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அபிராமி அந்தாதி — Word-by-Word Meaning

அபிராமி அந்தாதி

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

தாரமர் கொன்றையும் சண்பக மாலையும்
tāramar konṟaiyum saṇbaka mālaiyum
कोन्रै (अमलतास) के पुष्पों की माला और शेण्बग (चम्पक) के पुष्पों की माला।
சாத்தும் தில்லை ஊரர்
sāththum thillai ūrar
(जो इन्हें) धारण करते हैं, तिल्लै (चिदम्बरम) के स्वामी — अर्थात् भगवान नटराज-शिव।
பாகத்து உமைமைந்தனே
pāgaththu umaimainthanē
हे उमा (पार्वती) के पुत्र, जो शिव के शरीर के आधे भाग हैं — अर्थात् भगवान गणपति।
உலகு ஏழும் பெற்ற
ulagu ēzhum peṟṟa
जिन्होंने सातों लोकों को जन्म दिया (धारण किया) — माता अभिरामी।
சீர் அபிராமி அந்தாதி
sīr abirāmi anthādhi
यह गौरवमयी अभिरामी अंताति (अभिरामी को समर्पित 'अंत-और-आदि' पदों की माला)।
எப்போதும் என் சிந்தையுள்ளே
eppōdhum en sinthaiyuḷḷē
सदा, मेरे चित्त / मन के भीतर।
காரமர் மேனிக் கணபதியே
kāramar mēnik gaṇapathiyē
हे मेघ-समान (श्याम) देदीप्यमान रूप वाले गणपति।
நிற்கக் கட்டுரையே
niṟkak kaṭṭuraiyē
आदेश दीजिए (कृपा कीजिए) कि यह (मेरे मन में) स्थिर रहे — आवाहन (काप्पु) की प्रार्थना।
உதிக்கின்ற செங்கதிர்
udhikkinṟa sengadhir
उदित होती सूर्य की लाल किरणें (अभी-अभी उगा सूर्य)।
உச்சித் திலகம்
uchchith thilagam
(उनके) ललाट के शिखर पर सुशोभित तिलक।
உணர்வுடையோர் மதிக்கின்ற மாணிக்கம்
uṇarvuḍaiyōr madhikkinṟa māṇikkam
ज्ञानी / विवेकी जनों द्वारा सम्मानित माणिक्य।
மாதுளம் போது
mādhuḷam pōdhu
अनार का पुष्प (जिससे उनके तेज की उपमा दी जाती है)।
மலர்க் கமலை
malark kamalai
खिलता कमल (लक्ष्मी-सम) — उनका कमल-सम सौंदर्य।
துதிக்கின்ற மின்கொடி
thudhikkinṟa minkoḍi
स्तुत, देदीप्यमान विद्युत्-रेखा (उनका दीप्तिमान, सुकुमार स्वरूप)।
மென்கதிர் கும்குமம் என்ன
menkadhir kumkumam enna
कोमल-किरण कुंकुम (केसरिया-लाल) के समान — उनके स्वरूप की दीप्त लाल आभा का वर्णन।
விதிக்கின்ற மேனி அபிராமி
vidhikkinṟa mēni abirāmi
अभिरामी, जिनका विधान-रचित (देदीप्यमान) स्वरूप यह (सब) है — अनुपम सौंदर्य की देवी।
என் தன் உயிர்த் துணையே
en than uyirth thuṇaiyē
वही मेरे प्राणों की संगिनी (आश्रय) हैं (मेरी आत्मा की शरण)।
அந்தாதி
anthādhi
अंताति — एक काव्य-शैली जिसमें प्रत्येक पद का अंतिम शब्द (अंतम्) अगले का आरंभ (आदि) बनता है, जिससे एक अटूट माला बनती है।
அபிராமி
abirāmi
अभिरामी — 'परम सौंदर्य / आनन्द वाली', तिरुक्कडैयूर की परम देवी (शक्ति)।

