जय राधा माधव Meaning — Line by Line
जय राधा माधव
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
Every verse of जय राधा माधव with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.
(jaya) rādhā-mādhava (jaya) kuñja-bihārī
(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी । (जय) गोपी-जन-वल्लभ (जय) गिरि-वर-धारी ॥
(jaya) rādhā-mādhava (jaya) kuñja-bihārī (jaya) gopī-jana-vallabha (jaya) giri-vara-dhārī
Meaningराधा-माधव (राधा के प्रियतम श्रीकृष्ण) की जय हो! वृन्दावन की कुंजों में विहार करने वाले की जय हो! गोपियों के प्रियतम की जय हो! गोवर्धन गिरि को धारण करने वाले की जय हो!
(jaya) yaśodā-nandana (jaya) braja-jana-rañjana
(जय) यशोदा-नन्दन (जय) ब्रज-जन-रञ्जन । (जय) यमुना-तीर-वन-चारी ॥
(jaya) yaśodā-nandana (jaya) braja-jana-rañjana (jaya) yamunā-tīra-vana-cārī
Meaningयशोदा के लाडले नन्दन की जय हो! ब्रजवासियों को आनन्दित करने वाले की जय हो! यमुना के तट के वनों में विचरण करने वाले की जय हो!
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Gitavali by Srila Bhaktivinoda Thakura
Author: Srila Bhaktivinoda Thakura
Period: Late 19th century CE
जय राधा-माधव की रचना अग्रणी गौड़ीय वैष्णव संत श्रील भक्तिविनोद ठाकुर ने की, और यह उनकी प्रसिद्ध भजन-पुस्तिका गीतावली का अंग है। मात्र दो छोटी पंक्तियों का होते हुए भी यह वृन्दावन के सम्पूर्ण सार और परिदृश्य को समेट लेता है: कृष्ण राधा के प्रियतम, कुंजों के क्रीड़ाशील स्वामी, गोपियों के प्रिय, गोवर्धनधारी, यशोदानन्दन, समस्त ब्रज के आनन्द और यमुना के तट के विहारी। यह विश्व भर के सर्वाधिक लोकप्रिय वैष्णव भजनों में से एक बन गया, विशेष रूप से तब जब श्रील प्रभुपाद ने इसे अपने प्रवचनों की नियमित प्रस्तावना बना लिया।
Frequently Asked Questions
जय राधा-माधव क्या है?▼
जय राधा-माधव किसने रचा?▼
यह भजन श्रील प्रभुपाद को इतना प्रिय क्यों था?▼
'राधा-माधव' का क्या अर्थ है?▼
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