कार्यसिद्धि हनुमान स्तोत्रम् — Complete Lyrics
कार्यसिद्धि हनुमान स्तोत्रम्
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
Manojavam Maruta-Tulya-Vegam
Jitendriyam Buddhimatam Varishtham |
Vatatmajam Vanara-Yutha-Mukhyam
Shri-Rama-Dutam Sharanam Prapadye ||
मैं श्रीराम के दूत श्रीहनुमान की शरण ग्रहण करता हूँ — जो मन के समान वेगवान, वायु के समान गतिवाले, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र एवं वानरों के अधिपति हैं।
Verse 2
बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं
निर्भयत्वमरोगता ।
अजाड्यं वाक्पटुत्वं च
हनूमत्स्मरणाद्भवेत् ॥
Buddhir-Balam Yasho Dhairyam
Nirbhayatvam-Arogata |
Ajadyam Vak-Patutvam Cha
Hanumat-Smaranad-Bhavet ||
बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, आरोग्य, स्फूर्ति (अजाड्य) तथा वाक्पटुता — ये सब हनुमान के स्मरण से प्राप्त होते हैं।
Verse 3
त्वमस्मिन्कार्यनिर्योगे प्रमाणं हरिसत्तम ।
हनूमन् यत्नमास्थाय दुःखक्षयकरो भव ॥
Tvam-Asmin-Karya-Niryoge Pramanam Hari-Sattama |
Hanuman Yatnam-Asthaya Duhkha-Kshaya-Karo Bhava ||
'इस कार्य की सिद्धि में, हे वानरश्रेष्ठ, आप ही प्रमाण (समर्थ) हैं; हे हनुमान, प्रयत्न करके मेरे दुःख का क्षय करने वाले बनें।' (सुन्दरकाण्ड में सीता द्वारा हनुमान से कहे गए ये वचन समस्त कार्यों की सिद्धि के लिए प्रार्थना रूप में पढ़े जाते हैं।)
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