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श्री अन्नपूर्णा जी की आरती Meaning — Line by Line

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of श्री अन्नपूर्णा जी की आरती with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Baarambaara pranaama, karoon Maharaani
  2. Verse 2. Jagata-janani Jagadamba, anna-dhana deti ho
  3. Verse 3. Kaasheepuri adhishthaatri, Vishveshvara pyaari
  4. Verse 4. Jo jana tumako dhyaave, bhookha nahin rahata
  5. Verse 5. Bhakta-janon ko sukha de, sampati-dhana deti
  6. Verse 6. Shankara sahita viraajata, Maiya jaga-taarini
  7. Verse 7. Annapurna ki aarti, jo koi nara gaave
Verse 1#

Baarambaara pranaama, karoon Maharaani

बारम्बार प्रणाम, करूँ महारानी दया दृष्टि कीजै, हे जगत-जननी जय अन्नपूर्णा, मैया जय अन्नपूर्णा

Baarambaara pranaama, karoon Maharaani Daya drishti keejai, he jagata-janani Om Jai Annapurna, Maiya Jai Annapurna

Meaningहे महारानी, बारम्बार मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ; हे जगत-जननी, मुझ पर दया दृष्टि कीजिए। माता अन्नपूर्णा, तुम्हारी जय हो!

Verse 2#

Jagata-janani Jagadamba, anna-dhana deti ho

जगत-जननी जगदम्बा, अन्न-धन देती हो सकल विश्व की माता, सबको पालन करती हो जय अन्नपूर्णा

Jagata-janani Jagadamba, anna-dhana deti ho Sakala vishva ki maata, sabako paalana karti ho Om Jai Annapurna

Meaningहे जगत-जननी जगदम्बा, तुम अन्न और धन देती हो; समस्त विश्व की माता, तुम सबका पालन करती हो।

Verse 3#

Kaasheepuri adhishthaatri, Vishveshvara pyaari

काशीपुरी अधिष्ठात्री, विश्वेश्वर प्यारी हाथ कमण्डल त्रिशूल, ज्वालामुखी न्यारी जय अन्नपूर्णा

Kaasheepuri adhishthaatri, Vishveshvara pyaari Haatha kamandala trishoola, jvaalaamukhi nyaari Om Jai Annapurna

Meaningकाशीपुरी की अधिष्ठात्री और विश्वेश्वर की प्रिया, हाथ में कमण्डल और त्रिशूल धारण किए, तेजोमयी और अद्वितीय।

Verse 4#

Jo jana tumako dhyaave, bhookha nahin rahata

जो जन तुमको ध्यावे, भूखा नहिं रहता रंक होय धनवन्ता, सब कुछ है पाता जय अन्नपूर्णा

Jo jana tumako dhyaave, bhookha nahin rahata Ranka hoya dhanavanta, saba kuchha hai paata Om Jai Annapurna

Meaningजो जन तुम्हारा ध्यान करता है, वह कभी भूखा नहीं रहता; रंक भी धनवान बन जाता है और सब कुछ पा लेता है।

Verse 5#

Bhakta-janon ko sukha de, sampati-dhana deti

भक्त-जनों को सुख दे, सम्पति-धन देती भण्डारे भरपूर रहें, यश सब जग गाती जय अन्नपूर्णा

Bhakta-janon ko sukha de, sampati-dhana deti Bhandaare bharapoora rahen, yasha saba jaga gaati Om Jai Annapurna

Meaningतुम भक्तजनों को सुख देती हो और सम्पत्ति-धन प्रदान करती हो; उनके भण्डार सदा भरपूर रहें, सारा जग तुम्हारा यश गाता है।

Verse 6#

Shankara sahita viraajata, Maiya jaga-taarini

शंकर सहित विराजत, मैया जग-तारिणी कर में अन्न-कटोरा, करुणा की खानी जय अन्नपूर्णा

Shankara sahita viraajata, Maiya jaga-taarini Kara mein anna-katora, karuna ki khaani Om Jai Annapurna

Meaningशंकर सहित विराजमान, हे जग-तारिणी माता, तुम्हारे कर में अन्न का कटोरा है — तुम करुणा की खान हो।

Verse 7#

Annapurna ki aarti, jo koi nara gaave

अन्नपूर्णा की आरती, जो कोई नर गावे सुख-सम्पति सब पावे, परम पद पावे जय अन्नपूर्णा, मैया जय अन्नपूर्णा

Annapurna ki aarti, jo koi nara gaave Sukha-sampati saba paave, parama pada paave Om Jai Annapurna, Maiya Jai Annapurna

Meaningजो भी मनुष्य अन्नपूर्णा जी की यह आरती गाता है, वह समस्त सुख-सम्पत्ति पाकर परम पद को प्राप्त करता है।

