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देवि प्रसीद परिपालय — Complete Lyrics

देवि प्रसीद परिपालय

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीते- र्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्
devi prasīda paripālaya no'ribhīte- rnityaṃ yathāsuravadhādadhunaiva sadyaḥ pāpāni sarvajagatāṃ praśamaṃ nayāśu utpātapākajanitāṃśca mahopasargān
हे देवी! प्रसन्न होइए; जैसे अभी असुर-वध से आपने हमारी रक्षा की, वैसे ही सदा हमें शत्रु-भय से बचाइए। और समस्त जगत् के पापों तथा उत्पातों से उत्पन्न महान् उपसर्गों को शीघ्र शान्त कीजिए।
Verse 2
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव
praṇatānāṃ prasīda tvaṃ devi viśvārtihāriṇi trailokyavāsināmīḍye lokānāṃ varadā bhava
हे विश्व की पीड़ा हरने वाली देवी! हम प्रणत जनों पर प्रसन्न होइए; हे त्रैलोक्य-निवासियों द्वारा वन्दनीय! लोकों को वर देने वाली बनिए!
Verse 3
देव्युवाच वरदाहं सुरगणा वरं यन्मनसेच्छथ तं वृणुध्वं प्रयच्छामि जगतामुपकारकम्
devyuvāca varadāhaṃ suragaṇā varaṃ yanmanasecchatha taṃ vṛṇudhvaṃ prayacchāmi jagatāmupakārakam
देवी बोलीं — हे देवगण! मैं वरदायिनी हूँ। मन से जो वर चाहते हो, वही माँग लो; जगत् का उपकार करने वाला वह वर मैं प्रदान करती हूँ।
Verse 4
देवा ऊचुः सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्
devā ūcuḥ sarvābādhāpraśamanaṃ trailokyasyākhileśvari evameva tvayā kāryamasmadvairivināśanam
देवता बोले — हे अखिलेश्वरी! त्रैलोक्य की समस्त बाधाओं का शमन और हमारे शत्रुओं का विनाश — यही आप सदा करती रहें।

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