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अदिवो अल्लदिवो PDF

अदिवो अल्लदिवो की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

अदिवो अल्लदिवो श्री हरि वासमु पदिवेल शेषुल पडगल मयमु ॥

adivō alladivō śrī hari vāsamu padivēla śēṣula paḍagala mayamu ॥

वह देखो — वह रहा! — श्री हरि का निवास, आदिशेष के दस हज़ार फणों से दमकता हुआ। (तिरुमला के प्रथम दर्शन पर तीर्थयात्री आनंद से पुकार उठता है।)

अदॆ वेङ्कटाचल मखिलोन्नतमु अदिवो ब्रह्मादुल कपुरूपमु । अदिवो नित्यनिवास मखिल मुनुलकु अदॆ चूडु डदॆ मॊक्कु डानन्दमयमु ॥ अदिवो अल्लदिवो श्री हरि वासमु पदिवेल शेषुल पडगल मयमु ॥

ade vēṅkaṭācala makhilōnnatamu adivō brahmādula kapurūpamu । adivō nityanivāsa makhila munulaku ade cūḍu ḍade mokku ḍānandamayamu ॥ adivō alladivō śrī hari vāsamu padivēla śēṣula paḍagala mayamu ॥

वही है वेंकटाचल — सबसे उन्नत, ऐसा अद्भुत पर्वत कि ब्रह्मा आदि देवताओं के लिए भी अनुपम है। वह समस्त मुनियों का नित्य निवास है; उसे देखो, उसे प्रणाम करो — वह आनंदमय है। वह रहा श्री हरि का निवास, शेष के दस हज़ार फणों से दीप्त।

चॆङ्गट नल्लदिवो शेषाचलमू निङ्गि नुन्न देवतल निजवासमु । मुङ्गिट नल्लदिवो मूलनुन्न धनमु बङ्गारु शिखराल बहु ब्रह्ममयमु ॥ अदिवो अल्लदिवो श्री हरि वासमु पदिवेल शेषुल पडगल मयमु ॥

ceṅgaṭa nalladivō śēṣācalamū niṅgi nunna dēvatala nijavāsamu । muṅgiṭa nalladivō mūlanunna dhanamu baṅgāru śikharāla bahu brahmamayamu ॥ adivō alladivō śrī hari vāsamu padivēla śēṣula paḍagala mayamu ॥

पास ही — वह देखो! — शेषाचल खड़ा है, स्वर्ग के देवताओं का सच्चा घर। आँगन के ठीक सामने आदि-मूल का धन छिपा है: सुनहरे शिखरोंवाला यह पर्वत पूर्ण रूप से ब्रह्ममय है। वह रहा श्री हरि का निवास।

कैवल्य पदमु वेङ्कट नग मदिवो श्री वेङ्कटपतिकि सिरुलैनदि । भाविम्प सकल सम्पद रूपमदिवो पावनमुल कॆल्ल पावन मयमू ॥ अदिवो अल्लदिवो श्री हरि वासमु पदिवेल शेषुल पडगल मयमु ॥

kaivalya padamu vēṅkaṭa naga madivō śrī vēṅkaṭapatiki sirulainadi । bhāvimpa sakala sampada rūpamadivō pāvanamula kella pāvana mayamū ॥ adivō alladivō śrī hari vāsamu padivēla śēṣula paḍagala mayamu ॥

वही वेंकट पर्वत साक्षात् कैवल्य — मोक्ष — का पद है; वही श्री वेंकटपति का ऐश्वर्य है। भावना करके देखो — वह समस्त संपदाओं का रूप है, पवित्रों को भी पावन करनेवाला। वह रहा श्री हरि का निवास, शेष के दस हज़ार फणों से दमकता हुआ।