विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा PDF
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विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा सदसि वाक्पटुता युधि विक्रमः। यशसि चाभिरुचिर्व्यसनं श्रुतौ प्रकृतिसिद्धमिदं हि महात्मनाम्॥
vipadi dhairyam athābhyudaye kṣamā sadasi vāk-paṭutā yudhi vikramaḥ। yaśasi cābhirucir vyasanaṁ śrutau prakṛti-siddham idaṁ hi mahātmanām॥
विपत्ति में धैर्य, उन्नति में क्षमा, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में पराक्रम, यश में अभिरुचि और शास्त्र (विद्या) में आसक्ति — ये गुण महात्माओं में स्वभाव से ही सिद्ध होते हैं। भर्तृहरि सज्जन पुरुष के छह सहज गुणों को गिनाते हुए कहते हैं कि सच्चे महान लोगों में ये गुण प्रयत्न से नहीं, उनके स्वभाव से ही प्रकट होते हैं।