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अम्बे तू है जगदम्बे काली

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 नवरात्रि के दौरान, अष्टमी और शुक्रवार को, प्रातः या सायं देवी आरती के समय·📜 Traditional Hindi Durga aarti

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अर्थ

'अम्बे तू है जगदम्बे काली' देवी दुर्गा को समर्पित सर्वाधिक प्रिय आरतियों में से एक है। यह माँ को सिंह पर सवार, दस भुजाओं वाली, दानवों का संहार करने वाली शक्ति और साथ ही अत्यंत वत्सल माता के रूप में स्तुति करती है। इसकी अंतिम पंक्ति में भक्त धन-दौलत नहीं, केवल माँ के मन में एक छोटा-सा कोना मांगता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindi Durga aarti · Traditional · Traditional

यह प्रिय आरती देवी को सिंह पर सवार, दस भुजाओं वाली, दानवों का संहार करने वाली प्रचंड शक्ति और साथ ही असीम स्नेहमयी माता दोनों रूपों में चित्रित करती है। इसकी विशेषता अंत में आता मोड़ है: माँ की शक्ति की स्तुति के बाद भक्त संसार का कुछ नहीं मांगता — न चाँदी, न सोना — केवल माँ के हृदय में 'एक छोटा-सा कोना' मांगता है। यही एक पंक्ति इसे हिंदी में निःस्वार्थ भक्ति की सबसे उद्धृत अभिव्यक्तियों में से एक बना देती है, जो हर नवरात्रि में उत्तर भारत के घरों और मंदिरों में गाई जाती है।

शास्त्रों में वर्णित

भक्त कहते हैं कि जो बालक केवल माँ का प्रेम मांगता है, उसे माँ कभी मना नहीं कर सकतीं। 'पूत कपूत सुने हैं, पर माँ ना सुनी कुमाता' — बालक कुमार्ग पर जा सकता है, पर माँ अपने बच्चे को कभी निराश नहीं करती — इस पंक्ति ने कष्ट में पड़े असंख्य लोगों को सांत्वना दी है, यह विश्वास दिलाते हुए कि दिव्य माता की रक्षा निःशर्त है और कभी नहीं हटती।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali, Jai Durge Khappar Wali Tere Hi Gun Gaven Bharati, O Maiya Hum Sab Utaren Teri Aarti

अर्थ:तू अम्बा है, जगत की माता जगदम्बा, काली; खप्पर धारण करने वाली दुर्गा की जय। भारती तेरे गुण गाते हैं — हे मैया, हम सब तेरी आरती उतारते हैं।

श्लोक 2

तेरे भक्त जनों पर माता, भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥

Tere Bhakt Janon Par Mata, Bhir Padi Hai Bhari Danav Dal Par Toot Pado Maa, Karke Sinh Sawari

अर्थ:हे माता, तेरे भक्तों पर भारी विपत्ति आ पड़ी है; सिंह पर सवार होकर दानवों के दल पर टूट पड़ो। सौ-सौ सिंहों से बलशाली, दस भुजाओं वाली, दुखियों के दुख दूर करने वाली — हे मैया, हम तेरी आरती उतारते हैं।

श्लोक 3

सौ-सौ सिंहों से तू बलशाली, है दस भुजाओं वाली। दुखियों के दुखड़े निवारती, मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

Sau-Sau Sinhon Se Tu Balshali, Hai Das Bhujaon Wali Dukhiyon Ke Dukhde Nivarti, O Maiya Hum Sab Utaren Teri Aarti

अर्थ:इस जगत में माँ-बेटे का नाता सबसे निर्मल है; कुपूत तो सुने हैं पर कुमाता कभी नहीं। सब पर करुणा करने वाली, अमृत बरसाने वाली — हे मैया, हम तेरी आरती उतारते हैं।

श्लोक 4

माँ बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता। पूत कपूत सुने हैं पर माँ, ना सुनी कुमाता॥

