गर्ज गर्ज क्षणं मूढ (देवी की ललकार और महिषासुर-वध) — Word-by-Word Meaning
गर्ज गर्ज क्षणं मूढ (देवी की ललकार और महिषासुर-वध)
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
देव्युवाच
devyuvāca
देवी (भगवती) बोलीं
गर्ज गर्ज
garja garja
गरज, गरज (खूब गरज ले)
क्षणम्
kṣaṇam
क्षण भर
मूढ
mūḍha
अरे मूढ़, अरे मूर्ख
मधु यावत् पिबामि अहम्
madhu yāvat pibāmi aham
जब तक मैं यह मधु (मदिरा) पी रही हूँ
मया त्वयि हते
mayā tvayi hate
जब मैं तुझे मार डालूँगी
अत्र एव
atra eva
यहीं, इसी स्थान पर
गर्जिष्यन्ति आशु देवताः
garjiṣyanti āśu devatāḥ
देवता शीघ्र ही गरजेंगे (विजय में)
ऋषिरुवाच
ṛṣiruvāca
ऋषि (मुनि) बोले
एवम् उक्त्वा समुत्पत्य
evam uktvā samutpatya
ऐसा कहकर, उछलकर
सारूढा तं महासुरम्
sārūḍhā taṃ mahāsuram
उस महान् असुर पर चढ़कर
पादेन आक्रम्य कण्ठे
pādena ākramya kaṇṭhe
अपने चरण से उसका कण्ठ दबाकर
शूलेन एनम् अताडयत्
śūlena enam atāḍayat
त्रिशूल से उसे मारा
अर्धनिष्क्रान्तः
ardha-niṣkrāntaḥ
(भैंसे के मुख से) आधा ही बाहर निकला हुआ
महासिना शिरः छित्त्वा निपातितः
mahāsinā śiraḥ chittvā nipātitaḥ
महाखड्ग से सिर काटकर गिरा दिया गया
Complete Translation
देवी बोलीं — 'अरे मूढ़! क्षण भर गरज ले, गरज ले, जब तक मैं यह मधु पी रही हूँ। जब मैं तुझे यहीं मार डालूँगी, तब शीघ्र ही देवता गरजेंगे।' ऋषि बोले — ऐसा कहकर देवी ने उछलकर उस महान् असुर पर चढ़कर, अपने चरण से उसका कण्ठ दबाकर उसे त्रिशूल से मारा। तब देवी के चरण से दबा हुआ वह अपने (भैंसे के) मुख से आधा ही बाहर निकल पाया था कि देवी के पराक्रम से पूरी तरह घिर गया। इस प्रकार आधा ही निकला हुआ, युद्ध करता वह महान् असुर देवी द्वारा महाखड्ग से सिर काटकर गिरा दिया गया।
Origin & History
Source: Durga Saptashati Chapter 3
Author: Sage Markandeya (Markandeya Purana)
Period: c. 400–600 CE (Markandeya Purana)
देवी द्वारा महिषासुर की विशाल सेनाओं और उसके सेनापतियों का संहार करने के पश्चात्, स्वयं महिषासुर भैंसे, सिंह, मनुष्य और हाथी के बीच बार-बार रूप बदलते हुए देवी पर टूट पड़ा। युद्ध में मत्त देवी ने दिव्य मधु पान किया, अपनी निर्भय ललकार दी, और अन्ततः उसे चरण से दबाकर तथा जब वह अपने भैंसे रूप से निकलने का प्रयत्न कर रहा था तभी उसका सिर काटकर असुरों के सौ वर्ष के अत्याचार का अन्त किया।
Frequently Asked Questions
ये श्लोक किस घटना का वर्णन करते हैं?▼
ये भैंसे रूप के असुर महिषासुर के अन्तिम वध का वर्णन करते हैं। देवी उसे ललकारती हैं कि जब तक वह गरज सकता है गरज ले, फिर उस पर उछल पड़ती हैं, चरण से उसका कण्ठ दबाती हैं, त्रिशूल से प्रहार करती हैं और जब वह आधा ही भैंसे के रूप से बाहर निकला होता है तब खड्ग से उसका सिर काट देती हैं।
देवी असुर से 'गरज' क्यों कहती हैं?▼
महिषासुर अपने बल के अहंकार में बार-बार रूप बदलते हुए डींग मारता और गरजता रहा था। देवी के शब्द 'गरज, गरज ले, अरे मूढ़' एक निर्भय ललकार हैं जो घोषणा करती हैं कि उसका अहंकार अब समाप्त होने वाला है और देवता शीघ्र ही उसकी मृत्यु पर विजय में गरजेंगे।
यह महिषासुरमर्दिनी से कैसे जुड़ा है?▼
यही वह कृत्य है जिससे देवी को महिषासुरमर्दिनी अर्थात् 'महिषासुर की संहारिणी' की उपाधि मिलती है। प्रसिद्ध महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र (अयि गिरिनन्दिनि) उसी विजय का गुणगान करता है जो दुर्गा सप्तशती के तृतीय अध्याय में वर्णित है।
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