धन्वन्तरि स्तोत्रम् — Complete Lyrics
धन्वन्तरि स्तोत्रम्
Sanskrit text with English transliteration and translation
ॐ शङ्खं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्भिः
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुकपरिविलसन्मौलिमम्भोजनेत्रम्।
कालाम्भोदोज्ज्वलाङ्गं कटितटविलसच्चारुपीताम्बराढ्यं
वन्दे धन्वन्तरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम्॥
Om Shankham Chakram Jalaukam Dadhad-Amrita-Ghatam Charu-Dorbhish-Chaturbhih
Sukshma-Svacchati-Hridyamshuka-Parivilasan-Maulim-Ambhoja-Netram
Kalambhodojjvalangam Kati-Tata-Vilasach-Charu-Pitambar-Adhyam
Vande Dhanvantarim Tam Nikhila-Gada-Vana-Praudha-Davagni-Lilam
ॐ। मैं भगवान धन्वन्तरि को प्रणाम करता हूँ, जो अपने चार सुन्दर हाथों में शंख, चक्र, जलौका (जोंक) और अमृत-कलश धारण करते हैं। उनका मस्तक अति सूक्ष्म, स्वच्छ एवं मनोहर वस्त्र के मुकुट से सुशोभित है और उनके नेत्र कमल के समान हैं। उनका तेजस्वी शरीर श्याम मेघ के समान उज्ज्वल है तथा कटि-प्रदेश सुन्दर पीताम्बर से सुशोभित है। वे समस्त रोगों के वन को भस्म करने वाली प्रचण्ड दावाग्नि की लीला करते हैं।
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