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परोपकाराय सतां विभूतयः — Complete Lyrics

परोपकाराय सतां विभूतयः

Sanskrit text with English transliteration and translation

पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः स्वयं खादन्ति फलानि वृक्षाः। नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः परोपकाराय सतां विभूतयः॥
pibanti nadyaḥ svayam eva nāmbhaḥ svayaṁ na khādanti phalāni vṛkṣāḥ। nādanti sasyaṁ khalu vāri-vāhāḥ paropakārāya satāṁ vibhūtayaḥ॥
नदियाँ स्वयं अपना जल नहीं पीतीं, वृक्ष स्वयं अपने फल नहीं खाते, और बादल जिस अन्न को सींचते हैं उसे स्वयं नहीं खाते — सज्जनों की सम्पत्ति परोपकार के लिए ही होती है। जैसे प्रकृति निःस्वार्थ भाव से देती है, वैसे ही सज्जनों के साधन सबके कल्याण के लिए होते हैं।

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