, और जिस माता को समस्त देवता न रोक सके उन्हें प्रेम ने एक क्षण में थाम लिया — यह संकेत कि जो उनका नाम लेते हैं उनकी भक्ति के समक्ष वे पूर्णतः समर्पित हो जाती हैं।
सुनें और साथ में जपें
सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें
जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका , देहु अभय अपार ॥
Jayakali kalimalaharana, mahima agama apara Mahisha mardini kalika , dehu abhaya apara
अर्थ:जय काली, कलियुग के पापों का नाश करने वाली, जिनकी महिमा अथाह और असीम है! हे कालिका, महिषासुर का वध करने वाली, मुझे असीम अभय प्रदान करें।
अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥
Ari mada mana mitavana hari Mundamala gala sohata pyari
अर्थ:आप शत्रु के दर्प और अहंकार का नाश करती हैं; मुण्डों की माला आपके गले की शोभा है, हे प्रिय माँ।
अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता ॥
Ashtabhuji sukhadayaka mata Dushtadalana jaga mem vikhyata
अर्थ:अष्टभुजी माँ, आनंद देने वाली, दुष्टों के संहार के रूप में समस्त संसार में विख्यात।
भाल विशाल मुकुट छवि छाजै । कर में शीश शत्रु का साजै ॥
Bhala vishala mukuta chhavi chhajai Kara mem shisha shatru ka sajai
अर्थ:आपके विशाल भाल पर मुकुट सुशोभित है; एक हाथ में आप शत्रु का कटा शीश धारण करती हैं।
दूजे हाथ लिए मधु प्याला । हाथ तीसरे सोहत भाला ॥
Duje hatha lie madhu pyala Hatha tisare sohata bhala
अर्थ:दूसरे हाथ में आप मधु का पात्र धारण करती हैं; तीसरे हाथ में भाला चमकता है।
चौथे खप्पर खड्ग कर पाञ्चे । छठे त्रिशूल शत्रु बल जाञ्चे ॥
Chauthe khappara khadga kara panche Chhathe trishula shatru bala janche
अर्थ:चौथे में कपाल-पात्र, पाँचवें में खड्ग; छठे में त्रिशूल से आप शत्रु के बल की परीक्षा लेती हैं।
सप्तम कर दमकत असि प्यारी । शोभा अद्भुत मात तुम्हारी ॥
Saptama kara damakata asi pyari Shobha adbhuta mata tumhari
अर्थ:आपके सातवें हाथ में प्रिय तलवार चमकती है; अद्भुत है आपका तेज, हे माँ।
अष्टम कर भक्तन वर दाता । जग मनहरण रूप ये माता ॥
Ashtama kara bhaktana vara data Jaga manaharana rupa ye mata
अर्थ:आपका आठवाँ हाथ भक्तों को वरदान देता है; आपका यह रूप, हे माँ, समस्त संसार को मोहित करता है।
भक्तन में अनुरक्त भवानी । निशदिन रटें ऋषि-मुनि ज्ञानी ॥
Bhaktana mem anurakta bhavani Nishadina ratem rishi-muni jnani
अर्थ:हे भवानी, भक्तों के प्रति समर्पित, जिनका मुनि, ऋषि और ज्ञानी दिन-रात जप करते हैं।
महशक्ति अति प्रबल पुनीता । तू ही काली तू ही सीता ॥
Mahashakti ati prabala punita Tu hi kali tu hi sita
अर्थ:महाशक्ति, परम बलशालिनी और पवित्र, आप ही काली हैं और आप ही सीता हैं।
पतित तारिणी हे जग पालक । कल्याणी पापीकुल घालक ॥
Patita tarini he jaga palaka Kalyani papikula ghalaka
अर्थ:पतितों की उद्धारक, हे जगत की पालनहार; कल्याणकारी कल्याणी, समस्त पापी-कुल की संहारक।
शेष सुरेश न पावत पारा । गौरी रूप धर्यो इक बारा ॥
Shesha suresha na pavata para Gauri rupa dharyo ika bara
अर्थ:न शेष, न देवराज इंद्र आपका पार पा सकते हैं; एक बार आपने गौरी का सुंदर रूप धारण किया।
तुम समान दाता नहिं दूजा । विधिवत करें भक्तजन पूजा ॥
Tuma samana data nahim duja Vidhivata karem bhaktajana puja
अर्थ:आपके समान कोई अन्य दाता नहीं; आपके भक्त शास्त्र-विधि अनुसार आपकी पूजा करते हैं।
रूप भयङ्कर जब तुम धारा । दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा ॥
Rupa bhayankara jaba tuma dhara Dushtadalana kinhehu samhara
अर्थ:जब आपने अपना भयंकर रूप धारण किया, तब आपने दुष्टों को कुचलकर उनका पूर्ण संहार किया।
नाम अनेकन मात तुम्हारे । भक्तजनों के सङ्कट टारे ॥
Nama anekana mata tumhare Bhaktajanom ke sankata tare
अर्थ:अनेक हैं आपके नाम, हे माँ; आप भक्तों की हर विपत्ति को टालती हैं।
