दामोदराष्टकम्
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✦ अर्थ
दामोदराष्टकम् कृष्ण के दामोदर रूप — जिनकी कमर माता यशोदा ने रस्सी से बाँधी — की प्रिय आठ श्लोकों की स्तुति है। यह विशेषतः कार्तिक (दामोदर) मास भर गाई जाती है। यह उन प्रभु को वंदन करती है जो अपने भक्तों के प्रेम से बँध जाते हैं, और भक्ति, शान्ति तथा रक्षा प्रदान करती है।
उत्पत्ति और कथा
Padma Purana · Satyavrata Muni (Padma Purana) · Puranic
दामोदराष्टकम् परम्परागत रूप से सत्यव्रत मुनि (पद्म पुराण) को आरोपित है। यह कृष्ण के दामोदर रूप — जिनकी कमर माता यशोदा ने रस्सी से बाँधी — की प्रिय आठ श्लोकों की स्तुति है। विशेषतः कार्तिक (दामोदर) मास भर गाई जाती है, यह उन प्रभु को वंदन करती है जो भक्तों के प्रेम से बँध जाते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से दामोदराष्टकम् का पाठ करना भगवान की कृपा के निकट जाना है, जो प्रेम से उन्हें पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागते।
मंत्र
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दामोदराय कृष्णाय करे वंशीधराय च । उदरे दामबद्धाय बालकृष्णाय ते नमः ॥ १॥ उलूखलेन सम्बद्ध उदरेऽपि च बन्धनम् । मुक्तिदाता स्वयं बद्ध अन्यान् लोकान् विमुक्तये ॥ २॥ यमलार्जुनयोत्पाट्य नलकूवर मुक्तये । मणिग्रीवाय मोक्षञ्च ददन्तं तं नमाम्यहम् ॥ ३॥ रिङ्गयञ्च समागच्छन्नङ्गणे यशोदाग्रतः । पालायन परं देवं दामोदरं नमाम्यहम् ॥ ४॥ उलूखलोपर्य्यारुह्य नवनीतञ्चभुञ्जयन् । मर्कटान्नपि दत्तं तं बालकृष्णं नमाम्यहम् ॥ ५॥ दधिभाण्डं खण्डयित्वा पलायित्वा गतोऽन्यतः । नवनीतञ्चौरकं तं दामोदरं नमाम्यहम् ॥ ६॥ दामोदरेति नामस्तु लोकान् मुक्ति प्रदायकम् । तेन तं संस्मरेन्नित्यं भवबन्ध विमुक्तये ॥ ७॥ यशोदा यष्टिकां धृत्त्वा भीषयन्ती भयापहम् । भयभीताय कृष्णाय दामोदरायते नमः ॥ ८॥ दामोदराष्टकं नित्यं ये पठन्ति नरा भुवि । ते भवबन्ध निर्मुक्ता यान्ति तं परमं पदम् ॥ ९॥ इति श्री स्वामी उमेश्वरानन्दतीर्थविरचितं दामोदराष्टकं सम्पूर्णम् । ।
dāmodarāya kṛṣṇāya kare vaṃśīdharāya ca | udare dāmabaddhāya bālakṛṣṇāya te namaḥ || 1|| ulūkhalena sambaddha udare'pi ca bandhanam | muktidātā svayaṃ baddha anyān lokān vimuktaye || 2|| yamalārjunayotpāṭya nalakūvara muktaye | maṇigrīvāya mokṣañca dadantaṃ taṃ namāmyaham || 3|| riṅgayañca samāgacchannaṅgaṇe yaśodāgrataḥ | pālāyana paraṃ devaṃ dāmodaraṃ namāmyaham || 4|| ulūkhaloparyyāruhya navanītañcabhuñjayan | markaṭānnapi dattaṃ taṃ bālakṛṣṇaṃ namāmyaham || 5|| dadhibhāṇḍaṃ khaṇḍayitvā palāyitvā gato'nyataḥ | navanītañcaurakaṃ taṃ dāmodaraṃ namāmyaham || 6|| dāmodareti nāmastu lokān mukti pradāyakam | tena taṃ saṃsmarennityaṃ bhavabandha vimuktaye || 7|| yaśodā yaṣṭikāṃ dhṛttvā bhīṣayantī bhayāpaham | bhayabhītāya kṛṣṇāya dāmodarāyate namaḥ || 8|| dāmodarāṣṭakaṃ nityaṃ ye paṭhanti narā bhuvi | te bhavabandha nirmuktā yānti taṃ paramaṃ padam || 9|| iti śrī svāmī umeśvarānandatīrthaviracitaṃ dāmodarāṣṭakaṃ sampūrṇam | |
अर्थ:कृष्ण के दामोदर रूप — जिनकी कमर माता यशोदा ने रस्सी से बाँधी — की प्रिय आठ श्लोकों की स्तुति। विशेषतः कार्तिक (दामोदर) मास भर गाई जाती है, यह उन प्रभु को वंदन करती है जो भक्तों के प्रेम से बँध जाते हैं।
दामोदराष्टकम् पाठ के लाभ
दामोदराष्टकम् का पाठ भगवान की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।
भक्ति को बढ़ाता है, मन को शान्त करता है और हृदय को भगवान के स्मरण में स्थिर करता है।
बुधवार और एकादशी को, तथा जन्माष्टमी और एकादशी पर सर्वाधिक शुभ।
एक छोटा, मधुर स्तोत्र जिसे कोई भी सीखकर श्रद्धापूर्वक प्रतिदिन पढ़ सकता है।
दामोदराष्टकम् जप विधि
स्नान करके पूर्व की ओर मुख करके देवता की प्रतिमा के सम्मुख बैठें। दीप जलाएँ और दामोदराष्टकम् का धीरे-धीरे, श्रद्धापूर्वक पाठ करें। इसे प्रतिदिन, अथवा विशेषतः जन्माष्टमी और एकादशी पर पढ़ा जा सकता है। अन्त में कृपा और रक्षा की प्रार्थना से समापन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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