श्री राधा रानी की आरती — Complete Lyrics
श्री राधा रानी की आरती
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
आरती श्री वृषभानु-सुता की ।
कीरति-नन्दिनि राधिका जू की ॥
श्री राधिका जू की, श्री वृषभानु-सुता की ॥
Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
Keerati-nandini Raadhika ju ki
Shri Raadhika ju ki, shri Vrishabhanu-suta ki
यह श्री वृषभानु-नन्दिनी राधा की आरती है, माता कीर्ति की दुलारी राधिका जी की वंदना।
Verse 2
शुभ जन्मी वृषभानु-दुलारी ।
नित्य किशोरी श्याम-प्यारी ॥
वृन्दावन की रासेश्वरी जू की ।
आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Shubha janmi Vrishabhanu-dulaari
Nitya Kishori Shyaama-pyaari
Vrindavana ki Raaseshvari ju ki
Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
वृषभानु जी की दुलारी रूप में शुभ जन्म लेने वाली, नित्य किशोरी और श्याम की प्यारी, वृन्दावन की रासेश्वरी राधिका जी की।
Verse 3
गौर-वरण तन सुन्दर सोहे ।
नयन कमल त्रिभुवन-मन मोहे ॥
मुख की शोभा चन्द्र-विभा की ।
आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Gaura-varana tana sundara sohe
Nayana kamala tribhuvana-mana mohe
Mukha ki shobha chandra-vibha ki
Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
उनका गौरवर्ण तन अत्यन्त सुन्दर शोभित है; कमल समान नेत्र तीनों लोकों के मन को मोह लेते हैं, और मुख की शोभा चन्द्रमा की प्रभा-सी है।
Verse 4
नील-वसन तन पीत-दुपट्टा ।
कंचन-थाल बिराजत झट्टा ॥
मणि-मय भूषण देह सजा की ।
आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Neela-vasana tana peeta-dupatta
Kanchana-thaala biraajata jhatta
Mani-maya bhooshana deha saja ki
Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
नील वस्त्र और पीत दुपट्टे से सुसज्जित, सम्मुख कंचन-थाल सुशोभित, मणिमय आभूषणों से देह अलंकृत।
Verse 5
श्याम-प्रिया तुम जग-हितकारी ।
रास-विलासिनि बनवारी-प्यारी ॥
ब्रज-जन-वल्लभ सुख-दात्री जू की ।
आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
Shyaama-priya tuma jaga-hitakaari
Raasa-vilaasini Banavaari-pyaari
Braja-jana-vallabha sukha-daatri ju ki
Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
हे श्याम-प्रिया, तुम जगत का कल्याण करने वाली हो; रास-विलासिनी, बनवारी की प्यारी, ब्रजवासियों की वल्लभा और सुख देने वाली राधिका जी।
Verse 6
जो नर राधा-आरती गावे ।
श्याम-श्यामा का दर्शन पावे ॥
प्रेम-भक्ति वर मिले सदा की ।
आरती श्री वृषभानु-सुता की ॥
श्री राधिका जू की, श्री वृषभानु-सुता की ॥
Jo nara Raadha-aarti gaave
Shyaama-Shyaama ka darshana paave
Prema-bhakti vara mile sada ki
Aarti shri Vrishabhanu-suta ki
Shri Raadhika ju ki, shri Vrishabhanu-suta ki
जो जन राधा जी की यह आरती गाता है, उसे श्याम-श्यामा (कृष्ण-राधा) का युगल दर्शन प्राप्त होता है और सदा के लिए प्रेम-भक्ति का वरदान मिलता है।
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