श्रीमद्भगवद्गीता १२.६-७ — ये तु सर्वाणि कर्माणि — Complete Lyrics
श्रीमद्भगवद्गीता १२.६-७ — ये तु सर्वाणि कर्माणि
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः।
अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते॥
ye tu sarvāṇi karmāṇi mayi sannyasya mat-paraḥ
ananyenaiva yogena māṁ dhyāyanta upāsate
परन्तु जो भक्तजन मुझे ही परम लक्ष्य समझते हुए सब कर्मों को मुझे अर्पण करके अनन्य योग के द्वारा मेरा ही ध्यान करते और उपासना करते हैं — हे पार्थ! जिनका चित्त मुझमें ही स्थिर है, ऐसे भक्तों का मैं शीघ्र ही मृत्युरूप संसार-सागर से उद्धार करने वाला होता हूँ।।
Verse 2
तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्।
भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्॥
teṣhām ahaṁ samuddhartā mṛityu-saṁsāra-sāgarāt
bhavāmi na chirāt pārtha mayy āveśhita-chetasām
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