गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् Meaning — Line by Line
गोविन्द दामोदर स्तोत्रम्
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
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- Verse 1. agre kurūṇām atha pāṇḍavānāṃ
- Verse 2. śrī-kṛṣṇa viṣṇo madhu-kaiṭabhāre
- Verse 3. vikretu-kāmā kila gopa-kanyā
- Verse 4. ulūkhale sambhṛta-taṇḍulāṃś ca
- Verse 5. kācit karāmbhoja-puṭe niṣaṇṇaṃ
- Verse 6. gṛhe gṛhe gopa-vadhū-samūhaḥ
- Verse 7. jihve rasa-jñe madhura-priyā tvaṃ
- Verse 8. sukhāvasāne tv idam eva sāraṃ
agre kurūṇām atha pāṇḍavānāṃ
अग्रे कुरूणामथ पाण्डवानां दुःशासनेनाहृतवस्त्रकेशा। कृष्णा तदाक्रोशदनन्यनाथा गोविन्द दामोदर माधवेति॥
agre kurūṇām atha pāṇḍavānāṃ duḥśāsanenāhṛta-vastra-keśā | kṛṣṇā tadākrośad ananya-nāthā govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaningकौरवों और पाण्डवों की सभा में जब दुःशासन ने द्रौपदी के वस्त्र और केश खींचे, तब अनन्यनाथा द्रौपदी पुकार उठी — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'
śrī-kṛṣṇa viṣṇo madhu-kaiṭabhāre
श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे। त्रायस्व मां केशव लोकनाथ गोविन्द दामोदर माधवेति॥
śrī-kṛṣṇa viṣṇo madhu-kaiṭabhāre bhaktānukampin bhagavan murāre | trāyasva māṃ keśava loka-nātha govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaning'हे श्रीकृष्ण! हे विष्णु! हे मधु-कैटभ के शत्रु! हे भक्तवत्सल! हे भगवन्! हे मुरारे! हे केशव, हे लोकनाथ, मेरी रक्षा करो — गोविन्द, दामोदर, माधव!'
vikretu-kāmā kila gopa-kanyā
विक्रेतुकामा किल गोपकन्या मुरारिपादार्पितचित्तवृत्तिः। दध्यादिकं मोहवशादवोचद् गोविन्द दामोदर माधवेति॥
vikretu-kāmā kila gopa-kanyā murāri-pādārpita-citta-vṛttiḥ | dadhy-ādikaṃ moha-vaśād avocad govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaningएक गोपकन्या, जो दही आदि बेचना चाहती थी, उसका चित्त मुरारि के चरणों में लीन था; प्रेम-मोह में वह अपने सामान के स्थान पर पुकार उठी — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'
ulūkhale sambhṛta-taṇḍulāṃś ca
उलूखले सम्भृततण्डुलांश्च सङ्घट्टयन्त्यो मुसलैः प्रमुग्धाः। गायन्ति गोप्यो जनितानुरागा गोविन्द दामोदर माधवेति॥
ulūkhale sambhṛta-taṇḍulāṃś ca saṅghaṭṭayantyo musalaiḥ pramugdhāḥ | gāyanti gopyo janitānurāgā govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaningऊखल में एकत्र चावल को मूसल से कूटती हुई मुग्ध गोपियाँ अनुराग से भरकर गाती हैं — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'
kācit karāmbhoja-puṭe niṣaṇṇaṃ
काचित्करांभोजपुटे निषण्णं क्रीडाशुकं किंशुकरक्ततुण्डम्। अध्यापयामास सरोरुहाक्षी गोविन्द दामोदर माधवेति॥
kācit karāmbhoja-puṭe niṣaṇṇaṃ krīḍā-śukaṃ kiṃśuka-rakta-tuṇḍam | adhyāpayām āsa saroruhākṣī govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaningएक कमलनयनी ने अपने कर-कमलों में बैठे, किंशुक-पुष्प के समान लाल चोंच वाले क्रीड़ा-शुक को यही पढ़ाया — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'
gṛhe gṛhe gopa-vadhū-samūhaḥ
गृहे गृहे गोपवधूसमूहः प्रतिक्षणं पिञ्जरसारिकाणाम्। स्खलद्गिरं वाचयितुं प्रवृत्तो गोविन्द दामोदर माधवेति॥
gṛhe gṛhe gopa-vadhū-samūhaḥ prati-kṣaṇaṃ piñjara-sārikāṇām | skhalad-giraṃ vācayituṃ pravṛtto govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaningघर-घर में गोप-वधुओं का समूह प्रतिक्षण अपनी पिंजरे की सारिकाओं को रुक-रुककर यही बोलना सिखाने में लगा रहता है — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'
jihve rasa-jñe madhura-priyā tvaṃ
जिह्वे रसज्ञे मधुरप्रिया त्वं सत्यं हितं त्वां परमं वदामि। आवर्णयेथा मधुराक्षराणि गोविन्द दामोदर माधवेति॥
jihve rasa-jñe madhura-priyā tvaṃ satyaṃ hitaṃ tvāṃ paramaṃ vadāmi | āvarṇayethā madhurākṣarāṇi govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaningहे रस को जानने वाली जिह्वा! तू मधुर की प्रेमी है; मैं तुझे सच्चा और परम हितकारी वचन कहता हूँ — इन मधुर अक्षरों का बारम्बार उच्चारण कर — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'
sukhāvasāne tv idam eva sāraṃ
सुखावसाने त्विदमेव सारं दुःखावसाने त्विदमेव गेयम्। देहावसाने त्विदमेव जाप्यं गोविन्द दामोदर माधवेति॥
sukhāvasāne tv idam eva sāraṃ duḥkhāvasāne tv idam eva geyam | dehāvasāne tv idam eva jāpyaṃ govinda dāmodara mādhaveti ||
Meaningसुख के अन्त में यही सार है, दुःख के अन्त में यही गाने योग्य है, और देह के अन्त (मृत्यु) में यही जपने योग्य है — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Govinda Damodara Stotra (independent Vaishnava devotional work)
Author: Bilvamangala Thakura (Lila Shuka)
Period: Medieval (c. 13th–14th century CE)
बिल्वमंगल ठाकुर, जिन्हें लीला शुक भी कहा जाता है, कृष्ण के प्रेम में पूर्णतः लीन एक सन्त-कवि थे और कृष्ण-कर्णामृत के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध थे। गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् भगवान के पवित्र नामों पर रचित उनकी श्लोक-माला है। महाभारत के द्रौपदी-रक्षा प्रसंग और व्रज की गोपवधुओं के दैनिक जीवन से प्रेरणा लेकर वे दर्शाते हैं कि 'गोविन्द, दामोदर, माधव' नाम भक्तों के होठों से स्वतः प्रस्फुटित होते हैं, और जिह्वा को इन मधुरतम अक्षरों का सदा रसास्वादन करने की प्रेरणा देते हैं।
Frequently Asked Questions
गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् क्या है?▼
गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् की रचना किसने की?▼
गोविन्द, दामोदर और माधव नामों का अर्थ क्या है?▼
यह स्तोत्र मृत्यु के समय से क्यों जुड़ा है?▼
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