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सर्व मंगल मांगल्ये Meaning — Line by Line

सर्व मंगल मांगल्ये

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of सर्व मंगल मांगल्ये with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Sarva Mangala Mangalye Shive Sarvartha Sadhike

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

Sarva Mangala Mangalye Shive Sarvartha Sadhike Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostu Te

Meaningहे नारायणि! आप समस्त मंगलों की मंगल हैं, कल्याणमयी, सब प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी हैं — आपको नमस्कार।

Verse 2#

Srishti Sthiti Vinashanam Shaktibhute Sanatani

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

Srishti Sthiti Vinashanam Shaktibhute Sanatani Gunashraye Gunamaye Narayani Namostu Te

Meaningहे नारायणि! आप सृष्टि, स्थिति और संहार की शक्तिस्वरूपा, सनातनी, गुणों की आश्रया एवं गुणमयी हैं — आपको नमस्कार।

Word-by-Word Breakdown

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये
Sarva Mangala Mangalye
हे समस्त मंगलों की मंगलस्वरूपा
शिवे
Shive
हे कल्याणमयी, शिव की अर्धांगिनी
सर्वार्थसाधिके
Sarvartha Sadhike
समस्त प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली
शरण्ये
Sharanye
हे शरण चाहने वालों की शरण
त्र्यम्बके
Tryambake
त्रिनेत्रा देवी
गौरि
Gauri
हे तेजोमयी, गौरवर्णा
नारायणि नमोऽस्तु ते
Narayani Namostu Te
हे नारायणी, तुम्हें नमस्कार
सृष्टिस्थितिविनाशानां
Srishti Sthiti Vinashanam
सृष्टि, स्थिति और संहार की
शक्तिभूते सनातनि
Shaktibhute Sanatani
हे शक्तिस्वरूपा, हे सनातनी
गुणाश्रये गुणमये
Gunashraye Gunamaye
तीन गुणों की आश्रया एवं गुणमयी

Origin & History

Source: Durga Saptashati (Devi Mahatmya), Markandeya Purana — Narayani Stuti, Chapter 11

Author: Sage Markandeya (traditional)

Period: Ancient (c. 4th–6th century CE in present form)

जब देवी शुम्भ, निशुम्भ और महिषासुर का संहार कर देती हैं, तब देवता उनकी स्तुति में नारायणी स्तुति गाने एकत्र होते हैं। यह श्लोक उसका मुकुट है — देवी को समस्त मंगल वस्तुओं के भीतर का मंगल और नारायणी, सृष्टि, पालन व संहार के ब्रह्मांडीय चक्र के पीछे की सनातन शक्ति के रूप में नमस्कार करता है। शताब्दियों में यह समस्त देवी पूजा की सार्वभौमिक समापन प्रार्थना बन गई।

Frequently Asked Questions

सर्व मंगल मांगल्ये कहाँ से आया है?
यह मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के ग्यारहवें अध्याय में स्थित 'नारायणी स्तुति' का अंश है — वह स्तोत्र जिसे देवता देवी द्वारा असुरों का संहार करने के बाद उनकी स्तुति में गाते हैं।
'नारायणी नमोऽस्तु ते' का अर्थ क्या है?
'हे नारायणि, आपको नमस्कार।' नारायणी, नारायण की परम स्त्री शक्ति (शक्ति) हैं — देवी, जो ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार करने वाली ऊर्जा हैं।
देवी पूजा के अंत में इसे क्यों जपा जाता है?
यह परंपरागत समापन प्रार्थना है जो देवी के समस्त गुणों को एक नमस्कार में समेट लेती है — मंगल, शरण, और प्रत्येक प्रयोजन की सिद्धि — जिससे यह देवी की किसी भी पूजा का उत्तम समापन बन जाती है।

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