एकैवाहं जगत्यत्र (देवी की अद्वैत घोषणा) — Complete Lyrics
एकैवाहं जगत्यत्र (देवी की अद्वैत घोषणा)
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
देव्युवाच
एकैवाहं जगत्यत्र द्वितीया का ममापरा ।
पश्यैता दुष्ट मय्येव विशन्त्यो मद्विभूतयः ॥
devyuvāca
ekaivāhaṃ jagatyatra dvitīyā kā mamāparā
paśyaitā duṣṭa mayyeva viśantyo madvibhūtayaḥ
देवी बोलीं — 'इस जगत् में मैं अकेली ही हूँ; मेरे अतिरिक्त दूसरी कौन है? अरे दुष्ट! देख, ये मेरी विभूतियाँ मुझ में ही प्रवेश कर रही हैं!' तब ब्राह्मणी आदि वे समस्त देवियाँ उस देवी के शरीर में लीन हो गईं; तब अकेली अम्बिका ही शेष रहीं। देवी बोलीं — 'अपनी विभूति से जिन अनेक रूपों में मैं यहाँ स्थित थी, उन्हें मैंने समेट लिया है, और अब अकेली ही खड़ी हूँ। तू (युद्ध में) स्थिर हो जा!'
Verse 2
ततः समस्तास्ता देव्यो ब्रह्माणीप्रमुखा लयम् ।
तस्या देव्यास्तनौ जग्मुरेकैवासीत्तदाम्बिका ॥
tataḥ samastāstā devyo brahmāṇīpramukhā layam
tasyā devyāstanau jagmurekaivāsīttadāmbikā
Verse 3
देव्युवाच
अहं विभूत्या बहुभिरिह रूपैर्यदास्थिता ।
तत्संहृतं मयैकैव तिष्ठाम्याजौ स्थिरो भव ॥
devyuvāca
ahaṃ vibhūtyā bahubhiriha rūpairyadāsthitā
tatsaṃhṛtaṃ mayaikaiva tiṣṭhāmyājau sthiro bhava
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