Mantra.Tips

प्रश्नोत्तररत्नमालिका — Complete Lyrics

प्रश्नोत्तररत्नमालिका

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
कः खलु नालङ्क्रियते दृष्टादृष्टार्थसाधनपटीयान्। अमुया कण्ठस्थितया प्रश्नोत्तररत्नमालिकया॥१॥
kaḥ khalu nālaṅkriyate dṛṣṭādṛṣṭārtha-sādhana-paṭīyān | amuyā kaṇṭha-sthitayā praśnottara-ratna-mālikayā ||1||
इस लोक और परलोक दोनों के साधनों में निपुण ऐसा कौन है जो कण्ठ में धारण की हुई (कण्ठस्थ) इस प्रश्नोत्तर-रत्नमालिका से अलंकृत (सुशोभित) नहीं होता? (१)
Verse 2
भगवन् किमुपादेयं गुरुवचनं हेयमपि किमकार्यम्। को गुरुरधिगततत्त्वः शिष्यहितायोद्यतः सततम्॥२॥
bhagavan kim upādeyaṃ guru-vacanaṃ heyam api kim akāryam | ko gurur adhigata-tattvaḥ śiṣya-hitāyodyataḥ satatam ||2||
हे भगवन्! ग्रहण करने योग्य क्या है? — गुरु का वचन। त्यागने योग्य क्या है? — प्रत्येक अकार्य (न करने योग्य कर्म)। सच्चा गुरु कौन है? — जो तत्त्व को जान चुका है और सदा शिष्यों के हित में तत्पर रहता है। (२)
Verse 3
त्वरितं किं कर्तव्यं विदुषां संसारसन्ततिच्छेदः। किं मोक्षतरोर्बीजं सम्यग्ज्ञानं क्रियासिद्धम्॥३॥
tvaritaṃ kiṃ kartavyaṃ viduṣāṃ saṃsāra-santati-cchedaḥ | kiṃ mokṣa-taror bījaṃ samyag-jñānaṃ kriyā-siddham ||3||
विद्वानों को शीघ्र क्या करना चाहिए? — संसार की परम्परा (जन्म-मरण की शृंखला) को काटना। मोक्षरूपी वृक्ष का बीज क्या है? — क्रिया से सिद्ध सम्यक् ज्ञान। (३)
Verse 4
कः पथ्यतरो धर्मः कः शुचिरिह यस्य मानसं शुद्धम्। कः पण्डितो विवेकी किं विषमवधीरणा गुरुषु॥४॥
kaḥ pathyataro dharmaḥ kaḥ śucir iha yasya mānasaṃ śuddham | kaḥ paṇḍito vivekī kiṃ viṣam avadhīraṇā guruṣu ||4||
सबसे हितकर धर्म कौन-सा है? (जो किसी को पीड़ा न दे)। यहाँ शुद्ध (पवित्र) कौन है? — जिसका मन शुद्ध है। पण्डित कौन है? — विवेकी। विष क्या है? — गुरुजनों का अनादर। (४)
Verse 5
किं संसारे सारं बहुशोऽपि विचिन्त्यमानमिदमेव। किं मनुजेष्विष्टतमं स्वपरहितायोद्यतं जन्म॥५॥
kiṃ saṃsāre sāraṃ bahuśo'pi vicintyamānam idam eva | kiṃ manujeṣv iṣṭatamaṃ sva-para-hitāyodyataṃ janma ||5||
बार-बार विचार करने पर भी संसार में सार क्या है? — यही (यहाँ बताया गया ज्ञान)। मनुष्यों में सबसे इष्ट क्या है? — अपने और दूसरों के हित में लगा हुआ जन्म। (५)
Verse 6
मदिरेव मोहजनकः कः स्नेहः के दस्यवो विषयाः। का भववल्ली तृष्णा को वैरी यस्त्वनुद्योगः॥६॥