Word-by-Word Breakdown

बारम्बार प्रणाम
baarambaara pranaama
बारम्बार मैं प्रणाम करता हूँ
करूँ महारानी
karoon Maharaani
(मैं तुम्हें वन्दन करता हूँ) हे महारानी
दया दृष्टि कीजै
daya drishti keejai
मुझ पर अपनी करुणामयी दृष्टि डालो
जगत-जननी
jagata-janani
हे जगत की माता
अन्न-धन देती हो
anna-dhana deti ho
तुम अन्न और धन प्रदान करती हो
सबको पालन करती हो
sabako paalana karti ho
तुम समस्त प्राणियों का पालन-पोषण करती हो
काशीपुरी अधिष्ठात्री
Kaasheepuri adhishthaatri
काशी (वाराणसी) नगरी की अधिष्ठात्री देवी
विश्वेश्वर प्यारी
Vishveshvara pyaari
विश्वेश्वर (काशी के भगवान शिव) की प्रिया
कर में अन्न-कटोरा
kara mein anna-katora
अपने हाथ में अन्न का कटोरा धारण किए
करुणा की खानी
karuna ki khaani
करुणा की साक्षात् खान (स्रोत)
जो जन तुमको ध्यावे
jo jana tumako dhyaave
जो भी तुम्हारा ध्यान करता है
भूखा नहिं रहता
bhookha nahin rahata
वह कभी भूखा नहीं रहता
रंक होय धनवन्ता
ranka hoya dhanavanta
रंक भी धनवान बन जाता है
भण्डारे भरपूर रहें
bhandaare bharapoora rahen
भण्डार सदा भरे रहें
शंकर सहित विराजत
Shankara sahita viraajata
भगवान शंकर (शिव) के साथ विराजमान
जग-तारिणी
jaga-taarini
जगत् की उद्धारिणी
परम पद पावे
parama pada paave
परम पद (मोक्ष) को प्राप्त करता है

Origin & History

Source: Traditional North Indian devotional aarti (Aarti Sangrah); the deity Annapurna is glorified in the Annapurna Stotram attributed to Adi Shankaracharya

Author: Traditional / Anonymous

Period: Medieval to modern

अन्नपूर्णा, पार्वती का अन्न-दात्री स्वरूप, काशी (वाराणसी) की अधिष्ठात्री देवी हैं, जहाँ उनका मंदिर भगवान काशी विश्वनाथ के मंदिर के पास स्थित है। परम्परा के अनुसार, शिव स्वयं भिक्षापात्र लेकर उनके पास आए ताकि संसार को सिखा सकें कि अन्न और पदार्थ पवित्र हैं, मात्र माया नहीं। उत्तर भारतीय घरों एवं मंदिरों में गायी जाने वाली यह आरती उन्हें उस अक्षय पालनकर्त्री के रूप में महिमामंडित करती है जो सुनिश्चित करती हैं कि कोई भक्त भूखा न रहे।

Frequently Asked Questions

माँ अन्नपूर्णा कौन हैं?
अन्नपूर्णा देवी पार्वती का वह स्वरूप हैं जो अन्न एवं पोषण की दात्री हैं ('अन्न' अर्थात् भोजन, 'पूर्णा' अर्थात् पूर्ण)। वे काशी (वाराणसी) की रानी हैं, जो हाथ में खीर का कटोरा और सुनहरा चमचा लिए दर्शायी जाती हैं, और भगवान शिव के विश्वनाथ रूप की पत्नी हैं।
अन्नपूर्णा और शिव की कथा क्या है?
कहा जाता है कि जब शिव ने भौतिक जगत् को मात्र माया घोषित किया, तब समस्त शरीरों की पालनकर्त्री पार्वती अन्तर्धान हो गईं, और संसार भूखा मरने लगा। यह जानकर कि अन्न और पदार्थ वास्तविक एवं पवित्र हैं, शिव स्वयं भिक्षापात्र लेकर काशी आए, और पार्वती अन्नपूर्णा रूप में उन्हें भोजन कराने प्रकट हुईं — इस प्रकार वे समस्त प्राणियों की शाश्वत पालनकर्त्री के रूप में स्थापित हुईं।
अन्नपूर्णा आरती कब गानी चाहिए?
यह अन्नपूर्णा मंदिरों में प्रतिदिन गायी जाती है, और विशेष भक्ति के साथ अन्नपूर्णा जयन्ती (मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा) पर तथा अक्षय तृतीया पर, जो अक्षय समृद्धि से सम्बन्धित है।
इस आरती का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह अन्न को एक दिव्य उपहार के रूप में कृतज्ञता सिखाती है और भक्तों को स्मरण कराती है कि जो माता हमारी थाली भरती हैं, वही समस्त ब्रह्माण्ड को भरती हैं। अन्नपूर्णा की आराधना स्वाभाविक रूप से अन्न-दान — दूसरों को भोजन कराने — की प्रेरणा देती है, जो दान के सर्वोच्च रूपों में से एक माना जाता है।

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