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सर्व मंगल मांगल्ये

🕉️ hindu·📿 3× जप·🕐 नवरात्रि के दौरान, शुक्रवार और अष्टमी को, देवी पूजा के समापन पर, अथवा किसी शुभ कार्य के आरंभ से पूर्व·📜 Durga Saptashati (Devi Mahatmya), Markandeya Purana — Narayani Stuti, Chapter 11

अन्य नाम / खोज: sarva mangala mangalye shive · sarvamangala mangalye · narayani namostute · sarva mangal mangalye

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अर्थ

सर्व मंगल मांगल्ये देवी की सर्वाधिक प्रिय स्तुति है, जो दुर्गा सप्तशती की नारायणी स्तुति से ली गई है। इसमें देवी को समस्त मंगलों की मंगल, कल्याणमयी, त्रिनेत्रा गौरी और सृष्टि-स्थिति-संहार की शक्तिस्वरूपा नारायणी के रूप में नमस्कार किया गया है। यह प्रत्येक देवी पूजा और दुर्गा पाठ के समापन में पढ़ी जाती है।

उत्पत्ति और कथा

Durga Saptashati (Devi Mahatmya), Markandeya Purana — Narayani Stuti, Chapter 11 · Sage Markandeya (traditional) · Ancient (c. 4th–6th century CE in present form)

जब देवी शुम्भ, निशुम्भ और महिषासुर का संहार कर देती हैं, तब देवता उनकी स्तुति में नारायणी स्तुति गाने एकत्र होते हैं। यह श्लोक उसका मुकुट है — देवी को समस्त मंगल वस्तुओं के भीतर का मंगल और नारायणी, सृष्टि, पालन व संहार के ब्रह्मांडीय चक्र के पीछे की सनातन शक्ति के रूप में नमस्कार करता है। शताब्दियों में यह समस्त देवी पूजा की सार्वभौमिक समापन प्रार्थना बन गई।

शास्त्रों में वर्णित

भक्त मानते हैं कि इस श्लोक के बिना देवी की कोई पूजा पूर्ण नहीं होती — कहा जाता है कि यह पूजा में जो कुछ भी अधूरा या अपूर्ण रहा हो उसे पूर्ण कर देता है। समस्त भारत में यह वधुओं को आशीर्वाद देने, दुकानों व घरों के उद्घाटन, और नवरात्रि पाठ के समापन हेतु जपा जाता है, इस विश्वास के साथ कि यह प्रत्येक कार्य पर देवी की रक्षात्मक कृपा बरसाता है।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

Sarva Mangala Mangalye Shive Sarvartha Sadhike Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostu Te

अर्थ:हे नारायणि! आप समस्त मंगलों की मंगल हैं, कल्याणमयी, सब प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी हैं — आपको नमस्कार।

श्लोक 2

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

Srishti Sthiti Vinashanam Shaktibhute Sanatani Gunashraye Gunamaye Narayani Namostu Te

अर्थ:हे नारायणि! आप सृष्टि, स्थिति और संहार की शक्तिस्वरूपा, सनातनी, गुणों की आश्रया एवं गुणमयी हैं — आपको नमस्कार।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये🔊Sarva Mangala Mangalyeहे समस्त मंगलों की मंगलस्वरूपा
शिवे🔊Shiveहे कल्याणमयी, शिव की अर्धांगिनी
सर्वार्थसाधिके🔊Sarvartha Sadhikeसमस्त प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली
शरण्ये🔊Sharanyeहे शरण चाहने वालों की शरण
त्र्यम्बके🔊Tryambakeत्रिनेत्रा देवी
गौरि🔊Gauriहे तेजोमयी, गौरवर्णा
नारायणि नमोऽस्तु ते🔊Narayani Namostu Teहे नारायणी, तुम्हें नमस्कार
सृष्टिस्थितिविनाशानां🔊Srishti Sthiti Vinashanamसृष्टि, स्थिति और संहार की
शक्तिभूते सनातनि🔊Shaktibhute Sanataniहे शक्तिस्वरूपा, हे सनातनी
गुणाश्रये गुणमये🔊Gunashraye Gunamayeतीन गुणों की आश्रया एवं गुणमयी

सर्व मंगल मांगल्ये पाठ के लाभ

देवी की सर्वाधिक प्रिय श्लोक — प्रत्येक दुर्गा सप्तशती पाठ और देवी पूजा के समापन में पढ़ी जाती है।

देवी का 'नारायणी' रूप में आह्वान करती है, जो सृष्टि, पालन और संहार के पीछे की शक्ति हैं।

मंगल, संरक्षण और प्रत्येक धार्मिक प्रयोजन की सिद्धि के लिए स्तुति की जाती है।

विवाह, नवरात्रि और नए कार्यों के आरंभ में देवी के आशीर्वाद हेतु जपी जाती है।

संक्षिप्त, लयबद्ध और याद रखने में सरल — दो श्लोकों में पूर्ण प्रार्थना।

सर्व मंगल मांगल्ये जप विधि

जप संख्या3बार
उत्तम समयनवरात्रि के दौरान, शुक्रवार और अष्टमी को, देवी पूजा के समापन पर, अथवा किसी शुभ कार्य के आरंभ से पूर्व

देवी की प्रतिमा के सामने मुख करके, अधिमानतः दीप जलाने के पश्चात पाठ करें। दोनों श्लोकों को शांत, भक्तिपूर्ण हृदय से जपें। यह दुर्गा सप्तशती की परंपरागत समापन प्रार्थना (समापन) है और इसे तीन बार दोहराया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के ग्यारहवें अध्याय में स्थित 'नारायणी स्तुति' का अंश है — वह स्तोत्र जिसे देवता देवी द्वारा असुरों का संहार करने के बाद उनकी स्तुति में गाते हैं।
'हे नारायणि, आपको नमस्कार।' नारायणी, नारायण की परम स्त्री शक्ति (शक्ति) हैं — देवी, जो ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार करने वाली ऊर्जा हैं।
यह परंपरागत समापन प्रार्थना है जो देवी के समस्त गुणों को एक नमस्कार में समेट लेती है — मंगल, शरण, और प्रत्येक प्रयोजन की सिद्धि — जिससे यह देवी की किसी भी पूजा का उत्तम समापन बन जाती है।

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