वज्रादपि कठोराणि — Complete Lyrics
वज्रादपि कठोराणि
Sanskrit text with English transliteration and translation
वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि।
लोकोत्तराणां चेतांसि को नु विज्ञातुमर्हति॥
vajrād api kaṭhorāṇi mṛdūni kusumād api।
lokottarāṇāṁ cetāṁsi ko nu vijñātum arhati॥
वज्र से भी कठोर, फिर भी पुष्प से भी कोमल — महान एवं लोकोत्तर पुरुषों के हृदय को भला कौन पूर्णतः समझ सकता है? यह श्लोक इस विस्मय को व्यक्त करता है कि श्रेष्ठतम आत्माएँ विपत्ति में अटूट रूप से दृढ़ और करुणा में अत्यन्त कोमल — दोनों एक साथ होती हैं, जो साधारण समझ से परे एक विरोधाभास है।
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