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सियाराममय सब जग जानी

🕉️ hindu·📿 11× जप·🕐 दिन के आरम्भ में, पूजा, अध्ययन या किसी भी कार्य से पहले; मार्गदर्शक स्मरण के रूप में किसी भी समय·📜 Ramcharitmanas of Goswami Tulsidas (Bala Kanda)

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अर्थ

गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस (बालकाण्ड) की यह अमर चौपाई हिन्दू भक्ति की सर्वाधिक उद्धृत पंक्तियों में से एक है। सम्पूर्ण जगत् को दिव्य युगल सीता और राम से व्याप्त देखते हुए, कवि हाथ जोड़कर समस्त सृष्टि को प्रणाम करते हैं। एक ही पंक्ति में यह प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का दर्शन करने की परम दृष्टि और सार्वभौमिक श्रद्धा की विनम्रता को व्यक्त करती है।

उत्पत्ति और कथा

Ramcharitmanas of Goswami Tulsidas (Bala Kanda) · Goswami Tulsidas · 16th century CE

रामचरितमानस के आरम्भिक बालकाण्ड में श्रीराम की कथा कहने से पूर्व तुलसीदास अनेक वन्दनाएँ अर्पित करते हैं। इस पंक्ति में वे घोषणा करते हैं कि सम्पूर्ण जगत् को सीता-राम से व्याप्त जानकर वे सबको हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं। यह चौपाई सर्वव्यापी भगवान की वैष्णव और अद्वैत दृष्टि को सार्वभौमिक श्रद्धा की एक ही कोमल अभिव्यक्ति में समेट देती है, और तभी से भक्तों के लिए मार्गदर्शक आदर्श के रूप में पूजनीय रही है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि जो इस चौपाई को सचमुच जीता है — प्रत्येक प्राणी में सीता-राम को देखता है — वह शत्रुता और भय से मुक्त हो जाता है, क्योंकि जो सबमें भगवान को प्रणाम करता है वह किसी से द्वेष नहीं कर सकता और सर्वत्र विद्यमान भगवान द्वारा उसकी रक्षा होती है।

मंत्र

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सियाराममय सब जग जानी करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी

Siyarama-Maya Sab Jag Jani | Karaun Pranama Jori Juga Pani ||

अर्थ:सम्पूर्ण जगत् को सीता-राममय (सीता और राम से व्याप्त) जानकर, मैं दोनों हाथ जोड़कर सबको प्रणाम करता हूँ। (समस्त प्राणियों में दिव्य सीता-राम का दर्शन करते हुए मैं सबको श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।)

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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सियाराममय🔊Siyarama-Mayaसीता और राम से व्याप्त / परिपूर्ण; सीता-राममय
सब जग🔊Sab Jagसम्पूर्ण जगत्, समस्त ब्रह्माण्ड
जानी🔊Janiजानकर, पहचानकर / अनुभव करके
सियाराम🔊Siyaramaसीता और राम, दिव्य युगल
जग🔊Jagजगत्, संसार, समस्त सृष्टि
करउँ🔊Karaunमैं करता हूँ / अर्पित करता हूँ
प्रनाम🔊Pranamaप्रणाम, नमन, श्रद्धापूर्वक झुकना
जोरि🔊Joriजोड़कर (एक साथ मिलाकर)
जुग पानी🔊Juga Paniदोनों हाथ (हथेलियों की जोड़ी)

सियाराममय सब जग जानी पाठ के लाभ

सभी प्राणियों में सीता-राम के दर्शन की परम भक्तिमयी दृष्टि प्रदान करती है

प्रत्येक प्राणी के प्रति विनम्रता, श्रद्धा और सद्भावना का विकास करती है

पूजा, अध्ययन या किसी भी कार्य के आरम्भ के लिए सार्वभौमिक वन्दना की उत्तम चौपाई

हृदय को सबमें दिव्यता का सम्मान करना सिखाकर अहंकार और शत्रुता का नाश करती है

स्मरण और पाठ में सरल, दैनिक अभ्यास और मार्गदर्शक जीवन-दृष्टि के रूप में आदर्श

सर्वव्यापी सत्ता के रूप में सीता-राम के प्रति प्रेम को गहरा करती है

सियाराममय सब जग जानी जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयदिन के आरम्भ में, पूजा, अध्ययन या किसी भी कार्य से पहले; मार्गदर्शक स्मरण के रूप में किसी भी समय

इस चौपाई का पाठ हाथ जोड़कर और सच्चे हृदय से करें, अपने चारों ओर के संसार को सचेत रूप से सीता-राममय देखते हुए, और सबको अपना प्रणाम अर्पित करें। रामचरितमानस के पाठ या किसी भी पूजा से पूर्व यह मंगल वन्दना के रूप में सुन्दर रीति से प्रयुक्त होती है, और सभी प्राणियों में दिव्यता की दृष्टि बनाए रखने के लिए दिन भर दोहराई जा सकती है। शब्दों के साथ हाथों का नमन भी होने दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकाण्ड की प्रसिद्ध चौपाई है। यह कवि की वन्दनाओं के अंश के रूप में आती है और राम-भक्ति की सर्वाधिक प्रिय पंक्तियों में से एक बन गई है।
यह सर्वोच्च भक्तिमयी दृष्टि सिखाती है — सम्पूर्ण जगत् को दिव्य युगल सीता-राम से परिपूर्ण देखना और इसलिए सभी प्राणियों को हाथ जोड़कर श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना। यह ईश्वर की उपासना को प्रत्येक प्राणी के सम्मान से जोड़ती है।
अनेक भक्त इसका पाठ दिन के आरम्भ में या किसी भी कार्य से पहले करते हैं, और दूसरों से मिलते समय इसे स्मरण करते हैं — सबमें दिव्यता के दर्शन की याद के रूप में। यह दैनिक व्यवहार में विनम्रता, धैर्य और प्रेम का विकास करती है।
क्योंकि सबमें सीता-राम को विद्यमान देखकर वे केवल मनुष्यों को नहीं, अपितु उनके भीतर की दिव्यता को सम्मान देते हैं। सम्पूर्ण जगत् को दोनों हाथ जोड़ना ('जोरि जुग पानी') हर रूप में ईश्वर के प्रति पूर्ण, विनम्र श्रद्धा व्यक्त करता है।

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