Maa Bete Ka Hai Is Jag Mein, Bada Hi Nirmal Nata Poot Kapoot Sune Hain Par Maa, Na Suni Kumata

अर्थ:हम धन-दौलत, चाँदी या सोना नहीं मांगते; हम तो बस तेरे मन में एक छोटा-सा कोना मांगते हैं।

श्लोक 5

सब पर करुणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली। दुखियों के दुखड़े निवारती, मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

Sab Par Karuna Darsane Wali, Amrit Barsane Wali Dukhiyon Ke Dukhde Nivarti, O Maiya Hum Sab Utaren Teri Aarti

श्लोक 6

नहीं मांगते धन और दौलत, ना चाँदी ना सोना। हम तो मांगें माँ तेरे मन में, छोटा सा कोना॥

Nahin Mangte Dhan Aur Daulat, Na Chandi Na Sona Hum To Mangen Maa Tere Man Mein, Chhota Sa Kona

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

अम्बे🔊Ambeहे माँ (अम्बा) — दिव्य जननी
जगदम्बे🔊Jagdambeसमस्त जगत की माता (जगत् + अम्बा)
खप्पर वाली🔊Khappar Waliजो खप्पर (कपाल-पात्र) धारण करती है — देवी का उग्र रूप
सिंह सवारी🔊Sinh Sawariजो सिंह पर सवारी करती है
दस भुजाओं वाली🔊Das Bhujaon Waliदस भुजाओं वाली देवी
दुखियों के दुखड़े निवारती🔊Dukhiyon Ke Dukhde Nivartiदुखियों के दुखड़े दूर करने वाली
ना सुनी कुमाता🔊Na Suni Kumataकुमाता कभी सुनी नहीं गई (संतान बिगड़ सकती है, पर माँ कभी नहीं त्यागती)
छोटा सा कोना🔊Chhota Sa Konaएक छोटा सा कोना (तेरे हृदय में) — भक्त केवल इतना ही माँगता है

अम्बे तू है जगदम्बे काली पाठ के लाभ

सबसे प्रिय दुर्गा आरतियों में से एक — नवरात्रि, दुर्गा पूजा और प्रतिदिन देवी पूजन में गाई जाती है

इसकी अंतिम कामना — 'बस तेरे मन में एक छोटा-सा कोना' — हिंदी भक्ति की सबसे प्रिय पंक्तियों में से है

माँ की रक्षक रूप में स्तुति करती है जो बुराई का नाश करती और भक्तों के दुःख दूर करती हैं

सरल, गाने योग्य हिंदी — पूरी मंडली एक साथ आरती में सम्मिलित हो सकती है

देवी के सम्मुख दीप घुमाकर (आरती) गाई जाती है

अम्बे तू है जगदम्बे काली जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयनवरात्रि के दौरान, अष्टमी और शुक्रवार को, प्रातः या सायं देवी आरती के समय

आरती करते हुए गाएँ — देवी की प्रतिमा के सम्मुख जलते दीप को घड़ी की दिशा में घुमाते हुए — आदर्श रूप से घंटी और तालियों के साथ। यह सामान्यतः दुर्गा पूजा के समापन पर पूरी मंडली द्वारा एक साथ गाई जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'तू अम्बा है, समस्त जगत की माता है, तू काली है।' यह दिव्य माता को उनके अनेक रूपों — अम्बा, जगदम्बा, काली, दुर्गा — में नमन करती है और उनकी स्तुति में आरती के रूप में गाई जाती है।
'हम धन या सोना नहीं मांगते — बस तेरे मन में एक छोटा-सा कोना मांगते हैं।' यह शुद्ध, निःस्वार्थ भक्ति को दर्शाती है: भक्त को कुछ भौतिक नहीं चाहिए, बस माँ के प्रेम में एक स्थान चाहिए।
यह नवरात्रि और दुर्गा पूजा की प्रमुख आरती है और प्रतिदिन देवी आरती में, विशेषकर सायंकाल, देवी के सम्मुख दीप घुमाते हुए गाई जाती है।

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