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शाकम्भरी स्तोत्रम् PDF

शाकम्भरी स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

शाकम्भरी शिवा धात्री दुर्गा रक्षणकारिणी। नमामि त्वां जगद्धात्रीं शरण्यां भक्तवत्सलाम्॥१॥

Shakambhari Shiva Dhatri Durga Rakshana-Karini। Namami Tvam Jagad-Dhatrim Sharanyam Bhakta-Vatsalam॥1॥

हे शाकम्भरी, शिवे, धात्री, दुर्गे, रक्षा करने वाली — मैं आपको नमन करता हूँ, जो जगत् की धारिणी, सबकी शरण और भक्तों पर वत्सल हैं।

या देवी सर्वभूतानां क्षुधां शान्तिं करोति च। फलमूलाशनैर्नित्यं ताम्बके प्रणमाम्यहम्॥२॥

Ya Devi Sarva-Bhutanam Kshudham Shantim Karoti Cha। Phala-Mula-Ashanair-Nityam Tam-Ambke Pranamamy-Aham॥2॥

जो देवी समस्त प्राणियों की क्षुधा को शान्त करती हैं, फल-मूल आदि अन्न से उन्हें सदा पोषित करती हैं — हे अम्बे, उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

नीलोत्पलदलश्यामां पद्मपत्रनिभेक्षणाम्। शताक्षीं वरदां शान्तां शाकम्भरीं नमाम्यहम्॥३॥

Nilotpala-Dala-Shyamam Padma-Patra-Nibhekshanam। Shatakshim Varadam Shantam Shakambharim Namamy-Aham॥3॥

नील कमल के दल के समान श्यामवर्णा, कमल-पत्र सदृश नेत्रों वाली, शताक्षी, वरदायिनी, शान्तस्वरूपा — उन शाकम्भरी को मैं नमन करता हूँ।

त्रिनेत्रां चन्द्रवदनां शूलहस्तां वरप्रदाम्। शाकम्भरीं जगन्मातां वन्दे दुर्गां भयापहाम्॥४॥

Tri-Netram Chandra-Vadanam Shula-Hastam Vara-Pradam। Shakambharim Jagan-Matam Vande Durgam Bhayapaham॥4॥

त्रिनेत्रा, चन्द्र के समान मुख वाली, हाथ में शूल धारण करने वाली, वरप्रदा — जगन्माता, भय का नाश करने वाली दुर्गा शाकम्भरी की मैं वन्दना करता हूँ।

दुर्गमासुरसंहन्त्रीं भक्तानामभयप्रदाम्। लोकमातां नमस्यामि शाकम्भरीं शुभप्रदाम्॥५॥

Durgamasura-Samhantrim Bhaktanam-Abhaya-Pradam। Loka-Matam Namasyami Shakambharim Shubha-Pradam॥5॥

दुर्गम नामक असुर का संहार करने वाली, भक्तों को अभय प्रदान करने वाली — लोकमाता, शुभदायिनी शाकम्भरी को मैं नमस्कार करता हूँ।