Mantra.Tips
krishnagovindadamodaramadhava

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः अथवा सायंकाल; विशेषकर एकादशी, जन्माष्टमी एवं सम्पूर्ण कार्तिक (दामोदर) मास में·📜 Govinda Damodara Stotra (independent Vaishnava devotional work)

अन्य नाम / खोज: govinda damodara stotram · govinda damodara madhaveti · govinda damodara madhava · agre kurunam atha pandavanam · bilvamangala govinda damodara stotra

Share:

अर्थ

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् भगवान कृष्ण का एक प्रसिद्ध भक्ति-स्तोत्र है, जिसका प्रत्येक श्लोक 'गोविन्द दामोदर माधवेति' इस मधुर टेक से समाप्त होता है। महान भक्त-कवि बिल्वमंगल ठाकुर (लीला शुक) द्वारा रचित यह स्तोत्र अनेक सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करता है — द्रौपदी की पुकार, गोपकन्याएँ, यहाँ तक कि पालतू तोते और मैनाएँ भी — सब इन तीन पवित्र नामों को पुकारते हैं। इसका सन्देश है कि कृष्ण-नाम ही जीवन का सार और मृत्यु के समय जपने योग्य परम वस्तु है।

उत्पत्ति और कथा

Govinda Damodara Stotra (independent Vaishnava devotional work) · Bilvamangala Thakura (Lila Shuka) · Medieval (c. 13th–14th century CE)

बिल्वमंगल ठाकुर, जिन्हें लीला शुक भी कहा जाता है, कृष्ण के प्रेम में पूर्णतः लीन एक सन्त-कवि थे और कृष्ण-कर्णामृत के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध थे। गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् भगवान के पवित्र नामों पर रचित उनकी श्लोक-माला है। महाभारत के द्रौपदी-रक्षा प्रसंग और व्रज की गोपवधुओं के दैनिक जीवन से प्रेरणा लेकर वे दर्शाते हैं कि 'गोविन्द, दामोदर, माधव' नाम भक्तों के होठों से स्वतः प्रस्फुटित होते हैं, और जिह्वा को इन मधुरतम अक्षरों का सदा रसास्वादन करने की प्रेरणा देते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

आरम्भिक श्लोक स्मरण कराता है कि कुरु-सभा में जब दुःशासन द्रौपदी का चीरहरण कर रहा था और उसका कोई अन्य रक्षक न था, तब उसने 'गोविन्द! दामोदर! माधव!' पुकारा — और भगवान ने चमत्कारिक रूप से अनन्त वस्त्र प्रदान किए, जिससे वह कभी निर्वस्त्र न हो सकी। भक्त इसे प्रमाण मानते हैं कि विपत्ति में इन नामों को सच्चे हृदय से पुकारना भगवान की तत्काल रक्षा लाता है।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

अग्रे कुरूणामथ पाण्डवानां दुःशासनेनाहृतवस्त्रकेशा। कृष्णा तदाक्रोशदनन्यनाथा गोविन्द दामोदर माधवेति॥

agre kurūṇām atha pāṇḍavānāṃ duḥśāsanenāhṛta-vastra-keśā | kṛṣṇā tadākrośad ananya-nāthā govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:कौरवों और पाण्डवों की सभा में जब दुःशासन ने द्रौपदी के वस्त्र और केश खींचे, तब अनन्यनाथा द्रौपदी पुकार उठी — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'

श्लोक 2

श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे। त्रायस्व मां केशव लोकनाथ गोविन्द दामोदर माधवेति॥

śrī-kṛṣṇa viṣṇo madhu-kaiṭabhāre bhaktānukampin bhagavan murāre | trāyasva māṃ keśava loka-nātha govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:'हे श्रीकृष्ण! हे विष्णु! हे मधु-कैटभ के शत्रु! हे भक्तवत्सल! हे भगवन्! हे मुरारे! हे केशव, हे लोकनाथ, मेरी रक्षा करो — गोविन्द, दामोदर, माधव!'

