एवं भगवती देवी सा नित्यापि — Complete Lyrics
एवं भगवती देवी सा नित्यापि
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
एवं भगवती देवी सा नित्यापि पुनः पुनः ।
सम्भूय कुरुते भूप जगतः परिपालनम् ॥
evaṃ bhagavatī devī sā nityāpi punaḥ punaḥ
sambhūya kurute bhūpa jagataḥ paripālanam
इस प्रकार वह भगवती देवी नित्या होने पर भी बार-बार प्रकट होकर जगत् का पालन करती हैं, हे राजन्।
Verse 2
तयैतन्मोह्यते विश्वं सैव विश्वं प्रसूयते ।
सा याचिता च विज्ञानं तुष्टा ऋद्धिं प्रयच्छति ॥
tayaitanmohyate viśvaṃ saiva viśvaṃ prasūyate
sā yācitā ca vijñānaṃ tuṣṭā ṛddhiṃ prayacchati
उन्हीं से यह विश्व मोहित होता है; वही विश्व को प्रकट करती हैं। प्रार्थना करने पर वे विज्ञान देती हैं, और प्रसन्न होने पर समृद्धि प्रदान करती हैं।
Verse 3
व्याप्तं तयैतत्सकलं ब्रह्माण्डं मनुजेश्वर ।
महादेव्या महाकाली महामारीस्वरूपया ॥
vyāptaṃ tayaitatsakalaṃ brahmāṇḍaṃ manujeśvara
mahādevyā mahākālī mahāmārīsvarūpayā
हे मनुजेश्वर! महाकाली और महामारी-स्वरूपा उन महादेवी से ही यह समस्त ब्रह्माण्ड व्याप्त है।
Verse 4
सैव काले महामारी सैव सृष्टिर्भवत्यजा ।
स्थितिं करोति भूतानां सैव काले सनातनी ॥
saiva kāle mahāmārī saiva sṛṣṭirbhavatyajā
sthitiṃ karoti bhūtānāṃ saiva kāle sanātanī
वही समय आने पर महामारी हैं, वही अजन्मा सृष्टि हैं; और वही सनातनी समय पर प्राणियों की स्थिति (पालन) करती हैं।
Verse 5
भवकाले नृणां सैव लक्ष्मीर्वृद्धिप्रदा गृहे ।
सैवाभावे तथालक्ष्मीर्विनाशायोपजायते ॥
bhavakāle nṛṇāṃ saiva lakṣmīrvṛddhipradā gṛhe
saivābhāve tathālakṣmīrvināśāyopajāyate
अभ्युदय के समय वे मनुष्यों के घर में वृद्धि देने वाली लक्ष्मी हैं; और अभाव (दुर्भाग्य) के समय वे ही अलक्ष्मी होकर विनाश के लिए प्रकट होती हैं।
Verse 6
स्तुता सम्पूजिता पुष्पैर्गन्धधूपादिभिस्तथा ।
ददाति वित्तं पुत्रांश्च मतिं धर्मे गतिं शुभाम् ॥
stutā sampūjitā puṣpairgandhadhūpādibhistathā
dadāti vittaṃ putrāṃśca matiṃ dharme gatiṃ śubhām
पुष्प, गन्ध, धूप आदि से स्तुति और पूजन किए जाने पर वे धन और पुत्र, धर्म में बुद्धि तथा शुभ गति प्रदान करती हैं।
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