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ऋणहर्ता गणपति स्तोत्रम् (ऋणविमोचन गणेश स्तोत्रम्) PDF

ऋणहर्ता गणपति स्तोत्रम् (ऋणविमोचन गणेश स्तोत्रम्) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपतिस्तोत्रमन्त्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः, ऋणविमोचनमहागणपतिर्देवता, अनुष्टुप् छन्दः, ऋणविमोचनमहागणपतिप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥

asya śrī-ṛṇa-vimochana-mahā-gaṇapati-stotra-mantrasya śukrāchārya ṛṣiḥ, ṛṇa-vimochana-mahā-gaṇapatir-devatā, anuṣṭup chandaḥ, ṛṇa-vimochana-mahā-gaṇapati-prītyarthe jape viniyogaḥ॥

विनियोग — इस श्रीऋणविमोचन महागणपति स्तोत्रमन्त्र के ऋषि शुक्राचार्य हैं, देवता ऋणविमोचन महागणपति हैं, छन्द अनुष्टुप् है; ऋणविमोचन महागणपति की प्रसन्नता के लिए जप में इसका विनियोग है।

ॐ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं महाबलम्। षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये॥१॥

oṁ smarāmi deva-deveśaṁ vakra-tuṇḍaṁ mahā-balam। ṣaḍ-akṣaraṁ kṛpā-sindhuṁ namāmi ṛṇa-muktaye॥1॥

ॐ। देवों के देव ईश, वक्रतुण्ड, महाबली, षडक्षर मन्त्रस्वरूप, कृपा के सागर का मैं स्मरण करता हूँ — ऋण से मुक्ति के लिए उन्हें नमस्कार करता हूँ।

महागणपतिं वन्दे महासत्त्वं महाबलम्। एकमेवाद्वितीयं तु नमामि ऋणमुक्तये॥२॥

mahā-gaṇapatiṁ vande mahā-sattvaṁ mahā-balam। ekam-evādvitīyaṁ tu namāmi ṛṇa-muktaye॥2॥

महान् सत्त्व और महान् बल वाले, अद्वितीय एकमेव महागणपति की मैं वन्दना करता हूँ — ऋणमुक्ति के लिए उन्हें नमस्कार करता हूँ।

एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्। महाविघ्नहरं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥३॥

ekākṣaraṁ tv-eka-dantam-ekaṁ brahma sanātanam। mahā-vighna-haraṁ devaṁ namāmi ṛṇa-muktaye॥3॥

एकाक्षर, एकदन्त, एकमात्र सनातन ब्रह्म, महाविघ्नों को हरने वाले देव को — ऋणमुक्ति के लिए मैं नमस्कार करता हूँ।

शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णं शुक्लगन्धानुलेपनम्। सर्वशुक्लमयं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥४॥

śuklāmbaraṁ śukla-varṇaṁ śukla-gandhānulepanam। sarva-śukla-mayaṁ devaṁ namāmi ṛṇa-muktaye॥4॥

श्वेत वस्त्रधारी, श्वेत वर्ण, श्वेत गन्ध से अनुलिप्त, सर्वथा श्वेतमय देव को — ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।

रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्। रक्तपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥५॥

raktāmbaraṁ rakta-varṇaṁ rakta-gandhānulepanam। rakta-puṣpaiḥ pūjyamānaṁ namāmi ṛṇa-muktaye॥5॥

रक्त वस्त्रधारी, रक्त वर्ण, रक्त गन्ध से अनुलिप्त, रक्त पुष्पों से पूजित को — ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।

कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्। कृष्णयज्ञोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये॥६॥

kṛṣṇāmbaraṁ kṛṣṇa-varṇaṁ kṛṣṇa-gandhānulepanam। kṛṣṇa-yajñopavītaṁ cha namāmi ṛṇa-muktaye॥6॥

कृष्ण वस्त्रधारी, कृष्ण वर्ण, कृष्ण गन्ध से अनुलिप्त, कृष्ण यज्ञोपवीतधारी को — ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।

पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम्। पीतपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥७॥

pītāmbaraṁ pīta-varṇaṁ pīta-gandhānulepanam। pīta-puṣpaiḥ pūjyamānaṁ namāmi ṛṇa-muktaye॥7॥

पीत वस्त्रधारी, पीत वर्ण, पीत गन्ध से अनुलिप्त, पीत पुष्पों से पूजित को — ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।

सर्वात्मकं सर्ववर्णं सर्वगन्धानुलेपनम्। सर्वपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥८॥

sarvātmakaṁ sarva-varṇaṁ sarva-gandhānulepanam। sarva-puṣpaiḥ pūjyamānaṁ namāmi ṛṇa-muktaye॥8॥

सर्वात्मक, सर्ववर्ण, समस्त गन्धों से अनुलिप्त, समस्त पुष्पों से पूजित को — ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।

एतद् ऋणहरं स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः। षण्मासाभ्यन्तरे तस्य ऋणच्छेदो न संशयः॥९॥

etad ṛṇa-haraṁ stotraṁ tri-sandhyaṁ yaḥ paṭhen-naraḥ। ṣaṇ-māsābhyantare tasya ṛṇa-chchhedo na saṁśayaḥ॥9॥

जो मनुष्य इस ऋणहर स्तोत्र का तीनों सन्ध्याओं में पाठ करता है, उसका छह मास के भीतर ऋण-विच्छेद हो जाता है, इसमें सन्देह नहीं।

सहस्रदशकं कृत्वा ऋणमुक्तो धनी भवेत्। ऋणविमोचनं नाम स्तोत्रमेतत् पठेन्नरः॥१०॥

sahasra-daśakaṁ kṛtvā ṛṇa-mukto dhanī bhavet। ṛṇa-vimochanaṁ nāma stotram-etat paṭhen-naraḥ॥10॥

दस हजार पाठ करने पर वह ऋणमुक्त होकर धनवान हो जाता है। मनुष्य को 'ऋणविमोचन' नामक इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।