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ठुमक चलत रामचंद्र — Complete Lyrics

ठुमक चलत रामचंद्र

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियाँ। ठुमक चलत रामचंद्र॥
ṭhumaka calata rāmacaṃdra bājata paiṃjaniyā~ ṭhumaka calata rāmacaṃdra
रामचंद्र ठुमक-ठुमक कर चल रहे हैं और उनकी पैंजनियाँ बज रही हैं।
Verse 2
किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय। धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियाँ॥
kilaki kilaki uṭhata dhāya girata bhūmi laṭapaṭāya dhāya māta goda leta daśaratha kī raniyā~
किलक-किलक कर वे उठकर दौड़ते हैं और लड़खड़ाकर भूमि पर गिर पड़ते हैं; दशरथ जी की रानियाँ दौड़कर उन्हें गोद में उठा लेती हैं।
Verse 3
अंचल रज अंग झारि विविध भाँति सो दुलारि। तन मन धन वारि वारि कहत मृदु बचनियाँ॥
aṃcala raja aṃga jhāri vividha bhā~ti so dulāri tana mana dhana vāri vāri kahata mṛdu bacaniyā~
अपने आँचल से उनके अंगों की धूल झाड़कर, अनेक प्रकार से दुलार करती हुई माता तन-मन-धन उन पर बार-बार न्योछावर करती हैं और कोमल वचन बोलती हैं।
Verse 4
विद्रुम से अरुण अधर बोलत मुख मधुर मधुर। सुभग नासिका में चारु लटकत लटकनियाँ॥
vidruma se aruṇa adhara bolata mukha madhura madhura subhaga nāsikā meṃ cāru laṭakata laṭakaniyā~
उनके अधर मूँगे के समान लाल हैं और मुख से मधुर-मधुर बोल फूटते हैं; सुंदर नासिका में मनोहर लटकन झूल रही है।
Verse 5
तुलसीदास अति आनंद देख के मुखारविंद। रघुवर छबि के समान रघुवर छबि बनियाँ॥
tulasīdāsa ati ānaṃda dekha ke mukhāraviṃda raghuvara chabi ke samāna raghuvara chabi baniyā~
तुलसीदास उस मुखारविंद को देखकर अत्यंत आनंदित हैं — रघुवर की छबि की उपमा केवल रघुवर की छबि से ही दी जा सकती है।

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