कलि के कष्ट कलेशन हरनी । भव भय मोचन मङ्गल करनी ॥
Kali ke kashta kaleshana harani Bhava bhaya mochana mangala karani
अर्थ:कलियुग के कष्टों और क्लेशों को हरने वाली; भवभय से मुक्त करने वाली, समस्त मंगल करने वाली।
महिमा अगम वेद यश गावैं । नारद शारद पार न पावैं ॥
Mahima agama veda yasha gavaim Narada sharada para na pavaim
अर्थ:आपकी महिमा अथाह है; वेद आपका यश गाते हैं; नारद और शारदा (सरस्वती) भी आपका पार नहीं पा सकते।
भू पर भार बढ्यौ जब भारी । तब तब तुम प्रकटीं महतारी ॥
Bhu para bhara badhyau jaba bhari Taba taba tuma prakatim mahatari
अर्थ:जब-जब पृथ्वी पर भार बढ़ा, तब-तब आप प्रकट हुईं, हे माँ।
आदि अनादि अभय वरदाता । विश्वविदित भव सङ्कट त्राता ॥
Adi anadi abhaya varadata Vishvavidita bhava sankata trata
अर्थ:आदि और अनादि, अभय का वर देने वाली; समस्त ब्रह्मांड में भवसागर के संकटों से उद्धारक रूप में विख्यात।
कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा । उसको सदा अभय वर दीन्हा ॥
Kusamaya nama tumharau linha Usako sada abhaya vara dinha
अर्थ:जिसने भी संकट के समय आपका नाम लिया, उसे आपने सदा अभय का वर दिया।
ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा । काल रूप लखि तुमरो भेषा ॥
Dhyana dharem shruti shesha suresha Kala rupa lakhi tumaro bhesha
अर्थ:वेद, शेष और इंद्र आपका ध्यान करते हैं, काल के ही रूप में आपके स्वरूप का दर्शन करते हुए।
कलुआ भैंरों सङ्ग तुम्हारे । अरि हित रूप भयानक धारे ॥
Kalua bhaimrom sanga tumhare Ari hita rupa bhayanaka dhare
अर्थ:कालू और भैरव आपके साथी हैं; शत्रु के संहार हेतु आप भयंकर रूप धारण करती हैं।
सेवक लाङ्गुर रहत अगारी । चौसठ जोगन आज्ञाकारी ॥
Sevaka langura rahata agari Chausatha jogana ajnakari
अर्थ:आपका सेवक लंगूर (हनुमान) सदा आपके सामने खड़ा रहता है; चौंसठ योगिनियाँ आपकी आज्ञाकारी हैं।
त्रेता में रघुवर हित आई । दशकन्धर की सैन नसाई ॥
Treta mem raghuvara hita ai Dashakandhara ki saina nasai
अर्थ:त्रेता युग में आप रघुवर (राम) के लिए आईं, और दशमुख रावण की सेना का संहार किया।
खेला रण का खेल निराला । भरा मांस-मज्जा से प्याला ॥
Khela rana ka khela nirala Bhara mamsa-majja se pyala
अर्थ:आपने युद्ध का अद्भुत खेल खेला, और अपने पात्र को मांस और मज्जा से भर लिया।
रौद्र रूप लखि दानव भागे । कियौ गवन भवन निज त्यागे ॥
Raudra rupa lakhi danava bhage Kiyau gavana bhavana nija tyage
अर्थ:आपका प्रचंड रूप देखकर असुर अपने ही निवास छोड़ भाग खड़े हुए।
तब ऐसौ तामस चढ़ आयो । स्वजन विजन को भेद भुलायो ॥
Taba aisau tamasa chadha़ ayo Svajana vijana ko bheda bhulayo
अर्थ:तब आप में ऐसा प्रचंड क्रोध उठा कि आप अपने और पराये का भेद भूल गईं।
ये बालक लखि शङ्कर आए । राह रोक चरनन में धाए ॥
Ye balaka lakhi shankara ae Raha roka charanana mem dhae
अर्थ:यह देखकर शंकर (शिव) आए और आपका मार्ग रोककर आपके चरणों में लेट गए।
तब मुख जीभ निकर जो आई । यही रूप प्रचलित है माई ॥
Taba mukha jibha nikara jo ai Yahi rupa prachalita hai mai
अर्थ:तब आपकी जीभ मुख से बाहर निकल आई (शिव पर पैर पड़ने की लज्जा से); यही वह रूप है, हे माँ, जो संसार भर में प्रसिद्ध है।
बाढ्यो महिषासुर मद भारी । पीड़इत किए सकल नर-नारी ॥
Badhyo mahishasura mada bhari Pida़ita kie sakala nara-nari
अर्थ:महिषासुर, महान अहंकार से फूला हुआ, हर नर-नारी को सताता था।
करूण पुकार सुनी भक्तन की । पीर मिटावन हित जन-जन की ॥
Karuna pukara suni bhaktana ki Pira mitavana hita jana-jana ki
अर्थ:आपने अपने भक्तों की करुण पुकार सुनी, हर एक जीव का दुख मिटाने के लिए।
तब प्रगटी निज सैन समेता । नाम पड़ा मां महिष विजेता ॥
Taba pragati nija saina sameta Nama pada़a mam mahisha vijeta
अर्थ:तब आप अपनी सेना सहित प्रकट हुईं; और आपका नाम, हे माँ, 'महिषासुरमर्दिनी' पड़ा।
