यो मां जयति सङ्ग्रामे (देवी की प्रतिज्ञा) — Complete Lyrics
यो मां जयति सङ्ग्रामे (देवी की प्रतिज्ञा)
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
देव्युवाच
सत्यमुक्तं त्वया नात्र मिथ्या किञ्चित्त्वयोदितम् ।
त्रैलोक्याधिपतिः शुम्भो निशुम्भश्चापि तादृशः ॥
devyuvāca
satyamuktaṃ tvayā nātra mithyā kiñcittvayoditam
trailokyādhipatiḥ śumbho niśumbhaścāpi tādṛśaḥ
देवी बोलीं — तुमने सत्य कहा, इसमें तुमने कुछ भी असत्य नहीं कहा। शुम्भ सचमुच त्रैलोक्य का अधिपति है, और वैसा ही निशुम्भ भी। किन्तु इस विषय में जो प्रतिज्ञा की गई है, वह मिथ्या कैसे की जाए? अल्पबुद्धिवश पहले मैंने जो प्रतिज्ञा की थी, उसे सुनो — 'जो मुझे युद्ध में जीत ले, जो मेरे दर्प को दूर कर दे, जो संसार में मेरे बराबर बल वाला हो — वही मेरा पति होगा।' अतः शुम्भ यहाँ आ जाए, अथवा महाबली निशुम्भ; मुझे जीतकर वह शीघ्र मेरा पाणिग्रहण कर ले — विलम्ब से क्या?
Verse 2
किं त्वत्र यत्प्रतिज्ञातं मिथ्या तत्क्रियते कथम् ।
श्रूयतामल्पबुद्धित्वात्प्रतिज्ञा या कृता पुरा ॥
kiṃ tvatra yatpratijñātaṃ mithyā tatkriyate katham
śrūyatāmalpabuddhitvātpratijñā yā kṛtā purā
Verse 3
यो मां जयति सङ्ग्रामे यो मे दर्पं व्यपोहति ।
यो मे प्रतिबलो लोके स मे भर्ता भविष्यति ॥
yo māṃ jayati saṅgrāme yo me darpaṃ vyapohati
yo me pratibalo loke sa me bhartā bhaviṣyati
Verse 4
तदागच्छतु शुम्भोऽत्र निशुम्भो वा महाबलः ।
मां जित्वा किं चिरेणात्र पाणिं गृह्णातु मे लघु ॥
tadāgacchatu śumbho'tra niśumbho vā mahābalaḥ
māṃ jitvā kiṃ cireṇātra pāṇiṃ gṛhṇātu me laghu
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