बालात्रिपुरसुन्दरी ध्यान स्तोत्रम् — Word-by-Word Meaning
बालात्रिपुरसुन्दरी ध्यान स्तोत्रम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Traditional Sri Vidya / Shakta dhyana verse (used in Bala upasana and Tantric manuals)
Author: Traditional (anonymous, within the Sri Vidya tradition)
Period: Classical / Medieval
श्रीविद्या परम्परा में प्रत्येक देवता की पूजा एक ध्यान-श्लोक से आरम्भ होती है — एक श्लोक जो देवता के स्वरूप को चित्रित करता है ताकि उपासक उसे हृदय में धारण कर सके। यह श्लोक, 'अरुण-किरण-जालैः', ललिता के नवयौवना रूप बालात्रिपुरसुन्दरी का प्रतिष्ठित ध्यान है। बाला अक्सर श्रीविद्या दीक्षित को दिया जाने वाला प्रथम मन्त्र एवं रूप हैं; सौम्य एवं शीघ्र कृपा करने वाली, वे जपमाला एवं ज्ञान की पुस्तक धारण करती हैं और अभय एवं वर मुद्राएँ दिखाती हैं। यह श्लोक तान्त्रिक पूजा-पद्धतियों में सुरक्षित है और समस्त परम्परा में बाला के जप एवं पूजा के आरम्भ में पढ़ा जाता है।
Frequently Asked Questions
बालात्रिपुरसुन्दरी कौन हैं?▼
यह श्लोक क्या है?▼
इसका जप कब करना चाहिए?▼
जपमाला, पुस्तक एवं मुद्राओं का क्या अर्थ है?▼
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