सर्वं ममैतन्माहात्म्यम् PDF
सर्वं ममैतन्माहात्म्यम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
सर्वं ममैतन्माहात्म्यं मम सन्निधिकारकम् । पशुपुष्पार्घ्यधूपैश्च गन्धदीपैस्तथोत्तमैः ॥
sarvaṃ mamaitanmāhātmyaṃ mama sannidhikārakam paśupuṣpārghyadhūpaiśca gandhadīpaistathottamaiḥ
यह सम्पूर्ण माहात्म्य मेरी सन्निधि कराने वाला है। और पशु, पुष्प, अर्घ्य, धूप, तथा उत्तम गन्ध और दीपों से, ब्राह्मणों के भोजन, होम और प्रोक्षण-कर्मों से, दिन-रात, और अन्य अनेक भोग व दानों से, वर्ष भर में —
विप्राणां भोजनैर्होमैः प्रोक्षणीयैरहर्निशम् । अन्यैश्च विविधैर्भोगैः प्रदानैर्वत्सरेण या ॥
viprāṇāṃ bhojanairhomaiḥ prokṣaṇīyairaharniśam anyaiśca vividhairbhogaiḥ pradānairvatsareṇa yā
मेरी जो प्रीति वर्ष भर में की जाती है, वह इस माहात्म्य के एक बार उच्चारण या श्रवण से ही प्राप्त हो जाती है। इसका श्रवण पापों को हरता है और आरोग्य प्रदान करता है।
प्रीतिर्मे क्रियते सास्मिन् सकृदुच्चरिते श्रुते । श्रुतं हरति पापानि तथारोग्यं प्रयच्छति ॥
prītirme kriyate sāsmin sakṛduccarite śrute śrutaṃ harati pāpāni tathārogyaṃ prayacchati
मेरे प्राकट्यों का कीर्तन दुष्ट भूतों से रक्षा करता है। और युद्धों में मेरा जो चरित्र है, जो दुष्ट दैत्यों का संहार करने वाला है — उसके सुनने पर मनुष्यों में शत्रुकृत भय उत्पन्न नहीं होता। और जो स्तुतियाँ तुम देवताओं द्वारा की गईं, और जो ब्रह्मर्षियों द्वारा...
रक्षां करोति भूतेभ्यो जन्मनां कीर्तनं मम । युद्धेषु चरितं यन्मे दुष्टदैत्यनिबर्हणम् ॥
rakṣāṃ karoti bhūtebhyo janmanāṃ kīrtanaṃ mama yuddheṣu caritaṃ yanme duṣṭadaityanibarhaṇam
तस्मिञ्छ्रुते वैरिकृतं भयं पुंसां न जायते । युष्माभिः स्तुतयो याश्च याश्च ब्रह्मर्षिभिः कृताः ॥
tasmiñchrute vairikṛtaṃ bhayaṃ puṃsāṃ na jāyate yuṣmābhiḥ stutayo yāśca yāśca brahmarṣibhiḥ kṛtāḥ