madireva moha-janakaḥ kaḥ snehaḥ ke ca dasyavo viṣayāḥ | kā bhava-vallī tṛṣṇā ko vairī yas tv anudyogaḥ ||6||
मदिरा के समान मोह उत्पन्न करने वाला स्नेह (आसक्ति) कौन है? — अत्यधिक प्रेम। दस्यु (चोर) कौन हैं? — विषय। संसाररूपी लता क्या है? — तृष्णा। शत्रु कौन है? — अनुद्योग (आलस्य)। (६)
Verse 7
कस्माद्भयमिह मरणादन्धादिह को विशिष्यते रागी। कः शूरो यो ललनालोचनबाणैर्न व्यथितः॥७॥
kasmād bhayam iha maraṇād andhād iha ko viśiṣyate rāgī | kaḥ śūro yo lalanā-locana-bāṇair na ca vyathitaḥ ||7||
यहाँ किससे भय करना चाहिए? — मरण (बन्धन) से। अन्धे से भी अधिक अन्धा कौन है? — रागी (विषयासक्त) पुरुष। शूर कौन है? — जो स्त्रियों के नेत्र-बाणों से व्यथित नहीं होता। (७)
Verse 8
पातुं कर्णाञ्जलिभिः किममृतमिह युज्यते सदुपदेशः। किं गुरुताया मूलं यदेतदप्रार्थनं नाम॥८॥
pātuṃ karṇāñjalibhiḥ kim amṛtam iha yujyate sad-upadeśaḥ | kiṃ gurutāyā mūlaṃ yad etad aprārthanaṃ nāma ||8||
कानों की अञ्जलि से पीने योग्य अमृत क्या है? — सदुपदेश। गुरुता (महत्ता) का मूल क्या है? — अप्रार्थन अर्थात् किसी से कुछ न माँगना। (८)
Verse 9
किं गहनं स्त्रीचरितं कश्चतुरो यो खण्डितस्तेन। किं दुःखमसन्तोषः किं लाघवमधमतो याच्ञा॥९॥
kiṃ gahanaṃ strī-caritaṃ kaś caturo yo na khaṇḍitas tena | kiṃ duḥkham asantoṣaḥ kiṃ lāghavam adhamato yācñā ||9||
गहन (दुर्बोध) क्या है? — स्त्री-चरित्र। चतुर कौन है? — जो उससे खण्डित (ठगा) न जाए। दुःख क्या है? — असन्तोष। लाघव (अपमान) क्या है? — नीच से याचना। (९)
Verse 10
किं जीवितमनवद्यं किं जाड्यं पाठतोऽप्यनभ्यासः। को जागर्ति विवेकी का निद्रा मूढता जन्तोः॥१०॥
kiṃ jīvitam anavadyaṃ kiṃ jāḍyaṃ pāṭhato'py anabhyāsaḥ | ko jāgarti vivekī kā nidrā mūḍhatā jantoḥ ||10||
निर्दोष जीवन क्या है? (जो दोषरहित हो)। जड़ता क्या है? — पढ़कर भी अभ्यास न करना। जागता हुआ कौन है? — विवेकी। प्राणी की निद्रा क्या है? — उसकी मूढ़ता। (१०)
Verse 11
नलिनीदलगतजलवत्तरलं किं यौवनं धनं चायुः। कथय पुनः के शशिनः किरणसमाः सज्जना एव॥११॥
nalinī-dala-gata-jalavat taralaṃ kiṃ yauvanaṃ dhanaṃ cāyuḥ | kathaya punaḥ ke śaśinaḥ kiraṇa-samāḥ sajjanā eva ||11||
कमल के पत्ते पर पड़े जल के समान चंचल क्या है? — यौवन, धन और आयु। और फिर कहो, चन्द्रमा की किरणों के समान (शीतल) कौन हैं? — सज्जन ही। (११)

Want to understand every word?

Read Word-by-Word Meaning →