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आपत्सु मित्रं जानीयात् — Complete Lyrics

आपत्सु मित्रं जानीयात्

Sanskrit text with English transliteration and translation

आपत्सु मित्रं जानीयाद्युद्धे शूरमृणे शुचिम्। भार्यां क्षीणेषु वित्तेषु व्यसने सुहृज्जनम्॥
āpatsu mitraṁ jānīyād yuddhe śūram ṛṇe śucim। bhāryāṁ kṣīṇeṣu vitteṣu vyasane ca suhṛj-janam॥
सच्चे मित्र को विपत्ति में, वीर को युद्ध में, ईमानदार को ऋण (लेन-देन) में, सच्ची पत्नी को धन के क्षीण होने पर, और सच्चे सम्बन्धी को संकट में पहचाना जाता है। यह श्लोक सिखाता है कि लोगों की वास्तविक योग्यता अच्छे समय में नहीं, बल्कि कठिनाई की घड़ी में प्रकट होती है।

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