चामुण्डे विस्तीर्णं वदनं कुरु (रक्तबीज-वध) — Complete Lyrics
चामुण्डे विस्तीर्णं वदनं कुरु (रक्तबीज-वध)
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
रक्तबिन्दुर्यदा भूमौ पतत्यस्य शरीरतः ।
समुत्पतति मेदिन्यां तत्प्रमाणो महासुरः ॥
raktabinduryadā bhūmau patatyasya śarīrataḥ
samutpatati medinyāṃ tatpramāṇo mahāsuraḥ
जब-जब उसके शरीर से रक्त की एक बूँद भूमि पर गिरती, तब-तब पृथ्वी से उसी के बराबर का एक महान् असुर उत्पन्न हो जाता। देवताओं को विषण्ण देख चण्डिका ने हँसकर शीघ्र ही काली से कहा: 'हे चामुण्डे! अपना मुख विस्तृत करो! मेरे शस्त्र-प्रहार से उत्पन्न रक्त की बूँदों को, और रक्त की बूँदों से उत्पन्न महान् असुरों को, इस अपने वेगवान् मुख से ग्रहण करो। उससे उत्पन्न महान् असुरों को खाती हुई रणभूमि में विचरो; इस प्रकार यह दैत्य रक्तहीन होकर नाश को प्राप्त होगा।'
Verse 2
तान् विषण्णान् सुरान् दृष्ट्वा चण्डिका प्राहसत्वरम् ।
उवाच कालीं चामुण्डे विस्तीर्णं वदनं कुरु ॥
tān viṣaṇṇān surān dṛṣṭvā caṇḍikā prāhasatvaram
uvāca kālīṃ cāmuṇḍe vistīrṇaṃ vadanaṃ kuru
Verse 3
मच्छस्त्रपातसम्भूतान् रक्तबिन्दून् महासुरान् ।
रक्तबिन्दोः प्रतीच्छ त्वं वक्त्रेणानेन वेगिना ॥
macchastrapātasambhūtān raktabindūn mahāsurān
raktabindoḥ pratīccha tvaṃ vaktreṇānena veginā
Verse 4
भक्षयन्ती चरन् रणे तदुत्पन्नान्महासुरान् ।
एवमेष क्षयं दैत्यः क्षेणरक्तो गमिष्यति ॥
bhakṣayantī caran raṇe tadutpannānmahāsurān
evameṣa kṣayaṃ daityaḥ kṣeṇarakto gamiṣyati
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