शुम्भ निशुम्भ हने छन माहीं । तुम सम जग दूसर कौ नाहीं ॥
Shumbha nishumbha hane chhana mahim Tuma sama jaga dusara kau nahim
अर्थ:आपने शुंभ और निशुंभ को क्षण भर में मारा; संसार में आपके समान कोई अन्य नहीं।
मान मथनहारी खल दल के । सदा सहायक भक्त विकल के ॥
Mana mathanahari khala dala ke Sada sahayaka bhakta vikala ke
अर्थ:दुष्ट-गणों के दर्प को कुचलने वाली; संकट में भक्त की सदा सहायक।
दीन विहीन करैं नित सेवा । पावैं मनवाञ्छित फल मेवा ॥
Dina vihina karaim nita seva Pavaim manavanchhita phala meva
अर्थ:दीन-हीन जो नित्य आपकी सेवा करते हैं, वे अपने मनवांछित फल को पाते हैं।
सङ्कट में जो सुमिरन करहीं । उनके कष्ट मातु तुम हरहीं ॥
Sankata mem jo sumirana karahim Unake kashta matu tuma harahim
अर्थ:जो विपत्ति में आपका स्मरण करते हैं, उनके कष्ट, हे माँ, आप हर लेती हैं।
प्रेम सहित जो कीरतिगावैं । भव बन्धन सों मुक्ती पावैं ॥
Prema sahita jo kiratigavaim Bhava bandhana som mukti pavaim
अर्थ:जो प्रेम से आपकी महिमा गाते हैं, वे भवबंधन से मुक्ति पाते हैं।
काली चालीसा जो पढ़हीं । स्वर्गलोक बिनु बन्धन चढ़हीं ॥
Kali chalisa jo padha़him Svargaloka binu bandhana chadha़him
अर्थ:जो काली चालीसा पढ़ते हैं, वे समस्त बंधनों से मुक्त होकर स्वर्गलोक को जाते हैं।
दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा । केहि कारणमां कियौ विलम्बा ॥
Daya drishti herau jagadamba Kehi karanamam kiyau vilamba
अर्थ:मुझ पर अपनी करुणा-दृष्टि डालें, हे जगदम्बा; किस कारण, हे माँ, आप विलंब करती हैं?
करहु मातु भक्तन रखवाली । जयति जयति काली कङ्काली ॥
Karahu matu bhaktana rakhavali Jayati jayati kali kankali
अर्थ:अपने भक्तों की रक्षा करें, हे माँ; जय, जय काली, कंकाली!
सेवक दीन अनाथ अनारी। भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी ॥
Sevaka dina anatha anari Bhaktibhava yuti sharana tumhari
अर्थ:आपका सेवक दीन, अनाथ और असहाय है; भक्ति से भरे हृदय से वह आपकी शरण लेता है।
प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ । तिनकी पूरन कामना, होय सकल जग ठाठ ॥
Prema sahita jo kare, kali chalisa patha Tinaki purana kamana, hoya sakala jaga thatha
अर्थ:जो भी प्रेम से काली चालीसा का पाठ करता है, उसकी सभी कामनाएँ पूर्ण होती हैं, और संसार की समस्त सम्पदा उसकी हो जाती है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें
श्री काली चालीसा पाठ के लाभ
माँ काली — देवी के उग्र रक्षक स्वरूप — के आह्वान हेतु, भय, शत्रु, नकारात्मकता और अहंकार के नाश के लिए पढ़ी जाती है।
काली के अष्टभुजी स्वरूप, उनके सहचरों और उनके पराक्रमों (महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ का वध तथा शिव पर पाँव रखने का प्रसंग) का वर्णन कर साहस और समर्पण को दृढ़ करती है।
माना जाता है कि यह कलियुग के कष्ट-क्लेश हरती है, संकट में भक्तों की रक्षा करती है, और भक्तिपूर्वक सेवा करने वालों की मनोकामना पूर्ण करती है।
विशेषकर काली पूजा और अमावस्या की रात्रियों में, नवरात्रि (काली रात्रि / महाअष्टमी) में, तथा मंगलवार और शनिवार को पढ़ी जाती है।
माँ की पूर्ण उपासना हेतु दुर्गा चालीसा, दुर्गा कवच और महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के साथ इसका पाठ किया जाता है।
श्री काली चालीसा जप विधि
स्नान के पश्चात माँ काली के चित्र के सम्मुख बैठें, दीप (और धूप) जलाएँ तथा लाल पुष्प (गुड़हल) व प्रसाद अर्पित करें। शान्त, निर्भय और भक्तिपूर्ण मन से चालीसा का पाठ करें, माँ का समस्त बुराई की नाशिनी रूप में ध्यान करें, और 'जय माँ काली' से समापन करें। काली पूजा और अमावस्या की रात्रियों में इसका विशेष प्रभाव से पाठ होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ये भी पढ़ें
ॐ
Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides