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सियाराममय सब जग जानी — Word-by-Word Meaning

सियाराममय सब जग जानी

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

सियाराममय
Siyarama-Maya
सीता और राम से व्याप्त / परिपूर्ण; सीता-राममय
सब जग
Sab Jag
सम्पूर्ण जगत्, समस्त ब्रह्माण्ड
जानी
Jani
जानकर, पहचानकर / अनुभव करके
सियाराम
Siyarama
सीता और राम, दिव्य युगल
जग
Jag
जगत्, संसार, समस्त सृष्टि
करउँ
Karaun
मैं करता हूँ / अर्पित करता हूँ
प्रनाम
Pranama
प्रणाम, नमन, श्रद्धापूर्वक झुकना
जोरि
Jori
जोड़कर (एक साथ मिलाकर)
जुग पानी
Juga Pani
दोनों हाथ (हथेलियों की जोड़ी)

Complete Translation

सम्पूर्ण जगत् को सीता-राममय (सीता और राम से व्याप्त) जानकर, मैं दोनों हाथ जोड़कर सबको प्रणाम करता हूँ। (समस्त प्राणियों में दिव्य सीता-राम का दर्शन करते हुए मैं सबको श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।)

Origin & History

Source: Ramcharitmanas of Goswami Tulsidas (Bala Kanda)

Author: Goswami Tulsidas

Period: 16th century CE

रामचरितमानस के आरम्भिक बालकाण्ड में श्रीराम की कथा कहने से पूर्व तुलसीदास अनेक वन्दनाएँ अर्पित करते हैं। इस पंक्ति में वे घोषणा करते हैं कि सम्पूर्ण जगत् को सीता-राम से व्याप्त जानकर वे सबको हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं। यह चौपाई सर्वव्यापी भगवान की वैष्णव और अद्वैत दृष्टि को सार्वभौमिक श्रद्धा की एक ही कोमल अभिव्यक्ति में समेट देती है, और तभी से भक्तों के लिए मार्गदर्शक आदर्श के रूप में पूजनीय रही है।

Frequently Asked Questions

'सियाराममय सब जग जानी' कहाँ से है?
यह गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकाण्ड की प्रसिद्ध चौपाई है। यह कवि की वन्दनाओं के अंश के रूप में आती है और राम-भक्ति की सर्वाधिक प्रिय पंक्तियों में से एक बन गई है।
यह चौपाई क्या सिखाती है?
यह सर्वोच्च भक्तिमयी दृष्टि सिखाती है — सम्पूर्ण जगत् को दिव्य युगल सीता-राम से परिपूर्ण देखना और इसलिए सभी प्राणियों को हाथ जोड़कर श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना। यह ईश्वर की उपासना को प्रत्येक प्राणी के सम्मान से जोड़ती है।
इस चौपाई का दैनिक जीवन में उपयोग कैसे करें?
अनेक भक्त इसका पाठ दिन के आरम्भ में या किसी भी कार्य से पहले करते हैं, और दूसरों से मिलते समय इसे स्मरण करते हैं — सबमें दिव्यता के दर्शन की याद के रूप में। यह दैनिक व्यवहार में विनम्रता, धैर्य और प्रेम का विकास करती है।
तुलसीदास संसार को दोनों हाथ क्यों जोड़ते हैं?
क्योंकि सबमें सीता-राम को विद्यमान देखकर वे केवल मनुष्यों को नहीं, अपितु उनके भीतर की दिव्यता को सम्मान देते हैं। सम्पूर्ण जगत् को दोनों हाथ जोड़ना ('जोरि जुग पानी') हर रूप में ईश्वर के प्रति पूर्ण, विनम्र श्रद्धा व्यक्त करता है।

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