श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम् — Complete Lyrics
श्री मल्लिकार्जुन मंगलाशासनम्
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
उमाकान्ताय कान्ताय कामितार्थप्रदायिने।
श्रीगिरीशाय देवाय मल्लिनाथाय मङ्गलम्॥१॥
Umā-kāntāya kāntāya kāmitārtha-pradāyine।
Śrī-girīśāya devāya Mallināthāya maṅgalam॥1॥
उमा के प्रियतम, कान्तिमान्, समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले मल्लिनाथ — श्रीगिरि (श्रीशैल) के अधिपति देव — का मङ्गल हो!
Verse 2
सर्वमङ्गलरूपाय श्रीनगेन्द्रनिवासिने।
गङ्गाधराय नाथाय श्रीगिरीशाय मङ्गलम्॥२॥
Sarva-maṅgala-rūpāya śrī-nagendra-nivāsine।
Gaṅgā-dharāya nāthāya śrī-girīśāya maṅgalam॥2॥
समस्त मङ्गलों के स्वरूप, श्रीनगेन्द्र (श्रीशैल) पर निवास करने वाले, गंगाधर, सबके नाथ — श्रीगिरीश का मङ्गल हो!
Verse 3
सत्यानन्दस्वरूपाय नित्यानन्दविधायिने।
स्तुत्याय श्रुतिगम्याय श्रीगिरीशाय मङ्गलम्॥३॥
Satyānanda-svarūpāya nityānanda-vidhāyine।
Stutyāya śruti-gamyāya śrī-girīśāya maṅgalam॥3॥
सत्य एवं आनन्द के स्वरूप, नित्य आनन्द प्रदान करने वाले, स्तुति के योग्य, श्रुति (वेद) से ज्ञेय — श्रीगिरीश का मङ्गल हो!
Verse 4
मुक्तिप्रदाय मुख्याय भक्तानुग्रहकारिणे।
सुन्दरेश्वराय सौम्याय श्रीगिरीशाय मङ्गलम्॥४॥
Mukti-pradāya mukhyāya bhaktānugraha-kāriṇe।
Sundareśvarāya saumyāya śrī-girīśāya maṅgalam॥4॥
मुक्ति प्रदान करने वाले प्रमुख, भक्तों पर अनुग्रह करने वाले, सुन्दर एवं सौम्य ईश्वर — श्रीगिरीश का मङ्गल हो!
Verse 5
श्रीशैले शिखरेश्वरं गणपतिं श्रीहाटकेशं
पुनस्सारङ्गेश्वरबिन्दुतीर्थममलं घण्टार्कसिद्धेश्वरम्।
गङ्गां श्रीभ्रमराम्बिकां गिरिसुतामारामवीरेश्वरं
शङ्खंचक्रवराहतीर्थमनिशं श्रीशैलनाथं भजे॥५॥
Śrīśaile śikhareśvaraṁ gaṇapatiṁ śrī-hāṭakeśaṁ
Punas-sāraṅgeśvara-bindu-tīrtham-amalaṁ ghaṇṭārka-siddheśvaram।
Gaṅgāṁ śrī-bhramarāmbikāṁ giri-sutām-ārāma-vīreśvaraṁ
Śaṅkhaṁ-cakra-varāha-tīrtham-aniśaṁ śrīśaila-nāthaṁ bhaje॥5॥
श्रीशैल पर विराजमान शिखरेश्वर, गणपति, श्रीहाटकेश, पुनः सारङ्गेश्वर एवं निर्मल बिन्दुतीर्थ, घण्टार्क एवं सिद्धेश्वर, गंगा, श्रीभ्रमराम्बिका, गिरिजा (पार्वती), आरामवीरेश्वर तथा शङ्ख-चक्र-वराह तीर्थ — उन श्रीशैलनाथ का मैं निरन्तर भजन करता हूँ।
Verse 6
हस्ते कुरङ्गं गिरिमध्यरङ्गं शृङ्गारिताङ्गं गिरिजानुषङ्गम्।
मूर्धेन्दुगङ्गं मदनाङ्गभङ्गं श्रीशैललिङ्गं शिरसा नमामि॥६॥
Haste kuraṅgaṁ giri-madhya-raṅgaṁ śṛṅgāritāṅgaṁ girijānuṣaṅgam।
Mūrdhendu-gaṅgaṁ madanāṅga-bhaṅgaṁ śrīśaila-liṅgaṁ śirasā namāmi॥6॥
जिनके हाथ में मृग है, जो पर्वत के मध्य रंगस्थल के समान शोभित हैं, जिनके अंग शृंगारित हैं, जो गिरिजा के साथ नित्य संयुक्त हैं, जो मस्तक पर चन्द्र एवं गंगा को धारण करते हैं, और जिन्होंने कामदेव के अंग को भंग किया — उस श्रीशैल-लिंग को मैं शिर से नमस्कार करता हूँ।
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