அபிராமி அந்தாதி
अन्य नाम / खोज: abhirami anthadhi · abirami andhadhi · abhirami andhadhi · udikkinra sengadhir · abhirami bhattar anthadhi
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✦ अर्थ
अभिरामी अंताति तिरुक्कडैयूर की देवी अभिरामी की स्तुति में रचित १०० पदों का प्रसिद्ध तमिल स्तोत्र है, जिसकी रचना अभिरामी भट्टर ने की। यह गणपति का आवाहन करते 'कप्पु' से आरम्भ होता है और फिर माता के तेजोमय सौन्दर्य तथा रक्षक कृपा की स्तुति प्रवाहित करता है, जहाँ प्रत्येक पद अटूट 'अंताति' शैली में अगले पद से जुड़ा है। परम्परा कहती है कि संत ने इसे गाकर देवी की शक्ति से अमावस्या की रात को पूर्णिमा में बदल दिया।
उत्पत्ति और कथा
Abhirami Anthadhi of Abhirami Bhattar (Tamil), Thirukkadaiyur · Abhirami Bhattar (Subramania Iyer) · c. 18th century CE
अभिरामी भट्टर तिरुक्कडैयूर के मंदिर में देवी अभिरामी की सेवा करते थे, उनके दर्शन में इतने लीन कि अक्सर संसार से विमुख प्रतीत होते। जब तंजावुर के राजा सर्फोजी ने आकर पूछा कि कौन-सा दिन है, तो केवल माता का तेजोमय मुख देखते हुए संत ने कहा कि पूर्णिमा का दिन है — यद्यपि वह अमावस्या थी। अपना वचन सिद्ध करने या दण्ड भोगने को बाध्य अभिरामी भट्टर ने रातभर अभिरामी अंताति के सौ पद गाए, और देवी ने अपने भक्त की रक्षा हेतु अपना प्रकाश पूर्ण चन्द्र के रूप में प्रकट कर दिया।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि जब अभिरामी भट्टर ने अमावस्या की रात अंताति गाई, तब दिव्य माता ने अपना चमकता कर्ण-आभूषण आकाश में फेंक दिया — अथवा अपनी शक्ति से पूर्ण चन्द्र को उदित कर दिया — जिससे रात्रि प्रकाश से भर उठी और राजा के समक्ष उनके भक्त का वचन सत्य सिद्ध हो गया।
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தாரமர் கொன்றையும் சண்பக மாலையும் சாத்தும் தில்லை ஊரர்தம் பாகத்து உமைமைந்த னே.உலகு ஏழும்பெற்ற சீர்அபி ராமிஅந் தாதிஎப் போதும்என் சிந்தையுள்ளே காரமர் மேனிக் கணபதி யே.நிற்கக் கட்டுரையே
tāramar konṟaiyum saṇbaka mālaiyum sāththum thillai ūrartham pāgaththu umaimainthanē. ulagu ēzhumpeṟṟa sīrabi rāmiyan thādhiyep pōdhumen sinthaiyuḷḷē kāramar mēnik gaṇapathiyē. niṟkak kaṭṭuraiyē
अर्थ:अபிராमी अंताति तिरुक्कडैयूर की देवी अभिरामी की स्तुति में रचित १०० पदों की महान तमिल माला है, जिसे भक्त सुब्रह्मण्य अय्यर — 'अभिरामी भट्टर' — ने गाया।
உதிக்கின்ற செங்கதிர் உச்சித் திலகம் உணர்வுடையோர் மதிக்கின்ற மாணிக்கம் மாதுளம் போதுமலர்க் கமலை துதிக்கின்ற மின்கொடி மென்கதிர் மென்கும் குமம்என்ன விதிக்கின்ற மேனிஅபி ராமிஎன் தன்உயிர்த் துணையே
udhikkinṟa sengadhir uchchith thilagam uṇarvuḍaiyōr madhikkinṟa māṇikkam mādhuḷam pōdhumalark kamalai thudhikkinṟa minkoḍi menkadhir menkum kumamenna vidhikkinṟa mēniyabi rāmiyen than-uyirth thuṇaiyē
अर्थ:काप्पु (आवाहन): हे मेघ-समान श्याम तेजस्वी रूप वाले गणपति, हे तिल्लै (चिदम्बरम) के स्वामी के अर्धांग उमा के पुत्र — वे जो कोन्रै और शेण्बग पुष्पों की मालाएँ धारण करते हैं — आदेश दीजिए कि सातों लोकों को जन्म देने वाली माता की यह गौरवमयी अभिरामी अंताति सदा मेरे चित्त में स्थिर रहे।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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அபிராமி அந்தாதி पाठ के लाभ
देवी (शक्ति) के अभिरामी रूप की परम शक्तिशाली स्तुति — जो उनकी प्रत्यक्ष कृपा और रक्षा प्रदान करने वाली मानी जाती है।
कठिनाइयों के निवारण के लिए, साहस के लिए और सच्ची प्रार्थनाओं की पूर्ति के लिए पाठ किया जाता है, जैसा संत के अपने चमत्कार में हुआ।
देवी के प्रति भक्ति बढ़ाता है और कल्याण, ज्ञान तथा भयमुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है।
परम्परागत रूप से देवी मंदिरों में विशेष रूप से पूर्णिमा (पौर्णमी) के दिन, शुक्रवार को और अमावस्या के दिन पाठ किया जाता है।
तमिलनाडु भर में तमिल परम्परा के महानतम शाक्त स्तोत्रों में से एक के रूप में पूजित है।
அபிராமி அந்தாதி जप विधि
स्नान कर दिव्य माता (अभिरामी / अम्मन) की प्रतिमा के सम्मुख बैठें। दीप जलाएँ, कुंकुम और पुष्प अर्पित करें। गणपति का आवाहन करते कप्पु से आरम्भ करें, फिर माता के सौन्दर्य और कृपा का ध्यान करते हुए भक्तिपूर्वक पद पढ़ें। सम्पूर्ण रचना में अंताति शैली में बंधे १०० पद हैं; अनेक लोग प्रतिदिन कप्पु और चुने हुए पद पढ़ते हैं तथा पौर्णमी पर सम्पूर्ण पाठ करते हैं। अन्त में माता की रक्षा और कृपा की प्रार्थना से समापन करें।