गर्ज गर्ज क्षणं मूढ (देवी की ललकार और महिषासुर-वध) — Complete Lyrics
गर्ज गर्ज क्षणं मूढ (देवी की ललकार और महिषासुर-वध)
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
देव्युवाच
गर्ज गर्ज क्षणं मूढ मधु यावत्पिबाम्यहम् ।
मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ॥
devyuvāca
garja garja kṣaṇaṃ mūḍha madhu yāvatpibāmyaham
mayā tvayi hate'traiva garjiṣyantyāśu devatāḥ
देवी बोलीं — 'अरे मूढ़! क्षण भर गरज ले, गरज ले, जब तक मैं यह मधु पी रही हूँ। जब मैं तुझे यहीं मार डालूँगी, तब शीघ्र ही देवता गरजेंगे।' ऋषि बोले — ऐसा कहकर देवी ने उछलकर उस महान् असुर पर चढ़कर, अपने चरण से उसका कण्ठ दबाकर उसे त्रिशूल से मारा। तब देवी के चरण से दबा हुआ वह अपने (भैंसे के) मुख से आधा ही बाहर निकल पाया था कि देवी के पराक्रम से पूरी तरह घिर गया। इस प्रकार आधा ही निकला हुआ, युद्ध करता वह महान् असुर देवी द्वारा महाखड्ग से सिर काटकर गिरा दिया गया।
Verse 2
ऋषिरुवाच
एवमुक्त्वा समुत्पत्य सारूढा तं महासुरम् ।
पादेनाक्रम्य कण्ठे च शूलेनैनमताडयत् ॥
ṛṣiruvāca
evamuktvā samutpatya sārūḍhā taṃ mahāsuram
pādenākramya kaṇṭhe ca śūlenainamatāḍayat
Verse 3
ततः सोऽपि पदाक्रान्तस्तया निजमुखात्तदा ।
अर्धनिष्क्रान्त एवासीद्देव्या वीर्येण संवृतः ॥
tataḥ so'pi padākrāntastayā nijamukhāttadā
ardhaniṣkrānta evāsīddevyā vīryeṇa saṃvṛtaḥ
Verse 4
अर्धनिष्क्रान्त एवासौ युध्यमानो महासुरः ।
तया महासिना देव्या शिरश्छित्त्वा निपातितः ॥
ardhaniṣkrānta evāsau yudhyamāno mahāsuraḥ
tayā mahāsinā devyā śiraśchittvā nipātitaḥ
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