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विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वम् PDF

विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

एतत्कृतं यत्कदनं त्वयाद्य धर्मद्विषां देवि महासुराणाम् । रूपैरनेकैर्बहुधात्ममूर्तिं कृत्वाम्बिके तत्प्रकरोति कान्या ॥

etatkṛtaṃ yatkadanaṃ tvayādya dharmadviṣāṃ devi mahāsurāṇām rūpairanekairbahudhātmamūrtiṃ kṛtvāmbike tatprakaroti kānyā

हे देवी! धर्मद्रोही महान् असुरों का जो यह संहार आज आपने किया — अपने एक ही स्वरूप को अनेक रूपों में बहुधा करके — हे अम्बिके! इसे और कौन कर सकती है?

विद्यासु शास्त्रेषु विवेकदीपे- ष्वाद्येषु वाक्येषु च का त्वदन्या । ममत्वगर्तेऽतिमहान्धकारे विभ्रामयत्येतदतीव विश्वम् ॥

vidyāsu śāstreṣu vivekadīpe- ṣvādyeṣu vākyeṣu ca kā tvadanyā mamatvagarte'timahāndhakāre vibhrāmayatyetadatīva viśvam

विद्याओं में, शास्त्रों में, विवेक के दीपों में और आद्य (वैदिक) वाक्यों में — आपके अतिरिक्त और कौन है? फिर भी आप ही इस विश्व को ममता के गड्ढे और अत्यन्त घोर अन्धकार में अत्यन्त भ्रमित करती हैं।

रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र । दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम् ॥

rakṣāṃsi yatrograviṣāśca nāgā yatrārayo dasyubalāni yatra dāvānalo yatra tathābdhimadhye tatra sthitā tvaṃ paripāsi viśvam

जहाँ राक्षस और उग्र विष वाले नाग हैं, जहाँ शत्रु और दस्युओं के बल हैं, जहाँ दावानल है, और समुद्र के बीच में भी — वहाँ स्थित रहकर आप विश्व की रक्षा करती हैं।

विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीह विश्वम् । विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥

viśveśvari tvaṃ paripāsi viśvaṃ viśvātmikā dhārayasīha viśvam viśveśavandyā bhavatī bhavanti viśvāśrayā ye tvayi bhaktinamrāḥ

हे विश्वेश्वरी! आप विश्व की रक्षा करती हैं; विश्वात्मिका होकर आप ही यहाँ विश्व को धारण करती हैं; आप विश्व के स्वामियों द्वारा भी वन्दनीय हैं; और जो भक्ति से आपके आगे नम्र होते हैं, वे विश्व के आश्रय बन जाते हैं।