श्लोक 3

विक्रेतुकामा किल गोपकन्या मुरारिपादार्पितचित्तवृत्तिः। दध्यादिकं मोहवशादवोचद् गोविन्द दामोदर माधवेति॥

vikretu-kāmā kila gopa-kanyā murāri-pādārpita-citta-vṛttiḥ | dadhy-ādikaṃ moha-vaśād avocad govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:एक गोपकन्या, जो दही आदि बेचना चाहती थी, उसका चित्त मुरारि के चरणों में लीन था; प्रेम-मोह में वह अपने सामान के स्थान पर पुकार उठी — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'

श्लोक 4

उलूखले सम्भृततण्डुलांश्च सङ्घट्टयन्त्यो मुसलैः प्रमुग्धाः। गायन्ति गोप्यो जनितानुरागा गोविन्द दामोदर माधवेति॥

ulūkhale sambhṛta-taṇḍulāṃś ca saṅghaṭṭayantyo musalaiḥ pramugdhāḥ | gāyanti gopyo janitānurāgā govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:ऊखल में एकत्र चावल को मूसल से कूटती हुई मुग्ध गोपियाँ अनुराग से भरकर गाती हैं — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'

श्लोक 5

काचित्करांभोजपुटे निषण्णं क्रीडाशुकं किंशुकरक्ततुण्डम्। अध्यापयामास सरोरुहाक्षी गोविन्द दामोदर माधवेति॥

kācit karāmbhoja-puṭe niṣaṇṇaṃ krīḍā-śukaṃ kiṃśuka-rakta-tuṇḍam | adhyāpayām āsa saroruhākṣī govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:एक कमलनयनी ने अपने कर-कमलों में बैठे, किंशुक-पुष्प के समान लाल चोंच वाले क्रीड़ा-शुक को यही पढ़ाया — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'

श्लोक 6

गृहे गृहे गोपवधूसमूहः प्रतिक्षणं पिञ्जरसारिकाणाम्। स्खलद्गिरं वाचयितुं प्रवृत्तो गोविन्द दामोदर माधवेति॥

gṛhe gṛhe gopa-vadhū-samūhaḥ prati-kṣaṇaṃ piñjara-sārikāṇām | skhalad-giraṃ vācayituṃ pravṛtto govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:घर-घर में गोप-वधुओं का समूह प्रतिक्षण अपनी पिंजरे की सारिकाओं को रुक-रुककर यही बोलना सिखाने में लगा रहता है — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'

श्लोक 7

जिह्वे रसज्ञे मधुरप्रिया त्वं सत्यं हितं त्वां परमं वदामि। आवर्णयेथा मधुराक्षराणि गोविन्द दामोदर माधवेति॥

jihve rasa-jñe madhura-priyā tvaṃ satyaṃ hitaṃ tvāṃ paramaṃ vadāmi | āvarṇayethā madhurākṣarāṇi govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:हे रस को जानने वाली जिह्वा! तू मधुर की प्रेमी है; मैं तुझे सच्चा और परम हितकारी वचन कहता हूँ — इन मधुर अक्षरों का बारम्बार उच्चारण कर — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'

श्लोक 8

सुखावसाने त्विदमेव सारं दुःखावसाने त्विदमेव गेयम्। देहावसाने त्विदमेव जाप्यं गोविन्द दामोदर माधवेति॥

sukhāvasāne tv idam eva sāraṃ duḥkhāvasāne tv idam eva geyam | dehāvasāne tv idam eva jāpyaṃ govinda dāmodara mādhaveti ||

अर्थ:सुख के अन्त में यही सार है, दुःख के अन्त में यही गाने योग्य है, और देह के अन्त (मृत्यु) में यही जपने योग्य है — 'गोविन्द! दामोदर! माधव!'