Complete Translation

अபிராमी अंताति तिरुक्कडैयूर की देवी अभिरामी की स्तुति में रचित १०० पदों की महान तमिल माला है, जिसे भक्त सुब्रह्मण्य अय्यर — 'अभिरामी भट्टर' — ने गाया। काप्पु (आवाहन): हे मेघ-समान श्याम तेजस्वी रूप वाले गणपति, हे तिल्लै (चिदम्बरम) के स्वामी के अर्धांग उमा के पुत्र — वे जो कोन्रै और शेण्बग पुष्पों की मालाएँ धारण करते हैं — आदेश दीजिए कि सातों लोकों को जन्म देने वाली माता की यह गौरवमयी अभिरामी अंताति सदा मेरे चित्त में स्थिर रहे। पद 1: उदित होते सूर्य की लाल किरणों के समान, मस्तक के तिलक के समान, ज्ञानियों द्वारा सम्मानित माणिक्य के समान, अनार के पुष्प और खिलते कमल के समान, स्तुत विद्युत्-रेखा के समान, कोमल-किरण कुंकुम की आभा के समान — ऐसा है अभिरामी का देदीप्यमान स्वरूप; वही मेरे प्राणों की संगिनी और आश्रय हैं। अபिरामी अंताति 'अंताति' छंद में रचित है, जहाँ प्रत्येक पद के अंतिम अक्षर अगले पद का आरंभ करते हैं, जिससे सभी सौ पद माता की स्तुति की एक अखण्ड माला में बँध जाते हैं।

Origin & History

Source: Abhirami Anthadhi of Abhirami Bhattar (Tamil), Thirukkadaiyur

Author: Abhirami Bhattar (Subramania Iyer)

Period: c. 18th century CE

अभिरामी भट्टर तिरुक्कडैयूर के मंदिर में देवी अभिरामी की सेवा करते थे, उनके दर्शन में इतने लीन कि अक्सर संसार से विमुख प्रतीत होते। जब तंजावुर के राजा सर्फोजी ने आकर पूछा कि कौन-सा दिन है, तो केवल माता का तेजोमय मुख देखते हुए संत ने कहा कि पूर्णिमा का दिन है — यद्यपि वह अमावस्या थी। अपना वचन सिद्ध करने या दण्ड भोगने को बाध्य अभिरामी भट्टर ने रातभर अभिरामी अंताति के सौ पद गाए, और देवी ने अपने भक्त की रक्षा हेतु अपना प्रकाश पूर्ण चन्द्र के रूप में प्रकट कर दिया।

Frequently Asked Questions

अभिरामी अंताति क्या है?
यह देवी अभिरामी की स्तुति में रचित १०० पदों का तमिल भक्ति स्तोत्र है, जो तिरुक्कडैयूर में भगवान अमृतघटेश्वर के साथ विराजमान शक्ति का रूप है। इसकी रचना संत अभिरामी भट्टर ने 'अंताति' शैली में की, जहाँ प्रत्येक पद का अन्त अगले का आरम्भ बनता है।
अभिरामी भट्टर कौन थे?
अभिरामी भट्टर (सुब्रमणिय अय्यर) तिरुक्कडैयूर में देवी अभिरामी के महान भक्त थे, जो उनके दर्शन में लीन रहते थे। परम्परा उन्हें १८वीं शताब्दी में, तंजावुर के मराठा राजा सर्फोजी के शासनकाल से जोड़कर रखती है।
अभिरामी अंताति का प्रसिद्ध चमत्कार क्या है?
कहा जाता है कि भक्ति में लीन अभिरामी भट्टर ने अमावस्या के दिन को पूर्णिमा का दिन घोषित कर दिया। इसे सिद्ध करने की चुनौती मिलने पर उन्होंने अभिरामी अंताति गाई, और देवी की कृपा से उन्होंने अपना चमकता कुण्डल आकाश में उछाल दिया (अथवा उनकी शक्ति से पूर्ण चन्द्र प्रकट हो गया) जिससे रात्रि प्रकाशित हो उठी — अपने भक्त का वचन सत्य कर दिया।
'अंताति' का अर्थ क्या है?
'अंताति' एक तमिल काव्य शैली है जिसमें प्रत्येक पद का अन्तिम शब्द या अक्षर (अन्तम्) अगले पद का प्रथम (आदि) बनता है, जिससे पद एक अटूट श्रृंखला में — माला के समान — जुड़े रहते हैं, और अन्तिम पद पुनः प्रथम से जुड़ जाता है।

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