श्री अन्नपूर्णा जी की आरती — Complete Lyrics
श्री अन्नपूर्णा जी की आरती
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
बारम्बार प्रणाम, करूँ महारानी ।
दया दृष्टि कीजै, हे जगत-जननी ॥
ॐ जय अन्नपूर्णा, मैया जय अन्नपूर्णा ॥
Baarambaara pranaama, karoon Maharaani
Daya drishti keejai, he jagata-janani
Om Jai Annapurna, Maiya Jai Annapurna
हे महारानी, बारम्बार मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ; हे जगत-जननी, मुझ पर दया दृष्टि कीजिए। माता अन्नपूर्णा, तुम्हारी जय हो!
Verse 2
जगत-जननी जगदम्बा, अन्न-धन देती हो ।
सकल विश्व की माता, सबको पालन करती हो ॥
ॐ जय अन्नपूर्णा ॥
Jagata-janani Jagadamba, anna-dhana deti ho
Sakala vishva ki maata, sabako paalana karti ho
Om Jai Annapurna
हे जगत-जननी जगदम्बा, तुम अन्न और धन देती हो; समस्त विश्व की माता, तुम सबका पालन करती हो।
Verse 3
काशीपुरी अधिष्ठात्री, विश्वेश्वर प्यारी ।
हाथ कमण्डल त्रिशूल, ज्वालामुखी न्यारी ॥
ॐ जय अन्नपूर्णा ॥
Kaasheepuri adhishthaatri, Vishveshvara pyaari
Haatha kamandala trishoola, jvaalaamukhi nyaari
Om Jai Annapurna
काशीपुरी की अधिष्ठात्री और विश्वेश्वर की प्रिया, हाथ में कमण्डल और त्रिशूल धारण किए, तेजोमयी और अद्वितीय।
Verse 4
जो जन तुमको ध्यावे, भूखा नहिं रहता ।
रंक होय धनवन्ता, सब कुछ है पाता ॥
ॐ जय अन्नपूर्णा ॥
Jo jana tumako dhyaave, bhookha nahin rahata
Ranka hoya dhanavanta, saba kuchha hai paata
Om Jai Annapurna
जो जन तुम्हारा ध्यान करता है, वह कभी भूखा नहीं रहता; रंक भी धनवान बन जाता है और सब कुछ पा लेता है।
Verse 5
भक्त-जनों को सुख दे, सम्पति-धन देती ।
भण्डारे भरपूर रहें, यश सब जग गाती ॥
ॐ जय अन्नपूर्णा ॥
Bhakta-janon ko sukha de, sampati-dhana deti
Bhandaare bharapoora rahen, yasha saba jaga gaati
Om Jai Annapurna
तुम भक्तजनों को सुख देती हो और सम्पत्ति-धन प्रदान करती हो; उनके भण्डार सदा भरपूर रहें, सारा जग तुम्हारा यश गाता है।
Verse 6
शंकर सहित विराजत, मैया जग-तारिणी ।
कर में अन्न-कटोरा, करुणा की खानी ॥
ॐ जय अन्नपूर्णा ॥
Shankara sahita viraajata, Maiya jaga-taarini
Kara mein anna-katora, karuna ki khaani
Om Jai Annapurna
शंकर सहित विराजमान, हे जग-तारिणी माता, तुम्हारे कर में अन्न का कटोरा है — तुम करुणा की खान हो।
Verse 7
अन्नपूर्णा की आरती, जो कोई नर गावे ।
सुख-सम्पति सब पावे, परम पद पावे ॥
ॐ जय अन्नपूर्णा, मैया जय अन्नपूर्णा ॥
Annapurna ki aarti, jo koi nara gaave
Sukha-sampati saba paave, parama pada paave
Om Jai Annapurna, Maiya Jai Annapurna
जो भी मनुष्य अन्नपूर्णा जी की यह आरती गाता है, वह समस्त सुख-सम्पत्ति पाकर परम पद को प्राप्त करता है।
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