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

गोविन्द🔊govindaगोविन्द — गौओं एवं इन्द्रियों के रक्षक; पृथ्वी, गौओं एवं वेदों को आनन्द देने वाले
दामोदर🔊dāmodaraदामोदर — जिनकी कमर (उदर) में माता यशोदा ने रस्सी (दाम) बाँधी
माधव🔊mādhavaमाधव — लक्ष्मी (मा) के पति (धव); मधु के वंशज; मधुर स्वरूप
इति🔊itiइस प्रकार (इन नामों को पुकारते हुए) — प्रत्येक श्लोक में दोहराई जाने वाली टेक
अग्रे कुरूणाम्🔊agre kurūṇāmकुरुओं के समक्ष (कौरव सभा में)
दुःशासनेन🔊duḥśāsanenaदुःशासन द्वारा (जिसने द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा)
आहृतवस्त्रकेशा🔊āhṛta-vastra-keśāजिनके वस्त्र और केश खींचे गए
कृष्णा🔊kṛṣṇāकृष्णा (द्रौपदी)
अनन्यनाथा🔊ananya-nāthāजिनका कोई अन्य नाथ नहीं (भगवान के अतिरिक्त)
आक्रोशत्🔊ākrośatऊँचे स्वर में पुकार उठी (विपत्ति में)
मधुकैटभारे🔊madhu-kaiṭabhāreहे मधु एवं कैटभ दैत्यों के शत्रु
भक्तानुकम्पिन्🔊bhaktānukampinहे भक्तों पर अनुकम्पा करने वाले
मुरारे🔊murāreहे मुरारे — मुर दैत्य के शत्रु
त्रायस्व माम्🔊trāyasva māmमेरी रक्षा करो, मुझे बचाओ
केशव लोकनाथ🔊keśava loka-nāthaहे केशव, हे समस्त लोकों के नाथ
गोपकन्या🔊gopa-kanyāगोपकन्या
दध्यादिकम्🔊dadhy-ādikamदही (और बेचने योग्य अन्य सामान)
जिह्वे रसज्ञे🔊jihve rasa-jñeहे रस को जानने वाली जिह्वा
मधुराक्षराणि🔊madhurākṣarāṇiमधुर अक्षर (पवित्र नामों के)
सुखावसाने🔊sukhāvasāneसुख के अन्त में
दुःखावसाने🔊duḥkhāvasāneदुःख के अन्त में
देहावसाने जाप्यम्🔊dehāvasāne jāpyamदेह के अन्त (मृत्यु) में, यही जपने योग्य है

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् पाठ के लाभ

हृदय और जिह्वा को गोविन्द, दामोदर एवं माधव इन मधुर पवित्र नामों से भर देता है

निरन्तर नाम-स्मरण (भगवान के नामों के स्मरण) की आदत स्थापित करता है

विपत्ति के समय कृष्ण की रक्षा का आह्वान करता है, जैसे द्रौपदी की रक्षा हुई

आनन्दपूर्ण पुनरावृत्ति द्वारा प्रेम-भक्ति विकसित करता है

मृत्यु के समय शुभ प्रयाण हेतु जपने योग्य परम वस्तु कही जाती है

सुख एवं दुःख दोनों के अन्त में शान्ति लाकर मन को भगवान में स्थिर करता है

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः अथवा सायंकाल; विशेषकर एकादशी, जन्माष्टमी एवं सम्पूर्ण कार्तिक (दामोदर) मास में

भगवान कृष्ण की प्रतिमा के सम्मुख सुखपूर्वक बैठें और श्लोकों का मधुर स्वर में पाठ करें, प्रत्येक श्लोक के अन्त में 'गोविन्द दामोदर माधवेति' इस टेक को गुँजाते हुए। यह स्तोत्र कीर्तन के लिए आदर्श है और इसे अकेले या समूह में ऊँचे स्वर में गाया जा सकता है। अनेक भक्त इसका नित्य पाठ करते हैं और विशेषकर कार्तिक मास में इसे होठों पर रखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह भगवान कृष्ण का एक भक्ति-स्तोत्र है, जिसका प्रत्येक श्लोक 'गोविन्द दामोदर माधवेति' इस टेक से समाप्त होता है — गोविन्द, दामोदर और माधव ये तीन मधुर नाम। यह कृष्ण के पवित्र नामों के जप की महिमा का गान करता है।
यह परम्परागत रूप से बिल्वमंगल ठाकुर को समर्पित है, जिन्हें लीला शुक भी कहा जाता है — कृष्ण-भक्ति के प्रसिद्ध मध्यकालीन सन्त-कवि एवं कृष्ण-कर्णामृत के रचयिता।
गोविन्द का अर्थ है गौओं एवं इन्द्रियों के रक्षक; दामोदर का अर्थ है जिनकी कमर में माता यशोदा ने रस्सी बाँधी; माधव का अर्थ है लक्ष्मी के पति एवं मधु के वंशज। ये मिलकर कृष्ण की मधुरता एवं श्रेष्ठता का बोध कराते हैं।
इसका समापन श्लोक सिखाता है कि सुख के अन्त में, दुःख के अन्त में और जीवन के अन्त में भी एकमात्र आवश्यक वस्तु 'गोविन्द दामोदर माधव' का गान एवं जप है। मृत्यु के समय भगवान का स्मरण परम गति प्रदान करने वाला माना जाता है।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides